आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..18-04-2021*..🎋

 अच्छे इंसान को अपनी अच्छाई साबित करने की जरूरत नही पड़ती, बल्कि उनकी अच्छाई स्वतः ही सबको महसूस हो जाती है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻सूर्य पूरे दिन रोशनी देता है, मोमबत्ती चंद घंटे ही रोशनी देती है, माचिस चंद लम्हे ही रोशनी देती है पर दुआएं सारी ज़िंदगी रोशन कर देती है आज से हम जिनसे भी मिलें, उन्हें दुआएं ही दें।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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✨✨  Mind💥 power. ✨✨

सकारात्मक सोचिए मत बल्कि सकारात्मक बनिए

जब भी हम किसी सफल व्यक्ति के बारे में पढ़ते हैं या टीवी पर देखते हैं तो हमारे मन में भी कहीं ना कहीं ये बात आती है कि काश हमने भी कुछ ऐसा ही किया होता। हम सभी सफल होना चाहते हैं। जब भी हम किसी अनुभवी इंसान से सफलता के सीक्रेट के बारे में पूछते हैं तो एक शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है, वो है – -“Positive Thinking”-यानि सकारात्मक सोच ।हमें किताबों में, कहानियों में सभी जगह यही बताया जाता है कि Positive Thinking से आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप भी यही सोचते हैं कि केवल सकारात्मक सोच के जरिये आप सफल हो सकते हैं तो आप एक बड़ी ग़लतफ़हमी में हैं।
❗मैं कितना भी Positive हो जाऊँ लेकिन मैं किसी के हार्ट का ऑपरेशन नहीं कर सकता क्योंकि मैं ब्लॉगर हूँ भई, कोई डॉक्टर नहीं हूँ।
❗मैं कितना भी Positive हो जाऊँ लेकिन मैं आई.ए.एस. का एग्जाम पास नहीं कर सकता।
❗मैं कितना भी Positive हो जाऊँ लेकिन मैं बिल गेट्स से ज्यादा अमीर नहीं हो सकता।
❗मैं कितना भी Positive हो जाऊँ लेकिन मैं माउन्ट एवरेस्ट नहीं चढ़ सकता।
_Positive Thinking + Positive Effort + Positive Action_ = Success

सकारात्मक सोच + सकारात्मक प्रयास + सकारात्मक कार्य = सफलता

आप कितना भी पॉजिटिव सोच ले लेकिन बिना Positive Action और बिना Positive Effort के आप कुछ नहीं कर सकते।

 हममें से ना जाने कितने ही लोग ऐसे होंगे जो प्रेरक कहानियां या प्रेरक प्रसंग या किसी महापुरुष की बातें सुनते हैं तो सोचते हैं कि ये सब फालतू की बातें हैं जो केवल कहानियों में ही अच्छी लगती हैं।दरअसल ये लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों को देखकर सफल होने का प्रयास करते हैं लेकिन सफल नहीं हो पाते क्योंकि ये लोग सोचते हैं कि केवल Positive Thinking रखने से हम सफल हो जायेंगे। जबकि ऐसा सोचने वाले लोग हमेशा विफल ही होते आये हैं।आप जो भी लक्ष्य पाना चाहते हैं उसके प्रति हमेशा सकारात्मक सोचिये, लक्ष्य पाने के लिए सकारात्मक प्रयास कीजिये और लगातार प्रयास करने से आपके प्रयास सकारात्मक कार्य में परिवर्तित होंगे और यही आपकी सफलता की नींव होगी।अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो सिर्फ सकारात्मक सोचिये मत बल्कि सकारात्मक प्रयत्न करने भी शुरू कर दीजिये अगर आई.ए.एस. का एग्जाम निकालना है तो आपको सकारात्मक विश्वास के साथ अपनी पढ़ाई पर सकारात्मक प्रयत्न शुरू कर दीजिये।

 Become Friend to Yourself
(खुद के अच्छे मित्र बन जाए)

खुद को खुद से ज्यादा ना कोई जान सकता है और ना ही कोई समझ सकता है ।इसलिए खुद के अच्छे मित्र बन जाए, खुद से बातें करना सीखें, खुद को ही सवाल करे और खुद से ही जवाब मांगे और जब अंदर से जवाब मिलने शुरू हो जायेंगे तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको ना तो नकारात्मक कर पाएगी और नहीं परेशान ।

