ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर मे समर केम्प -बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए श्रेष्ठ संस्कार,श्रेष्ठ व्यवहार और श्रेष्ठ लक्ष्य के ऊपर --बीके उषा दीदी
ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर मे समर केम्प -बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए श्रेष्ठ संस्कार,श्रेष्ठ व्यवहार और श्रेष्ठ लक्ष्य के ऊपर --बीके उषा दीदी
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रभु मिलन भवन में पांच दिवसीय बच्चों का समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें बहुत सारे बच्चों ने भाग लिया
बच्चों को पहले दिन मोबाइल की लत से आजादी इसके बारे में बताया, दूसरे इनर पर्सनालिटी अर्थात आंतरिक व्यक्तित्व, तीसरे दिन के कैंप में बताया गया कृतज्ञता अर्थात आभार व्यक्त करना तथा मेडिटेशन, योगा , साथ में बच्चों को आत्मा और परमात्मा का सत्य परिचय दिया गया और चौथे दिन के समर कैंप में बच्चों को बताया गया संतुलन सात्विक जीवन अर्थात शुद्ध आहार शुद्ध विचार पर प्रकाश डाला गया
पांचवें दिन समर कैंप में कल्चर प्रोग्राम में बच्चों ने उमंग उत्साह से भाग लिया जिसमें कविता, डांस,फैंसी ड्रेस कंपटीशन, पेंटिंग ड्राइंग कंपटीशन, गीत कॉम्पिटिशन का आयोजन जिसमें आमंत्रित मुख्य अतिथि के रूप में बिलासपुर क्षेत्रीय संचालिका आदरणीय रमा दीदी जी, जिन्होंने बताया कि वर्तमान समय में माता-पिता अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों को महंगे खिलौने और स् फोन तो देते हैं लेकिन अपनी कीमती समय नहीं दे पाते उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के लिए माता-पिता का साथ किसी भी महंगे उपहार से बड़ा होता है बच्चों को वस्तुओं की मांग नहीं बल्कि प्रेम और समय की अपेक्षा होती है।
निशा यादव अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही जिन्होंने भारत देश के साथ-साथ विदेश के ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ाई करके भारत देश का तिरंगा और शिव बाबा का झंडा लहराया, निशा यादव ने बताया कि अपने लक्ष्य को अपना सपना बना लो तो हम जीवन में असफल कभी नहीं होंगे साथ में फॉरेस्ट विभाग की रेंजर शांता बहन ने बताया कि परमात्मा को याद करने से हर कार्य सफल होते है सभी न अतिथियों ने दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम की सफलता की कामना की । सेंटर इंचार्ज ऊषा दीदी ने सभी बच्चों और पेरेंट्स को बताया कि अगर बच्चे अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो मां-बाप को बच्चों के लिए समय निकालना पड़ेगा, परिवर्तन करना पड़ेगा,तब बच्चे जीवन में आगे बढ़ेंगे बच्चे वह नहीं करते जो हम उन्हें सिखाते हैं बल्कि वह करते हैं जो हमें करते हुए देखते हैं यदि हम चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल कम उपयोग करें या बड़ों का सम्मान करें तो पहले हमें स्वयं के आचरण में वह बदलाव लाना होगा ।
बच्चे अभी एक छोटा सा बीज के समान है उन्हें आप जैसा पानी देंगे वैसा ही फल की प्राप्ति होगी उन्हें बचपन से ही मेडिटेशन परोपकार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देनी चाहिए आध्यात्मिकता से जुड़े रहना घर में भी सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें
बच्चों को नकारात्मक बातों से दूर रखें जैसे की तुमसे नहीं होगा तुम नहीं कर सकते तुमसे नहीं होगा तुम गलत हो फिर नकारात्मक शब्दों के बजाय बच्चों को कहो कि तुम प्रयास करो या तुम बहुत अच्छा कर सकते हो इस तरह के शब्दों का प्रयोग करें फिर सभी को मेडिटेशन के बारे में बताकर कराया गया। निकिता बहन , जीवन भैया , सोनिया बहन वंदना बहन ने सभी बच्चों को सर्टिफिकेट और गिफ्ट दिया । मंच संचालन पूजा बहन के द्वारा हुआ ।





