ऑनलाइन सत्संग का आयोजन पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी द्वारा - fastnewsharpal.com
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ऑनलाइन सत्संग का आयोजन पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी द्वारा

  ऑनलाइन सत्संग का आयोजन पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी द्वारा 



भक्ति भावना,  ज्ञान,  प्रेम,  स्नेह,  मधुर भजन, व्यावहारिक , समाजिक समसामयिक  विषयक भाव से समाहित ऑनलाइन सत्संग का आयोजन पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी द्वारा प्रतिदिन उनके ऑनलाइन ग्रुप सीता रसोई संचालन ग्रुप में सुबह 10:00 से 11:00 बजे और दोपहर 1:00 से 2:00 बजे किया जाता है जिसमें सभी भक्तगण जुड़कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करते हैं

             आज के सत्संग परिचर्चा में ऋचा बहन ने प्रश्न किया कि, आदिशक्ति लक्ष्मी मैया को कमल पुष्प इतना अधिक प्रिय क्यों होता है, माता लक्ष्मी के कमलासना भाव को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प बहुत अधिक प्रिय है, कमल पुष्प पर माता लक्ष्मी का वास होता है उनकी पूजा में इसका विधान है यह भगवान विष्णु के हाथों में सुशोभित है कमल पुष्प की सुंदरता आसक्ति रहित जीवन का प्रतीक है संसार में सबसे अधिक पवित्र वस्तुओं में से एक कमल पुष्प है, यह भगवान विष्णु की नाभि से प्रकट हुआ है और भगवान ब्रह्मा जी का इसमें प्रागट्य  माना गया है, इस प्रकार यह भगवान विष्णु का मानस पुत्र एवं ब्रह्मा जी का जनक है, यह पूरे ब्रह्मांड में पवित्र एवं दिव्य स्वरूप का भी प्रतीक है इसलिए माता लक्ष्मी को कमल पुष्प बहुत प्रिय है माता लक्ष्मी को केवल कमल पुष्प ही नहीं उसके बीज कमलगट्टे की माला भी अति प्रिय है इसकी  आहुति भी मां को बहुत अधिक प्रिय है इसकी लाई अर्थात मखाना का भोग उसकी खीर, उसके बताशे मां को  भोग  में बहुत पसंद है

      सत्संग परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए रामफल जी ने रामचरितमानस की चौपाई "तुलसी देखी सुबेसु...... " के भाव को स्पष्ट करने की विनती बाबा जी से कि तुलसीदास जी की रामचरितमानस की इन पंक्तियों के भाव को स्पष्ट करते हुए बाबा जी ने बताया कि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कुछ चौपाइयां ऐसी उद्धृत की है, जो अति विचारणीय है, इन चौपाइयों में मयूर को उन लोगों की संज्ञा दी गई है जो दिखने ओर बोलने में तो बहुत सुंदर होते हैं लेकिन उनका दिल कपटी होता है, जिस प्रकार मयूर दिखने में बहुत सुंदर होता है लेकिन वह सर्प का भोजन करता है वैसे ही कुछ लोग बोलने में तो बहुत तेज मधुर बोलते हैं और दिखने में भी अच्छे दिखते हैं लेकिन  वे  मांसाहारी मदिरा पान करने वाले होते हैं उनका आचरण अच्छा नहीं होता तो ऐसे लोगों को हमें कभी प्रणाम नहीं करना चाहिए, कुछ लोग जाति से भले ही ब्राह्मण हो लेकिन वह ब्राह्मण का आचरण नहीं करते तो ऐसे लोग ब्राह्मण  श्रेणी में कतई नहीं आते, कुछ लोग रुप तो साधु संत का बना लेते हैं लेकिन आचरण सामान्य जन का ही होता है 

माता सीता रावण के साधु रूप को ही देखकर ही भृमित हुई थी आज की माताओं के लिए विशेष रूप से निवेदन है कि अति अंधविश्वास ना करें कोई भी मैं ज्योतिषी हूं पंडित हूं ज्ञाता हूं तो आप उन पर अंधविश्वास करके उन्हें दान प्रदान कर देते हैं, यही अंधविश्वासी  लोग धर्म को धंधा बना कर बैठ गए हैं, और जो महान साधु संत हैं वह इनके कारण से बदनाम होते जा रहे हैं अतः आप अपने श्रद्धा भाव को थोड़ा नियंत्रण में रखें ।

 

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