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राज्य से बाहर गये श्रमिकों के घर वापसी पश्चात प्रशासन के समक्ष उन्हें काम दिलाने की चुनौती थी, जिसे रोजगार गारंटी ने पूरा किया। फिंगेश्वर विकासखण्ड के 5 ग्राम पंचायतों के 10 प्रवासी मजूदरों को 52 दिवस का कार्य उपलबध कराया गया, जिससे उन्हें 7600 रूपये का भुगतान हुआ। ग्राम पोखरा के प्रवासी मजदूर आनंद राम ने बताया कि वे रोजी-मजदूरी के लिए ओडिसा गया हुआ था। लाॅकडाउन के दौरान जब ग्राम पंचायत आया तो उन्हें मनरेगा के तहत चल रहे तालाब गहरीकरण कार्य एवं धरसा निर्माण में कुल 13 दिवस का रोजगार मिला। जिससे उन्हें 2470 रूपये प्राप्त हुआ। इससे उनके परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हुआ। मजदूर आनंद ने बताया कि मनरेगा से हमें रोजगार की चिंता नहीं रही और न ही हमें इधर-उधर भटकने की आश्यकता पड़ी। उनका कहना है कि अब भविष्य में पलायन न करके गांव में ही रहकर कार्य करूंगा।
डबरी निर्माण से खेती और मछली पालन को मिला बढ़ावा
डबरी निर्माण से जल संरक्षण और जल संग्रहण के साथ-साथ रोजगार और आजीविका के संवर्धन से ग्राम बेहराडीह के हितग्राही भगत राम खुश है। उनका कहना है कि उनके मांग पर निजी जमीन में डबरी निर्माण स्वीकृत किया गया। लाॅकडाउन के दौरान डबरी निर्माण से रोजगार तो मिला ही साथ ही अभी बरसात में जल भराव के कारण खेतों में सिंचाई और मत्स्य पालन भी किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले मैं केवल एक फसल लेता था लेकिन अब दोहरी फसल के साथ अपने बाड़ी में भी साग-भाजी का उत्पादन करूंगा। उन्होंने बताया कि डबरी कि निर्माण से आस-पास के किसानों को भी सिंचाई हेतु जल मिलेगा। इसी तरह ग्राम पंचायत चिखली के कोमल राम ने बताया कि उनके निजी जमीन में तालाब निर्माण हेतु नौ लाख 38 हजार रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। तालाब निर्माण की शुरूआत कोरोना संकट के काल में किया गया। डबरी निर्माण से जाॅब कार्डधारी मजदूरों को 4 हजार 824 मानव दिवस का रोजगार मिला। उन्होंने बताया कि इससे गांव वालों को रोजगार भी मिला और नये सिंचाई का साधन मिला।
मनरेगा से उदेराम के परिवार कोे मिला सहारा
छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत जरगांव निवासी श्री उदेराम और देवन्तीन बाई कोरोना संक्रमण के बीच सुकुन से रह रहे है। उन्हें न तो पलायन की चिन्ता है और न ही रोजगार की। कोरोना संकट के दौरान ही रोजगार की आवश्यकता और बरसात में सिंचाई की सुविधा को ध्यान में रखतेे हुए जिला पंचायत द्वारा डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। उदेराम ने बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के इस विपरित परिस्थिति में डबरी निर्माण कार्य में मुझे कुल 30 दिवस का एवं अन्य 20 मजदूरांे को 48-48 दिवस का रोजगार प्राप्त किया। इस कार्य का मनरेगा के तहत 15 दिवस के भीतर भुगतान होने के कारण मुझे लॉकडाउन के स्थिति में आर्थिक रूप से किसी भी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। न ही मुझे रोजगार की समस्या हुई। आज मैं अपने खेत की सिंचाई कर पाने में सक्षम हूं, साथ ही मछली पालन की भी योजना है।
*प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी बना मददगार*
शनिवार, 25 जुलाई 2020
Edit
कोरोना संकट के दौरान जिले में 38 लाख मानव दिवस का सृजन
प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी बना मददगार
संकट में डबरी निर्माण से रोजगार और आजीविका सुनिश्चित
लोगों के मांग के अनुरूप रोजगार की गारंटी देने वाला
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वास्तव में आज
आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन और रोजगार की गारंटी बन गया है। मनरेगा
