अध्यात्म
अनमोल वचन
आज का सुविचार
*आज का सुविचार*
शुक्रवार, 31 जुलाई 2020
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..31-07-2020*..🎋
✍🏻इंसान के ग़ुरूर की औक़ात बस इतनी सी है, ना पहली बार ख़ुद नहा सकता है ना आख़िरी बार।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *ओमशान्ति🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻हर पल मुस्कुराओ, बड़ी खास है जिंदगी। क्या सुख क्या दुःख, बड़ी आस है जिंदगी। ना शिकायत करो ना कभी उदास हो, जिंदा दिल से जीने का अहसास है, जिंदगी।
🌹 *ओमशान्ति*🌹
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*परमात्मा सर्वधर्मात्माओं के पिता है*
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*📚अलग-अलग धर्म ग्रंथो द्वारा परमात्मा के स्वरूप और धाम के बारे में क्या कहा गया* ❓❓
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1⃣ *श्रीमद्भागवतगीता*
अध्याय(8/9)उसमें लिखा है परमात्मा ने अपने स्वरूप के बारे में बताया" मेरा रुप अणु से भी सूक्ष्म है और अचिंत्य है और सूर्य वर्ण और ज्योति स्वरूप है "इससे स्पष्ट है कि भगवान भी आत्माओं की तरह ही एक ज्योति बिंदु ही है।
2⃣ *श्रीमद् भागवत गीता* 📕(अध्याय 13/17)में परमात्मा ने कहा कि" मैं ज्योतियों का भी परम ज्योति हूँ" और उन्होंने अपने धाम के बारे में भी बताया कि उनके धाम में भी अव्यक्त ब्रह्म नामक प्रकाश है उनका धाम अव्यक्त धाम है गीता (अध्याय 8/20-21)में हम देख सकते हैं।
3⃣ *मनुस्मृति* (1/9 )में लिखा है सृष्टि के आरंभ में एक अंड प्रकट हुआ वह हजारों सूर्य के समान तेजस्वी और प्रकाशमान था।
4⃣ *यजुर्वेद* 32/2 का वचन है "सर्वे निमिषा जज्ञिरे विघुत पुरुषादधि "अर्थात वह विद्युतपुरुष (ज्योतिर्लिंग )प्रकट हुआ जिससे निमेष ,कला आदि का प्रारंभ हुआ।
5⃣ *शिव पुराण धर्म संहिता* (2/63- 64) में लिखा है कलयुग के अंत में प्रलय काल में एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ वह पहले अग्नि के समान ज्वालयमान था अथवा तेजोमय था वह ना घटता था ना बढ़ता था ।वह अनुपम था वह अव्यक्त था और उस द्वारा ही सृष्टि का आरंभ हुआ था।
6⃣ ईसाइयों के धर्म ग्रंथ *बाइबिल* तौरेत (अ 1,श्लो 2-4 )में लिखा है कि "ईश्वर की आत्मा जल पर डोलता था" अर्थात ईश्वर भी हमारी ही तरह आत्मस्वरूप आत्मा ही है।
7⃣ *कुरान* में भी कहा गया है:- "अल्लाहू नरुस्मा बाते बलार्द
नुरुनाल्लानुर" सुराह no. 24 यानि खुदा का चेहरा नुरानी है वो नूर सातो आसमानों तक फैला है , वो ही नूर मोमिन के दिलों मे नूरों का भी नूर है।
▪ हम मंदिरो में दीपक जलाते हैं, MOSQUE में चिराग, CHURCH में मोमबत्ती और गुरद्वारे में प्रकाश किया जाता है।
8⃣ श्री गुरु नानक देव जी परमात्मा के धाम और उनके स्वरूप के विषय में क्या कहते हैं।
"पसरी किरणि ज्योति उजाला ।करि करि देखै आपि दयाआला ।।अनहद रुन झुनकार सदा धुनि निरभऊ कै घरि वायिदा।।"
अर्थात:- उस परमात्मा से अथाह प्रकाश निकल रहा है और शब्द की ध्वनि निकल रही है।
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