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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..05-02-2021*..🎋
✍🏻सत्य हमेशा पानी में तेल की एक बून्द के समान होता है, आप कितना भी पानी डालें वह हमेशा ऊपर ही तैरता है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻 ✍🏻हम जो कमाते है उससे हमारा गुजा़रा होता हैं, लेकिन हम जो दान देते हैं उससे हमारा जीवन खु:शनुमा बनता हैं। हम जो दे रहे हैं उसके प्रति सजग रहें क्योंकि दान देने से हम अपना भविष्य बना रहे हैं। कर्म का नियम हमेशा काम करता है, जो दोगे सो पाओगे।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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ओम शान्ति
*प्रसन्नता कोई तुम्हें नहीं दे सकता, ना ही बाजार में किसी दुकान पर जाकर पैसे देकर आप खरीद सकते हैं। अगर पैसे से प्रसन्नता मिलती तो दुनिया के सारे अमीर खरीद लेते।*
*प्रसन्नता जीवन जीने के ढंग से आती है। जिंदगी भले ही खूबसूरत हो लेकिन जीने का अंदाज खूबसूरत ना हो तो जिंदगी को बदसूरत होते देर नहीं लगती। झोंपड़ी में भी कोई आदमी आनन्द से लबालब मिल सकता है और कोठियों में भी दुखी, अशांत, परेशान आदमी मिल जायेगा।*
*आज से ही सोचने का ढंग बदल लो जिंदगी उत्सव बन जायेगी। स्मरण रखना संसार जुड़ता है त्याग से और बिखरता है स्वार्थ से। त्याग के मार्ग पर चलोगे तो सबका अनुराग बिना माँगे ही मिलेगा और जीवन बाग़ बनता चला जायेगा।*
ॐ शांति
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*Om Shanti & Good Morning* 🌹
जैसे संसार की स्थूल *चीजों* को पाने के लिये स्थूल धन *अनिवार्य* है ... वैसे ही सूक्ष्म *मन* की *सुख-शान्ति* को अर्जित करने के लिये सूक्ष्म धन अनिवार्य है ... और वह *धन* है ... ज्ञान ... ध्यान व दुआएं ...
🙏 *ॐ शांति* 🙏
जब हम अपनी *दिनचर्या* के कार्य पूरी *ईमानदारी* से निभाने लगते हैं तो भगवान से योग अपने आप बढ़ने लगता है ... क्योंकि उससे योग का *आधार* है ... स्वयं के साथ जुड़ी हुई आत्माओं को अपने मन ... वचन व कर्म से *सुख* पहुंचाना ...
🌸 सुप्रभात ...
💐💐 आपका दिन शुभ हो ... 💐💐
👏🌹😊अनमोल मोती-
जब हमें यह समझ आ जाती है, कि इस संसार की हर चीज़ नष्ट होने की ओर ही बढ़ रही है, तब हमारे लिए हर चीज़ का महत्व,सिर्फ इस्तेमाल करने के लिए हो जाता है, न कि सदा के लिए पकड़ कर रखने के लिए होता है
*ओम शांति, सुप्रभात*
👍💖😊
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*❤️(●ओम शान्ति●)❤️*
_कई लोग ये पूछते है कि प्रूफ कीजिये की परमात्मा कैसे आकर ज्ञान दे रहे है, हमें तो बिल्कुल विश्वास नही❓❓_
_तो इसके लिये क्या-क्या बातें सटीक जवाब हो सकते है।_
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_✵ आज दुनिया में हर धर्म में ईश्वर को पुकार रहे है, मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारे बना रहे है -भक्ति चरम सीमा पर है।अगर ईश्वर कभी भी इस धरा पर नहीं आये होंगे, उनके साथ हमारा कोई सम्बन्ध सम्पर्क नहीं था तो फिर यह सब क्यों चल रहा है? भगवान अब इस धरा पर आकर भक्तों को भक्ति का फल दे रहे है।भक्ति का फल है ईश्वरीय ज्ञान।_