योजना से कोरोना संकट और लाॅकडाउन के दौरान भी मजदूरों को काम मिलना राज्य
शासन की कोई भूखा न रहे और हर हाथ को काम मिले, ध्येय की पुष्टी करता है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप गरियाबंद जिले में इस दौरान
रोजगारमूलक कार्य स्वीकृत किये गये। जिसमें 38 लाख 12 हजार 880 मानव दिवस
का सृजन किया गया तथा 67 करोड़ 25 लाख रूपये का मजदूरी भुगतान किया गया।
जिससे मजदूर और उनके परिवारों को इस भयावह संकट के दौर में भी आर्थिक तंगी
का सामना नहीं करना पड़ा।
प्रवासी मजदूर को मिला रोजगार का सहारा
प्रवासी मजदूर को मिला रोजगार का सहारा
राज्य से बाहर गये श्रमिकों के घर वापसी पश्चात प्रशासन के समक्ष उन्हें काम दिलाने की चुनौती थी, जिसे रोजगार गारंटी ने पूरा किया। फिंगेश्वर विकासखण्ड के 5 ग्राम पंचायतों के 10 प्रवासी मजूदरों को 52 दिवस का कार्य उपलबध कराया गया, जिससे उन्हें 7600 रूपये का भुगतान हुआ। ग्राम पोखरा के प्रवासी मजदूर आनंद राम ने बताया कि वे रोजी-मजदूरी के लिए ओडिसा गया हुआ था। लाॅकडाउन के दौरान जब ग्राम पंचायत आया तो उन्हें मनरेगा के तहत चल रहे तालाब गहरीकरण कार्य एवं धरसा निर्माण में कुल 13 दिवस का रोजगार मिला। जिससे उन्हें 2470 रूपये प्राप्त हुआ। इससे उनके परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हुआ। मजदूर आनंद ने बताया कि मनरेगा से हमें रोजगार की चिंता नहीं रही और न ही हमें इधर-उधर भटकने की आश्यकता पड़ी। उनका कहना है कि अब भविष्य में पलायन न करके गांव में ही रहकर कार्य करूंगा।
डबरी निर्माण से खेती और मछली पालन को मिला बढ़ावा
डबरी निर्माण से जल संरक्षण और जल संग्रहण के साथ-साथ रोजगार और आजीविका के संवर्धन से ग्राम बेहराडीह के हितग्राही भगत राम खुश है। उनका कहना है कि उनके मांग पर निजी जमीन में डबरी निर्माण स्वीकृत किया गया। लाॅकडाउन के दौरान डबरी निर्माण से रोजगार तो मिला ही साथ ही अभी बरसात में जल भराव के कारण खेतों में सिंचाई और मत्स्य पालन भी किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले मैं केवल एक फसल लेता था लेकिन अब दोहरी फसल के साथ अपने बाड़ी में भी साग-भाजी का उत्पादन करूंगा। उन्होंने बताया कि डबरी कि निर्माण से आस-पास के किसानों को भी सिंचाई हेतु जल मिलेगा। इसी तरह ग्राम पंचायत चिखली के कोमल राम ने बताया कि उनके निजी जमीन में तालाब निर्माण हेतु नौ लाख 38 हजार रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। तालाब निर्माण की शुरूआत कोरोना संकट के काल में किया गया। डबरी निर्माण से जाॅब कार्डधारी मजदूरों को 4 हजार 824 मानव दिवस का रोजगार मिला। उन्होंने बताया कि इससे गांव वालों को रोजगार भी मिला और नये सिंचाई का साधन मिला।
मनरेगा से उदेराम के परिवार कोे मिला सहारा
छुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत जरगांव निवासी श्री उदेराम और देवन्तीन बाई कोरोना संक्रमण के बीच सुकुन से रह रहे है। उन्हें न तो पलायन की चिन्ता है और न ही रोजगार की। कोरोना संकट के दौरान ही रोजगार की आवश्यकता और बरसात में सिंचाई की सुविधा को ध्यान में रखतेे हुए जिला पंचायत द्वारा डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया। उदेराम ने बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के इस विपरित परिस्थिति में डबरी निर्माण कार्य में मुझे कुल 30 दिवस का एवं अन्य 20 मजदूरांे को 48-48 दिवस का रोजगार प्राप्त किया। इस कार्य का मनरेगा के तहत 15 दिवस के भीतर भुगतान होने के कारण मुझे लॉकडाउन के स्थिति में आर्थिक रूप से किसी भी प्रकार की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। न ही मुझे रोजगार की समस्या हुई। आज मैं अपने खेत की सिंचाई कर पाने में सक्षम हूं, साथ ही मछली पालन की भी योजना है।
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