दया ही धर्म की मूल है यदि हमारे मन मे दयाभाव नही तो कोई भी दैविय गुन हृदय में नही आएंगे - fastnewsharpal.com
फास्ट न्यूज हर पल समाचार पत्र,

दया ही धर्म की मूल है यदि हमारे मन मे दयाभाव नही तो कोई भी दैविय गुन हृदय में नही आएंगे

दया ही धर्म की मूल है यदि हमारे मन मे दयाभाव नही तो कोई भी दैविय गुन हृदय में नही आएंगे



श्री पाटेश्वर धाम जिला बालोद के संत राम बालक दास जी के द्वारा संचालित ऑनलाइन सत्संग का आज 138 वा दिन रहा सुबह 10:00 से 11:00 बजे एवं दोपहर 1:00 से 2:00 बजे व्हाट्सएप ग्रुप में और युटुब चैनल  पर लाइव रहकर हजारों लोगों से संत श्री जुड़े और उन्होंने सुमधुर भजनों के साथ-साथ रामचरितमानस के सुंदर प्रसंगों पर चर्चा की पाठक परदेसी जी के द्वारा पूछे गए विषय 

"" दया धर्म की मूल है पाप मूल अभिमान "" पर बोलते हुए अपने चिर परिचित अंदाज में बड़ी सरलता से संत श्री ने दया धर्म की महिमा बताई उन्होंने कहा कि दया ही वह मूल स्रोत है जिसके कारण सारे देवीय गुण हमारे जीवन में आते हैं अतः माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को बचपन से ही उनके आसपास के परिवेश बोलचाल और खानपान में दया का पाठ पढ़ाएं बच्चे दयालु बनेंगे तो अपने आप ही उनमें अन्य संस्कार आ जाएंगे इसी तरह अभिमान पर चर्चा करते हुए बाबा जी ने बताया कि अहंकार ही वह सबसे बड़ा शत्रु है जिसके कारण संपूर्ण पाप होते हैं  "" पाप मूल अभिमान अभिमान  "" 

इससे बचने का बहुत सरल सा रास्ता संत श्री ने बताया कि आइए हम यह अभिमान करें कि हम धर्मात्मा हैं हम सज्जन हैं हम परमात्मा के सेवक हैं 

"" अस अभिमान जाहि जनि भोरे मैं सेवक रघुपति पति मोरे ""

इस अभिमान के आते ही सांसारिक अभिमान का नाश हो जाएगा इस तरह आज के सत्संग की परिचर्चा सार्थक रही 

जय सियाराम जय गौ माता जय गोपाल

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads