केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनो कृषि अधिनियम किसानों के लिए हितकारी हैं, इन तीनों कृषि बिल में कहीं ऐसी बात का उल्लेख नही है जिससे देश के किसानों को कोई नुकसान हो - fastnewsharpal.com
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केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनो कृषि अधिनियम किसानों के लिए हितकारी हैं, इन तीनों कृषि बिल में कहीं ऐसी बात का उल्लेख नही है जिससे देश के किसानों को कोई नुकसान हो

 केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनो कृषि अधिनियम किसानों के लिए हितकारी हैं, इन तीनों कृषि बिल में कहीं ऐसी बात का उल्लेख नही है जिससे देश के किसानों को कोई नुकसान हो



गोबरा नवापारा नगर

केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनो कृषि अधिनियम किसानों के लिए हितकारी हैं, इन तीनों कृषि बिल में कहीं ऐसी बात का उल्लेख नही है जिससे देश के किसानों को कोई नुकसान हो। वर्तमान कथित किसान आंदोलन के चेहरा, चरित्र चाल देखने से स्पष्ट हो जाता है कि इन कथित आंदोलनकारियों के " निगाहें कहीं और निशाना कहीं और है। उक्त बातें  भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप शर्मा ने स्थानीय संवादाताओं से चर्चा में कही। श्री शर्मा ने आगे बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पारित " कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य विधेयक" से किसानों को अपने उपज को बेचने के लिए खुले बाजार की सुविधा उपलब्ध होगी, इसके माध्यम से किसान "एक देश एक बाजार" के अंतर्गत देश के किसी भी भाग के लाइसेंसी व्यापारी को ई मार्केटिंग के माध्यम से बिना किसी अतिरिक्त टेक्स दिए अपनी उपज बेचने की सुविधा प्रदान करता है। इसके साथ वर्तमान मंडी (एपीएमसी) की व्यवस्था भी बनी रहेगी। किसान चाहें तो मंडी में अपनी उपज बेच सकते हैं। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन फसलों के समर्थन मूल्य घोषित किये जाते हैं वह भी जारी रहेंगे। मोदी जी की नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार ने पिछले 6 वर्षों के कार्यकाल में गेहूं का समर्थन मूल्य 1400 ₹ से बढ़ा कर  1975₹ ,धान का 1310₹ से 1888₹, जौ का 1100₹ से 1600₹, चना का 3100₹ से 5100₹ अरहर का 4300 ₹ से 6000₹ ,कुसुम का 3000₹ से 5327₹ सरसों का 3050₹ से 4650₹ , मूंग का 4500₹ से बढ़ाकर 7200₹ कर दिए ये बढोतरी  50% प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक है जो अल्प समय मे अभूतपूर्व बढ़ोतरी है। श्री शर्मा ने दूसरे और तीसरे विधेयक पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि " कृषक कीमत आश्वासन और कृषक सेवा पर करार विधेयक" जिसे कांट्रेक्ट फार्मिंग कहा जाता है इसके माध्यम से छोटे किसानों का समूह बनाकर खेती कर अपने उपज का उचित मूल्य प्राप्त किया जा सकता है, ऐसे कांट्रेक्ट को तोड़ने किसान स्वतंत्र होंगे जबकि क्रेता व्यापारी के लिए कांट्रेक्ट बंधनकारी होगा। वहीं " आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक" में शीघ्र नाशवान वस्तु ( आलू, प्याज, टमाटर, फल) के भंडारण कर कई गुना मुनाफा कमाने के लिए कीमत में किया जाने वाले बढ़ोतरी पर ब्रेक लगाई गई है वहीं  धान और गेहूं जैसे फसलों के दाम न बढ़े इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लगाई गई ब्रेक में ढील दी गयी है इससे आने वाले समय मे धान, गेहूं जैसे कृषि उत्पाद के अच्छे दाम मिल सकेंगे।



       वर्तमान किसान आंदोलन को विधेयक विरोधी आंदोलन के बजाय मोदी विरोधी आंदोलन बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि कथित किसान आंदोलन में लगाये जा रहे नारे, विधेयक को लेकर तर्क के बदले कुतर्क, नेतृत्व करने वाले चेहरे जो पिछले कई चुनाव में मोदी जी के हांथो पिट चुके लोगों की भीड़ से आंदोलन का उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है। ये कथित विरोधी पहले कहते थे कि बिल में MSP का उल्लेख करो, केंद्र सरकार लिखित में देने तैयार है, विरोधी कहते थे इससे मंडी समाप्त हो जाएगी, केंद्र ने इस पर मंडी व्यवस्था बने रहने अस्वस्थ कर दिया, विरोधियों ने कहा कि मंडी के बाहर बिक्री में टेक्स नही लगने पर मंडी को नुकसान होगा,इस पर केंद्र सरकार मंडी के बाहर "ई" मार्केटिंग पर टैक्स लगाने भी तैयार है , कथित आंदोलनकरियो ने कहा कि इससे सरकारी खरीद बन्द होगी तो सरकार ने इसे पूर्ववत जारी रखने आश्वस्त किया, छत्तीसगढ़ में तो धान की सरकारी खरीद को इस वर्ष 50 प्रतिशत बढ़ा भी दिया।जब कथित आंदोलनकारियों की सभी बातें मान ली गई तब कह रहे हैं कि पूरा बिल वापस लों। काल्पनिक प्रश्न पैदा कर विघ्न डालना इनका उद्देश्य दिख रहा है। इससे आंदोलन की मोदी विरोधी एजेंडा स्पष्ट है।


         श्री शर्मा ने प्रदेश के किसानों को आश्वस्त किया है कि आने वाले समय मे तीनो कृषि विधेयक किसानों के हित के लिए मील का पत्थर साबित होगा।बल्कि राज्य की भूपेश सरकार द्वारा किये गए संशोधन में तो मंडी टेक्स 5 प्रतिशत से बढ़ा कर 8 प्रतिशत कर दिया गया इसके माध्यम से किसानों से 300 करोड़ अतिरिक्त वसूली काV रास्ता बनाया गया है।, आखिर टेक्स का पैसा तो किसानों के जेब से ही जायेगा,और इससे किसानों के ही नुकसान होगा। इसी कारण अभी मंडियों में धान के दाम समर्थन मूल्य से 400₹ नीचे चले गए।

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