आज का चिंतन (सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन (सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..15-02-2021*..🎋


✍🏻अहंकार और सँस्कार में फर्क है अहंकार दूसरे को झुकाकर खुश होता हैं और सँस्कार स्वयं झुककर खुश होता हैं।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻सबको हँसाना लेकिन कभी किसी पर हसना मत सबके दुख बाटना लेकिन किसी को दुखी मत करना सबकी राह में दीप जलाना लेकिन किसी का दिल मत जलाना यही जीवन की रीत हैं जैसा बोओगे वैसा ही पाओगें।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

 *संस्कार* और *संक्रमण* दोनों ही एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में फैलते हैं। संस्कार जगत में मानव सभ्यता की *स्थापना* करते हैं... जबकि संक्रमण बीमारी फैला कर मानव सभ्यता का *विनाश* करता है।

🌸 सुप्रभात... 

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

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अनमोल वचन :                    

सुखी जीवन जीने का केवल एक ही रास्ता है वह है जीवन में कमियों की तरफ नजर न डालना। आज हमारी स्थिति यह है जो हमें प्राप्त है उसका आनंद तो लेते नहीं,परन्तु जो प्राप्त नहीं है उसका चिन्तन करके जीवन को शोकमय बना लेते हैं। दुःख का मूल कारण हमारी जरूरतें नहीं, इच्छाएंँ हैं। हमारी जरूरतें तो कभी पूरी भी हो सकती हैं मगर इच्छाएंँ नहीं। इच्छाएंँ कभी पूरी नहीं हो सकतीं और न ही किसी की हुईं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है। इसलिए दुःख का मूल कारण हमारी इच्छाएंँ ही हैं। इसके अलावा हमें संसार में कोई दुःखी नहीं कर सकता़....   

🙏ओम् शान्ति🙏 

💐आपका दिन शुभ हो 💐

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ओम शान्ति
जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता। जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का। जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाएगी उस दिन कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता।    
             जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों की बजाय काँटो पर ही लगी रहती है। जीवन का तिरस्कार वे ही लोग करते हैं जिनके लिए यह मूल्यहीन है। जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को नहीं पाया जा सकता है। जीवन का तिरस्कार नहीं अपितु इससे प्यार करो। जीवन को बुरा कहने की अपेक्षा जीवन की बुराई मिटाने का प्रयास करो, यही समझदारी है।
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️  


   *👉🏿सबसे बड़ा धन 🏵️

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किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी । 


बूढ़ा बाप जो किसी समय अच्छा खासा नौजवान था आज बुढ़ापे से हार गया था, चलते समय लड़खड़ाता था लाठी की जरुरत पड़ने लगी, चेहरा झुर्रियों से भर चूका था बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहा था।


घर में एक चीज़ अच्छी थी कि शाम को खाना खाते समय पूरा परिवार एक साथ टेबल पर बैठ कर खाना खाता था । 


एक दिन ऐसे ही शाम को जब सारे लोग खाना खाने बैठे । बेटा ऑफिस से आया था भूख ज्यादा थी सो जल्दी से खाना खाने बैठ गया और साथ में बहु और उसका एक बेटा भी खाने लगे ।


बूढ़े हाथ जैसे ही थाली उठाने को हुए थाली हाथ से छिटक गयी थोड़ी दाल टेबल पे गिर गयी । 


बहु बेटे ने घृणा द्रष्टि से पिता की ओर देखा और फिर से अपना खाने में लग गए।


बूढ़े पिता ने जैसे ही अपने हिलते हाथों से खाना खाना शुरू किया तो खाना कभी कपड़ों पे गिरता कभी जमीन पर ।


बहु चिढ़ते हुए कहा – हे राम कितनी गन्दी तरह से खाते हैं मन करता है इनकी थाली किसी अलग कोने में लगवा देते हैं , बेटे ने भी ऐसे सिर हिलाया जैसे पत्नी की बात से सहमत हो । उनका बेटा यह सब मासूमियत से देख रहा था ।


अगले दिन पिता की थाली उस टेबल से हटाकर एक कोने में लगवा दी गयी । पिता की डबडबाती आँखे सब कुछ देखते हुए भी कुछ बोल नहीं पा रहीं थी।


बूढ़ा पिता रोज की तरह खाना खाने लगा , खाना कभी इधर गिरता कभी उधर । छोटा बच्चा अपना खाना छोड़कर लगातार अपने दादा की तरफ देख रहा था । 


माँ ने पूछा क्या हुआ बेटे तुम दादा जी की तरफ क्या देख रहे हो और खाना क्यों नहीं खा रहे । 


बच्चा बड़ी मासूमियत से बोला – माँ मैं सीख रहा हूँ कि वृद्धों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप लोग बूढ़े हो जाओगे तो मैं भी आपको इसी तरह कोने में खाना खिलाया करूँगा ।


बच्चे के मुँह से ऐसा सुनते ही बेटे और बहु दोनों काँप उठे शायद बच्चे की बात उनके मन में बैठ गयी थी क्युकी बच्चा ने मासूमियत के साथ एक बहुत बढ़ा सबक दोनों लोगो को दिया था ।


बेटे ने जल्दी से आगे बढ़कर पिता को उठाया और वापस टेबल पे खाने के लिए बिठाया और बहु भी भाग कर पानी का गिलास लेकर आई कि पिताजी को कोई तकलीफ ना हो ।


*तो मित्रों , माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें लेकिन माँ बाप से बड़ा धन इस दुनिया में कोई नहीं है।*

*माँ बाप की हमेशा निस्वार्थ भाव से सेवा एवं इज्जत करिए, हम जैसा करेंगे वैसा ही हमें भी मिलेगा*    



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