अध्यात्म
अनमोल वचन
आज का सुविचार
*आज का सुविचार*
रविवार, 19 जुलाई 2020
Edit
🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..19-07-2020*..🎋
✍🏻भलाई करना कर्तव्य नहीं आनंद है। क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य और सुख में वृद्धि करता है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι BkN*🌷
ओमशान्ति
🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻समय और हालात कभी भी कहीं भी बदल सकते है अब देखिये कल तक निकटता प्रेम का प्रतीक थी और आज दूरियाँ प्यार और परवाह की परिचायक है।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
*🎄🌹꧁!! जीवन का सत्य !!꧂🌹🎄*
*हमारे कर्म काटने के लिए ही हमको दु:ख दिये जाते है, दु:ख का कारण तो हमारे अपने ही कर्म है, जिनको हमें भुगतना ही है। यदि दु:ख नही आयेगें तो कर्म कैसे कटेंगे?*
*एक छोटे बच्चे को उसकी माता साबुन से मलमल के नहलाती है जिससे बच्चा रोता है, परंतु उस माता को, उसके रोने की, कुछ भी परवाह नही है, जब तक उसके शरीर पर मैल दिखता है, तब तक उसी तरह से नहलाना जारी रखती है, और जब मैल निकल जाता है, तब ही मलना, रगड़ना बंद करती है।*
*वह उसका मैल निकालने के लिए ही उसे मलती, रगड़ती है, कोई द्वेष्यभाव से नहीं। माँ उसको दु:ख देने के अभिप्राय से नहीं रगड़ती, परंतु बच्चा इस बात को समझता नहीं इसलिए इससे रोता है।*
*इसी तरह हमको दु:ख देने से परमेश्वर को कोई लाभ नहीं है, परंतु हमारे पूर्वजन्मों के कर्म काटने के लिए, हमको पापों से बचाने के लिए और जगत का मिथ्यापन बताने के लिए वह हमको दु:ख होता है।*
*अर्थात् जब तक हमारे पाप नहीं धुल जाते, तब तक हमारे रोने चिल्लाने पर भी परमेश्वर हमको नहीं छोड़ता। इसलिए दु:ख से निराश न होकर, हमें परमात्मा(मालिक) से मिलने के बारे मे विचार करना चाहिए और सत्यता के बारे मे सुमिरण करना चाहिए जी..!!*
🌹🙏🏻🌹✨🌹🙏🏻🌹✨🌹🙏🏻🌹
💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..19-07-2020*..🎋
✍🏻भलाई करना कर्तव्य नहीं आनंद है। क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य और सुख में वृद्धि करता है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι BkN*🌷
ओमशान्ति
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻समय और हालात कभी भी कहीं भी बदल सकते है अब देखिये कल तक निकटता प्रेम का प्रतीक थी और आज दूरियाँ प्यार और परवाह की परिचायक है।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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*🎄🌹꧁!! जीवन का सत्य !!꧂🌹🎄*
*हमारे कर्म काटने के लिए ही हमको दु:ख दिये जाते है, दु:ख का कारण तो हमारे अपने ही कर्म है, जिनको हमें भुगतना ही है। यदि दु:ख नही आयेगें तो कर्म कैसे कटेंगे?*
*एक छोटे बच्चे को उसकी माता साबुन से मलमल के नहलाती है जिससे बच्चा रोता है, परंतु उस माता को, उसके रोने की, कुछ भी परवाह नही है, जब तक उसके शरीर पर मैल दिखता है, तब तक उसी तरह से नहलाना जारी रखती है, और जब मैल निकल जाता है, तब ही मलना, रगड़ना बंद करती है।*
*वह उसका मैल निकालने के लिए ही उसे मलती, रगड़ती है, कोई द्वेष्यभाव से नहीं। माँ उसको दु:ख देने के अभिप्राय से नहीं रगड़ती, परंतु बच्चा इस बात को समझता नहीं इसलिए इससे रोता है।*
*इसी तरह हमको दु:ख देने से परमेश्वर को कोई लाभ नहीं है, परंतु हमारे पूर्वजन्मों के कर्म काटने के लिए, हमको पापों से बचाने के लिए और जगत का मिथ्यापन बताने के लिए वह हमको दु:ख होता है।*
*अर्थात् जब तक हमारे पाप नहीं धुल जाते, तब तक हमारे रोने चिल्लाने पर भी परमेश्वर हमको नहीं छोड़ता। इसलिए दु:ख से निराश न होकर, हमें परमात्मा(मालिक) से मिलने के बारे मे विचार करना चाहिए और सत्यता के बारे मे सुमिरण करना चाहिए जी..!!*
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