_✵ भारत में देवी-देवताओं की इतनी पूजा होती है।वे देवी-देवता कहाँ से आये? उनको बनाने वाला कौन है? देवी- देवताओं को भगवान-भगवती मानते है।लेकिन सभी जानते है कि *ईश्वर एक है*।कहावत है - *God has made man in His own image*. तो परमात्मा अभी सृष्टि पर आकर साधारण मनुष्य को सत्य ज्ञान और राजयोग सिखाकर नर से श्री नारायण, नारी से श्री लक्ष्मी बना रहे है।_
_✵ ईश्वर उसी को कहा जाना चाहिए जो_
_-- *सर्व धर्म मान्य हो।*_
_★-- *सर्वोच्च हो*_
_★-- *सर्वज्ञ हो*_
_★-- *सर्वोपरि हो*_
_★-- *सर्वशक्तिमान हो*_
_आज सभी धर्म परमात्मा के निराकार ज्योति स्वरुप को सहज ही स्वीकार करते हैं। सत्य की खोज में मानव भटक रहा है।ईश्वर के बारे में बहुत सारी मान्यता हो गई है।ईश्वर के नाम पर मनुष्य अनेक धर्मों में बँट गये है।यह वही समय है जबकि स्वयं ईश्वर आकर अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान दे रहे है। सर्व गुणों में अनन्त होने के कारण उनका सही परिचय वह ख़ुद आकर देते है।_
_✵ परमात्मा अजर, अमर, अविनाशी है, जन्म-मरण के चक्र में आते नहीं है। भगवान को अपना शरीर नहीं है, देवताओं को भगवान नही कह सकते।इसलिए शिव पुराण में आता है की मैं ब्रह्मा के ललाट से प्रगट होकर सृष्टि की रचना करता हूँ।_
_✵ परमात्मा किसी माता के गर्भ से अथवा किसी मनुष्य के बीज से जन्म नहीँ लेते, बल्कि वह तो किसी साधारण मनुष्य के तन में प्रवेश होते है।अतः परमात्मा के दिव्य अवतरण की सबसे बड़ी पहचान तो यही है।क्योंकि अन्य मनुष्य, साधु, संत आज जो अपने आप को परमात्मा घोषित करते है, यह नहीँ कह सकते हैं कि उनका जन्म माता के गर्भ से नहीँ हुआ और यदि वे कहे कि परमात्मा ने उनके शरीर में प्रवेश किया है, तो वह यह बात विवेक संगत और युक्ति के साथ नहीँ बता सकते कि परमात्मा कहाँ से अवतरित हुए है, उनका क्या स्वरुप है। उन्होंने किस ईश्वरीय कार्य के लिए शरीर में प्रवेश किया है, उस कार्य को कैसे सम्पन्न करेंगे आदि-आदि।_
_✵ परकाया प्रवेश के सिद्धांत को तो हममें से अधिकतर लोग मानते है।कई बार कोई अशुद्ध आत्मा किसी के शरीर में प्रवेश करती है, फिर शंकराचार्य द्वारा परकाया प्रवेश का वृतांत तो सनातन धर्मी, आर्य समाजी आदि सभी लोग मानते है।_
_✵ शंकराचार्य की जीवन कहानी में लिखा है, कि राजा अमरूक जंगल मे शिकार खेलने गए थे।वहाँ उनकी मृत्यु हो गई। शंकराचार्य अपने शिष्यों सहित जंगल में रहे थे, तब उन्होंने गृहस्थ का अनुभव करने के विचार से अपना संन्यासी वेष वाला शरीर छोड़कर राजा अमरुक के तन मे प्रवेश किया और राजा की नगरी में चले गए।जहाँ बाद में राजा के बदले व्यवहार से कुछ समय बाद मंत्री और रानियों ने पहचान लिया। दूसरी ओर उनके संन्यासी वेश की उनकी शिष्यों ने तब तक रक्षा की जब तक कि उसमें वह आत्मा वापस लौट नही आई।_
