*मशहूर शायर राहत इंदौरी का दो बार दिल का दौरा पड़ने से निधन,* - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

*मशहूर शायर राहत इंदौरी का दो बार दिल का दौरा पड़ने से निधन,*

मशहूर शायर राहत इंदौरी का दो बार दिल का दौरा पड़ने से निधन, कोरोना पॉजिटिव आई थी रिपोर्ट


जाने माने शायर और गीतकार राहत इंदौरी का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। राहत इंदौरी कोरोना संक्रमित होने के बाद इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती थे। राहत इंदौरी ने अपनी शायरी और गजलों से इश्क को जहां एक अलग अंदाज़ में बयां किया वहीं उनके सियासी शेर ने व्यवस्था को आइना दिखाने का काम भी किया। आइए एक नजर डालते हैं राहत इंदौरी के उन फेमस शेर पर जिन्हें लोगों ने कई बार दोहराया। 
-दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।
शाखों से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे
-अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
बस्तियां छोड़ के जाने को कहा जाता है।
-जिस दिन से तुम रुठीं
मुझ से रुठे-रुठे हैं
चादर-वादर,तकिया-वकिया,
बिस्तर-विस्तर सब
इबादतों की हिफाजत भी उनके जिम्मे हैं,
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं।
-अफवाह थी की मेरी तबियत खराब है
लोगों ने पूछ-पूछ के बीमार कर दिया।
-अब कहां ढूढने जाओगे हमारे कातिल
आप तो तत्ल का इल्जाम हमीं पर रख दो।
 *राहत इंदौरी जीवन पर्यंत शब्दों से खेले*

  *राजिम के  कवियों ने शायर इंदौरी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि..*

राजिम 

  मशहूर शायर डाँ राहत इंदौरी का आज अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर फैल गई है।कवि, साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।  इसी कड़ी में राजिम के प्रयाग साहित्य समिति के कवि साहित्यकार एवं शायरों ने 2 मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।  इस मौके पर युवा शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर ने बताया कि इंदौरी साहब शब्दों के जादूगर थे। अपनी शायरी से लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मशहूर शायर थे। उन्होंने बताया कि मेरी पसंदीदा शायरों की फेहरिस्त में राहत इंदौरी साहब का नाम पहली सफ़ में है ,शायरी को तहत में कहने का अंदाज सबसे दिलचस्प था जो सीधे दिलों को छू जाती थी।डाँ इन्दौरी साहब युवाओ के प्रेरणा स्रोत रहे हैं,उनकी शायरी ने युवाओ को संभाला है । व्यंग्यकार संतोष सेन ने कहा कि मंचों में छा जाने वाले शायर राहत इंदौरी जीवन पर्यंत शब्दों से खेलते रहे, उनसे हमें हमेशा लगातार लिखने की प्रेरणा मिलती है। उनके लिखे हुए एक-एक पंक्ति अपने आप में पूर्णता की ओर इंगित करता है। हास्य कवि गोकुल सेन ने कहा कि राहत इंदौरी साहब करीब दो दर्जन फिल्मों में गीत लिखे हैं जिनमें अधिकांश फिल्मों के गीत हिट हुए हैं उनकी पंक्ति आज भी मुझे याद आता है अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है, ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में ,किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।  कवि एवं लेखक संतोष कुमार सोनकर मंडल ने बताया कि उनका जन्म मध्य प्रदेश में स्थित इंदौर के कपड़ा मिल कर्मचारी के घर में हुआ था वह अपने परिवार में भाई बहनों में चौथे स्थान पर है। 1972 में 19 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली कविता सार्वजनिक की। उनके गीतों  में 11 से अधिक ब्लॉकबस्टर बॉलीवुड फिल्मों में इस्तेमाल किया गया, जिनमें से मुन्ना भाई एमबीबीएस एक है। कवि तुकाराम कंसारी ने कहा कि इंदौरी साहब एक सरल व स्पष्ट भाषा में कविता लिखते थे। वह अपनी शायरी में नज़्मों को एक खास शैली में प्रस्तुत करते थे। गीतकार  टीकम चंद सेन, नूतन साहू, मनोज सेन ,नरेश साहू प्रमुख रूप से उपस्थित थे।*
Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads