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मत्स्य कृषक को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार,मत्स्य कृषकों को मिलेगा बल

 मत्स्य कृषक को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार,मत्स्य कृषकों को मिलेगा बल




जयलाल प्रजापति/नगरी

धमतरी जिले में संचालित एमआईके फिश कम्पनी के संचालक को मछली पालन और उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है इन्हें बेस्ट प्रोफाइल ट्री फर्म संवर्ग के तहत सम्मानित किया गया है.




दरअसल सिहावा क्षेत्र के साथ पूरे देश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में एमआईके फिश कंपनी ने एक नया आयाम स्थापित किया है.यही वजह है कि हाल ही में विश्व मत्स्य की दिवस के अवसर पर भारत शासन द्वारा एपी सी म्यूजियम हाल पूसा केंपस नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में संचालक इमरान खान को इस राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है.



एमआईके कंपनी के संचालक इमरान खान को गरिमामयी समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी के हाथों एक लाख नगद पुरस्कार प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह जब भेंट किया गया.इस पुरुष्कार न सिर्फ सिहावा नगरी नाम रोशन हुआ है बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ गौरान्वित हुआ है.



कंपनी के संचालक इमरान खान ने बताया कि 30 वर्ष पूर्व इनके पिता अब्दुल जब्बार खान ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में जब कदम रखा था.पहले लोगों ने कहा कि यह क्षेत्र खतरों से भरा है लेकिन कहते है न कि हौसले बुलंद हो तो हर मुश्किल राह आसान हो जाता है.इमरान और उनके परिवार 30 वर्षों से मतस्यपालन के क्षेत्र में काम कर रहे है.नतीजन इस व्यवसाय के साथ जुड़कर इमरान और उनके परिवार ने नाम तो कमाया ही और शोहरत भी.


गौरतलब है कि यह पुरुष्कार पूरे भारत में केवल 1 ही मतस्य कृषक को मिलता है जो उच्चतम खतरे उठाकर मत्स्य पालन के अधिकतम पद्धतियों पर कार्य करते है.एमआईके कंपनी देश में सर्वाधिक अधिकतम पद्धति पर कार्य करने के साथ ही जलाशय से प्रबंधन में पूरे देश में प्रथम स्थान रखती है.मत्स्य पालन के क्षेत्र में कार्य करते हुए इस कंपनी का कार्य जब 3 अन्य राज्यों में भी फैल चुका है.


2012 में भारत के राष्ट्रपति के हाथों और 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री,2014 छत्तीसगढ़ के राज्यपाल,2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार भारत सरकार के प्रधानमंत्री के द्वारा और छत्तीसगढ़ सरकार के ओर से अनेकों पुरस्कार प्राप्त हो चुके है.इमरान खान कहते हैं कि आदिवासी अंचल में रहकर अपने पिता के सपनों को साकार करते हुए अपने टीम साथियों की कड़ी मेहनत और क्षेत्रवासियों की बदौलत प्राप्त किया है.वह इस पुरस्कार को समस्त मत्स्य पालको को समर्पित करते है.


इमरान के पिता जी आज भी सुबह से जलाशय जाते है.इमरान खान का कहना है कि पिताजी का पूरा समय और मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहता है पिता से ही कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है. वर्तमान में वह युवा पीढ़ी को संदेश देना चाहते हैं कि मत्स्य उद्योग में अपार संभावनाएं है इसे अपनाकर आत्मनिर्भर बना जा सकता है.


बहरहाल इमरान की इस फिश कम्पनी में कई बेरोजगारों को रोजगार मिल रहा है यहां लगभग दो हजार से ज्यादा मजदूर काम करते है और अब मत्स्य पालन किस क्षेत्र में मिल रहे राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से जिले के अन्य मत्स्य कृषकों को भी बल मिलेगा.

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