_✵ जिस व्यक्ति की जैसी बोलचाल, जैसा व्यवहार, जैसा संस्कार व जैसा आचार होता है, उसी से समझा जा सकता है कि उस व्यक्ति के शरीर में कैसी आत्मा विराजमान है।ठीक इसी तरह परमात्मा जब परकाया प्रवेश करते हैं तो उनकी बोलचाल उनके द्वारा दिए दिव्य ज्ञान आदि से हम पहचान सकते है।_
_✵ परमात्मा तो दिव्य सत्ता है, जिस मनुष्य के तन में जिस समय परमपिता परमात्मा परकाया प्रवेश करते है, उस समय उसमें उस मनुष्य के लक्षण दिखाई न देकर परमात्मा के गुण अथवा लक्षण दिखाई देते है।उनके मुख से जो वाक्य निकलते है, उनमें जो ज्ञान होता है, वह उस मनुष्य की जानकारी और सामर्थ से बाहर होता है। इसलिए उनके कुछ प्रभु प्रेमी स्वजन सोचने लगते हैं कि इसमें किसी का परकाया प्रवेश है। परमपिता परमात्मा उसके मुख द्वारा स्वयं ही धीरे धीरे अपना परिचय भी देते है और उस मनुष्य की जन्म जन्मांतर की भी विवेक संगत कहानी बताते है। जिस मनुष्य में वह प्रवेश करते है। परमात्मा के उन महावाक्यों को सुनकर वह मनुष्य जिसके तन में परमात्मा प्रविष्ट होते है, स्वयं अपने बारे में भी ज्ञान करता है और परमपिता परमात्मा के बारे में भी और उनके द्वारा दी जा रही आज्ञाओ के अनुसार अपने जीवन को भी ढालता जाता है। संसार में इस बात का कोई भी व्यक्ति स्वांग नहीँ रच सकता कि वह अपने भी जन्म जन्मांतर की कहानी बता सके और स्वयं में प्रविष्ट होने वाले का भी ऐसा विवेक संगत परिचय दे सके।_
_✵ परमात्मा जो ज्ञान देते है वह ज्ञान ही मनुष्य द्वारा दिए गए ज्ञान से, निराला होता है।अन्य कोई भी आत्मा सृष्टि की स्थापना, विनाश और पालना का अथवा 84 जन्मों की कहानी का सही ज्ञान नही दे सकते।वह यह नहीँ कर सकता कि निकट भविष्य में महान युग परिवर्तन होने वाला है।कोई भी मनुष्य यह भी नही कह सकता कि मैं दैवी-सम्प्रदाय की स्थापना के लिए अवतरित हुआ हूँ।_
_✵ भारत में जितने भी पुराने मंदिर है, सबमे शिवलिंग ही विराजमान है।बारह ज्योतिर्लिंगम प्रसिद्ध है, जहाँ शिव की ही प्रतिमा पायी जाती है।_
_✵ एक परमात्मा शिव ही है जो अवतरित होते है-गीता में भी लिखा है कि_
_*★ जब-जब धर्म की अति ग्लानि होगी, तब-तब मैं एक वृद्ध तन में अवतरित होऊंगा, मूढ़मति लोग मुझे पहचान नहीं पाते हैं, साधारण तन में समझ कुछ गालियां भी देते हैं, मेरा जन्म दिव्य व अलौकिक है, मुझे ऋषि मुनि गन्धर्व राक्षस कोई नहीं जानते, मैं मेरा परिचय स्वयं ही देता हूँ*।_
_आज वही धर्म ग्लानि का समय है इसलिए परमात्मा अपने वायदे अनुसार इस सृस्टि पर अवतरित हो चुके है।_
_✵ परमात्मा आकर हमें जन्म- जन्म की स्म्रति दिलाते है बच्चे तुम ही देवता थे, तुमने ही 84 जन्म लिये, अब रावण राज्य में आकर, विकारों के वश हो तुम पतित बने हो।अब फिर से ज्ञान योग से पावन बनकर मनुष्य से देवता बनने का पुरुषार्थ करो।_
_✵ कोई की भी याद से हम अपने जन्म- जन्म के विकर्मो को विनाश नही कर सकते, लेकिन एक परमात्मा की याद से ही हम स्वयं को पापों से मुक्त कर सकते है।_
