*कोरोना पर नियंत्रण करने शाम 6 बजे बन्द कराए जा रहे बाजार* *खुलने का समय घटने से दुकानों में एकमुश्त उमड़ने लगी हैं भीड़* - fastnewsharpal.com
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*कोरोना पर नियंत्रण करने शाम 6 बजे बन्द कराए जा रहे बाजार* *खुलने का समय घटने से दुकानों में एकमुश्त उमड़ने लगी हैं भीड़*

 *छत्तीसगढ़ की राजधानी सहित आसपास शाम 6 बजते ही शुरू हो जाती है पुलिसिया सायरन की आवाज*



*कोरोना पर नियंत्रण करने शाम 6 बजे बन्द कराए जा रहे बाजार*



*खुलने का समय घटने से दुकानों में एकमुश्त उमड़ने लगी हैं भीड़*

   सुरेन्द्र जैन/धरसीवां

कोरोना संक्रमण के फैलाब को रोकने जिला प्रशासन के आदेश से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित आसपास के इलाकों बिरगांब उरला धरसीवां खरोरा तिल्दा नेवरा आदि में शाम 6 बजते ही पुलिसिया सायरन की आवाज गूंजने लगती है और सायरन की आवाज सुनते ही दुकानदार फटाफट दुकाने बन्द करने लगते हैं वहीं दूसरी ओर दुकाने खुलने का समय घटने के बाद से अब दुकानों में रोजमर्रा की सामग्री खरीदने दुकानों में एकमुश्त भीड़ उमड़ने लगी है खासकर ओधोगिक क्षेत्रो से लगे गांवो में मजदूर वर्ग को सबसे बड़ी समस्या पैदा हो गई है ।



  कोरोना पोजिटिवो की अचानक से बढ़ती संख्या के बाद राज्य सरकार ने कलेक्टरों को अधिकार दिए थे इसके बाद जिन जिलों में हालात अधिक खराब हैं वहां कलेक्टरों ने रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाया है सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही दुकाने खोलने मास्क लगाकर ही घर से निकलने ओर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

   रायपुर कलेक्टर एस भारतीदासन के आदेश के बाद से ही धरसीवां तिल्दा नेवरा उरला बिरगांब खरोरा एवं उनसे लगे छोटे छोटे गांवों में भी शाम 6 बजे ही बाजार बन्द करा दिए जाते हैं  शाम 6 बजते ही गांव गांव में पुलिसिया सायरन की आवाज सुनाई देने लगती है और दुकानदार ग्राहकों को भगाकर जल्दी जल्दी दुकाने बन्द करने लगते हैं।

*खुलने का समय घटने से उमड़ने लगी भीड़*

   ग्रामीण अंचलों में खासकर ओधोगिक क्षेत्रो से लगे गांवो में दुकानें खुलने का समय घटने से अब दुकानों में भीड़ दिखाई देने लगी है रोज कमाने खाने वाले मजदूर वर्ग जो फेक्ट्रियो से शाम 5 बजे छूटते है एवं पुरुष वर्ग जो 12 घण्टे ड्यूटी कर रात्रि आठ बजे छूटते हैं उनके सामने दुकान खुलने का समय शाम 6 बजे तक होना बड़ी समस्या  बन गई है सुबह 5 बजे से उठकर घर का जल्दी जल्दी सभी काम निबटाकर अपने टिफिन लगाकर श्रमिक दंपति फेक्ट्रियो में काम करने घर से निकल जाते हैं सुबह उनके पास इतना समय नही होता कि वह दुकाने खुलने का इंतजार करें फिर सामान लाएं तब बना खाकर टिफिन लगाकर फेक्ट्रियो में मजदूरी करने जाएं ईंसलिये वह रोज शाम को ड्यूटी से आने के बाद ही हाथ पैर धोकर घर से रोजमर्रा का सामान खरीदने निकलते थे लेकिन अब समस्या यह हो गई है कि महिला श्रमिक 5 बजे छुट्टी होकर 6 बजे घर पहुचती है और मजदूर पति रात्रि 8 बजे के बाद पहुचते हैं तब तक गांवो में सभी दुकान बंद होने से समस्या यह बन गई है कि रोजमर्रा का राशन सामग्री खरीदें तो कब और केंसे यह एक बड़ी समस्या गरीब मजदूरो के सामने उतपन्न हो गई है।

    वही दूसरी ओर दुकान खुलने का समय घटते ही अब जो लोग सुबह 5 बजे से रात्रि  9 -10  बजे तक कभी भी सामान खरीद लेते थे अब उन्हें दिन में ही 6 से 6 बजे के बीच सामान खरीदने निकलना होता है इसलिए  गांवो में भी जिन दुकानों में भीड़ नही उमड़ती थी अब समय घटने से वहां दुकानों में भीड़ उमड़ने लगी है।

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