_✵ पहले स्वयं को आत्मा महसूस करेंगे।आत्मिक स्थिति में रहेंगे, तब परमात्मा को अनुभव कर सकते है।स्वयं भगवान ने आकर स्वयं का परिचय दिया है और तीनो कालों का ज्ञान दिया है। वही जानीजाननहार है।_
_✵ बाबा कहते है *मीठे बच्चे* जो कोई दूसरा महान से महान मनुष्य भी नही बोल सकता। हमारी जीवन ही तो प्रूफ है जो इतने वर्षो से त्याग तपस्या से भरा है जिसे साधारण नही समझते दुनिया वाले। शिवबाबा ही हैं इसलिये बाबा कहते है तुम ही देवता थे ये शब्द कोई भी नही बोल सकता सिवाय शिवबाबा के। यह ज्ञान सार युक्त है, सभी बातों का सार है क्रम से। अनेको जीवन में हुए परिवर्तन से समझ सकते है।_
_✵ हम पहले पिछले जन्मों में क्या थे? अब क्या बन गए और क्यों बन गए और आगे क्या बनना है, ये सब भी कोई मनुष्य नहीं बता सकता, सिवाए एक परमात्मा के।तुम मेरी मत पर चलो तो तुमको 21 जन्मों के लिए सुखी बना दूंगा।यह बात भी गारंटी के साथ कोई भी मनुष्य नहीं कह सकता, कोई एक जन्म की भी गारंटी ना लें, 21जन्म तो बहुत दूर की बात है।खुद के जन्मों का ही नहीं पता तो औरो को क्या बताएंगे??_
_✵ हम जब अपने संस्कारो को परिवर्तन के लिए पुरुषार्थ करते है।हमारा चेहरा- चलन, खान-पान, उठना-बैठना बातें करने का तरीका, सोचने का तरीका, दृष्टिकोण धीरे-धीरे सब कुछ बदल जाता है और ये ही बदलाव धीरे-धीरे विश्व में परिवर्तन लाती है।जो परमात्मा से राजयोग द्वारा सम्बन्ध जोड़ने से ही सम्भव हुआ है।_
_✵ विज्ञान और अध्यात्म दोनों का मकसद पूर्ण सत्य तक पहुँचना है। फर्क मात्र इतना ही है कि_
_★विज्ञान पदार्थ से परमात्मा तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है तथा यह मान चुका है कि परमात्म तत्व( GOD Particle) से ही सम्पूर्ण सांसारिक पदार्थो का निर्माण हुआ हैं।विज्ञान मानने और मानकर जानने का विषय हैं। अध्यात्म प्रेम और ज्ञान - ध्यान के सहारे परमात्मा को पहचानने की सलाह देता हैं, आध्यात्म जानता है कि परमात्मा कण-कण में नही हैं। आध्यात्म जानने, समझने एवं जानकर मानने का विषय हैं।_
_✵ *श्रीमद्भागवत गीता द्वारा सिद्ध*_
_€अर्जुन- किन्तु मैं ईश्वर के दर्शन किये बिना समर्पण कैसे करूंगा?_
_¥श्रीकृष्ण - परमात्मा के दर्शन करने हेतु अपनी आँखो पर बंधी लालसा, अंहकार, क्रोध और पूर्वाग्रह की पट्टी को उतारना जरूरी होता है।_
_★ अंधेरे कक्ष में बैठा मनुष्य यदि कहे कि उसे सूर्य के दर्शन करने हैं, तो उससे क्या कहोंगे?? यही न कि कक्ष के बाहर आ जाए और आकाश के नीचे खड़ा हो जाए। सूर्य तो सदैव उपस्थित है।_
_✵ वैसे तो भगवान को प्रूफ़ करने की जरूरत नही।क्योंकि जब आप किसी डॉ के पास जाते हो तो कोई प्रूफ की जरूरत नही पड़ती क्योंकि जब तक आप उस डॉ से ट्रीटमेंट नही कराते तो तब तक विश्वास नही होगा कि वो अच्छा है या नही।वैसे ही आप जब तक भगवान से ट्रीटमेंट नही लेंगे।तब तक आपको कैसे विश्वास आएगा कि सच में भगवान आते है पढ़ाने।इसलिए पहले ट्रीटमेंट करवाये तब बताएं।_
_✵ परमात्मा का पहला ज्ञान ही हैै *स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन*।इसमें ही पूरा ज्ञान नूँधा हुआ है।यह कार्य किसी भी मनुष्य आत्मा द्वारा किया जाना सम्भव नही है।ब्रह्माकुमारीज़ के ज्ञान द्वारा हमने स्व-परिवर्तन को अनुभव किया है और यदि परमात्मा की शक्ति से एक-एक आत्मा परिवर्तित हो सकती है, तो विश्व परिवर्तन भी सम्भव हो रहा है।यह सबसे बड़ा प्रूफ है कि परमात्मा आ चुके हैं और अपना सृष्टि परिवर्तन का दिव्य कार्य कर रहे हैं।_
_✵ परमात्मा के ज्ञान और स्नेह पर हर मनुष्य आत्मा का अधिकार है अतः आपसे निवेदन है आप एक बार यह ज्ञान अवश्य समझें फिर आपका अनुभव आपको स्वयं बतायेगा कि भगवान इस धरा पर आ चुके हैं। जब परमात्मा हमारे पिता हैं तो वो एक दिन सम्मुख भी तो आते हैं, यह वही समय है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं।_
*🌹✵ ✵ ओम शांति ✵ ✵🌹*
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*कहते है दान तसुपात्रों को करना चाहिए* 🏵️
एक सहर में
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👳♂️ *सेठ जयचन्द जैन* रहते थे एक बार गाँव में अकाल पड़ा जब 2 महीनो बाद लोगो के पास खाने को अन्न नहीं रहा ।
तब
🤴 *राजा मानसिंह*
ने 📢 मुनादी करवाई की जो सेठ साहूकार सक्षम है वो अन्न, धन दान करे और राजकोष में धन- अन्न🥜💰 जमकरवाये।
*सेठ जय चंद*👳♂️
🥜💰🥜
*1000 क्विटल, गेहूं 500 किविंटल दाल, 1000 किलो घी, 2000 किलो तेल और 5000 स्वर्ण मुद्राएं दान दी।*
🙌 *5 माह बाद अकाल पूर्ण हुआ।*
और सेठ को पता चला की उनके पास *जैन मंदिर* जहाँ वो दर्शन के लिए जाते थे उसके 👴🏻 *पुजारी के 2 बेटे* 👶🏻👩🏻🦲भूख से मर गए।
उसके 🏤 कोठी के पास का लगदुमल जो सेठ के बचपन का दोस्त था उसने भुखमरी से दम तोड़ दिया🥴।⚰️
यह सुनकर उसे
⚔️ *राज तंत्र* ⚔️पर बहुत रौष ♨️😡♨️आया वह
🤴राजा के पास गया 🕌और राजा से कहा
💁🏻♂️ कि मैंने इतना दान दिया पर दान की चीज़े मेरे आस पास तक नहीं पहुँची।
🤴 *राजा बोले:-* "हे दानवीर आप के दान की मैं प्रशंसा करता हूँ किन्तु राज्य का विस्तार इतना बड़ा है कि जो हम तक और हम जिन तक पहुंच पाये हमने मदद कि कितुं
आपके आस पास के लोग भुखमरी से मरे उसका कारण शायद यह हो सकता है।
🧐 *आपके रिश्तेदार, नौकर-चाकर, मंदिर का माली, पुजारी और मित्र और संमाज के लोग आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे और शायद वो आपसे कहने में हिचकिचा रहे हो।?*
अतः आपको राजकोष दान तो देना चाहिए था किंतु अगर आप उसका 20% अपने आस पास के लोगों को करते तो आपको ज़्यादा संतुष्टि मिलती।
*मित्रो यही स्थिति हमारी है।*
हमें पहले घर
हमारे कर्मचारी
फिर पड़ोस
फिर मोहल्ला
फिर मंदिर के लोग
फिर हमारे रिश्तेदार
फिर शहर
फिर प्रदेश
फिर देश
फिर विश्व
*अपनी प्राथमिकता निर्धारित करे*
और 👳♂️ *सेठ जयचन्द* जैसी गलती करने से बचे।
प्राथमिकता आपको आपके दान की आत्मसंतुष्टि देगा और
*यही मानवता और देश के प्रति आपकी संजीवनी सच्ची ज़िम्मेदारी होगी।*🙏
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