प्रिय आत्मन , हमारा काम यही तक था की आपके सामने सही और आसान बातें रखे, जो आपकी मुश्किलों को तोड़ कर आपको एक हौसला दे, उम्मीद दे और प्रेरणा दे अब आपकी बारी है की आप इसे अपने जीवन में कैसे अपनाते है और इसका किस तरह का फायदा प्राप्त करते है ।

प्रिय आत्मन,  आप यह जरूर खयाल रखे की कोई कितना भी बड़ा शानदार प्लान हो लेकिन जब तक उस परAction नहीं लेते वो बेकार है इसलिए हमने तो अपनी तरफ से एक शानदार लेख आपके सामने रख दिया है अब Action लेने की बारी आपकी है ।

 अपने भीतर देखो उसे सम्भालो सफलता निश्चित है!

हमारे जीवन में अंतर्यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे सारे कार्यो के लिए अंदर की सोच व भाव ही जिम्मेदार है। अण्डा अगर बाहर से फूटे तो जीवन समाप्त होता है। यदि अण्डा भीतर से फूटे जो जीवन प्रारम्भ होता है। अर्थात् जीवन में अन्तर्यात्रा जरूरी है। हमारे जीवन का सारा व्यवहार भीतर से तय होता है। हम अन्दर जो है वही बाहर प्रकट करते है। बाहर की सारी क्रान्ति भीतर के परिवर्तन के अभाव में व्यर्थ है। हमारा अन्तर्मन बहुत महत्वपूर्ण है। तभी तो बाहर के सारे परिवर्तन थोड़े समय बाद बेकार हो जाते है। तभी तो बदलने हेतु अन्दर से बदलना जरूरी है।
शान्त मन आपके बाह्य जीवन के उपद्रवों को भी मिटा देता है| अन्तर्यात्रा द्वारा ही स्वयं को जानना होता है। दूसरों को भूलने के लिए अन्दर से अकेले होना पड़ता है। स्वयं का एकान्त मिल जाने पर किसी और की जरूरत नहीं पड़ती। हमारे सारे जीवन की अव्यवस्था के अन्तर्मन की अराजकता जिम्मेदार है। जब हम अन्दर से टूटे हुए होते है तो बाहर कुछ भी अच्छा नहीं लगता।

जब हमें अपने पर भरोसा नहीं होता तो हम किसी और पर भरोसा नहीं कर सकते।इसीलिए किसी ने कहा है कि अपने भीतर देखो,उसे संभालों सब कुछ ठीक हो जाएगा।
                          
                   ओम शान्ति

💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*18 अप्रैल:-*_ में इस शरीर को चलानेवाली आत्मा हु जब ये सदा याद रहे तो आत्मा के पिता परमात्मा (God Father) भी अपने आप याद रहेंगे।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*तुम्हारी सारी उम्र बीत जाएगी तुम्हें खबर ही नहीं होगी कि कब अंतिम घड़ी आ गई,,जीवन साँसे जितनी बची हैं उनसे अपनी अंतरात्मा को मालिक का स्मरण  को रँग में रँग भरलो,शुध्द  मन की चादर मैली नहीं होगी,,जिससे तुम्हारे मन से जन्म-मृत्यु का भय निकल जाएगा भयमुक्त होंगे*
      *ॐ शांति* 👏
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

आप एक *आत्मा* हैं और शरीर संसार को महसूस करने का माध्यम। इंद्रियों का सुख सदा काल का नहीं रहता, सच्चे सुख का आधार है *सात्विक* सोच...। इसलिये *विचारों* को शुद्ध बनाइये और अतीन्द्रिय सुख पाइये।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

*चुनौतियां🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️ सबक हैं*
*जिंदगी का...*

*इनसे "मजबूर"🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️ नहीं*
*मजबूत"🧘🏻‍♀️👆🏻🧘🏻‍♂️💪🏻बनने का*
 *प्रयास करें...*
            
Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️ Morning 😊

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*👉🏼सद्गुरु की कृपा➖*🏵️

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एक बार एक चोर ने गुरु से नाम ले लिया, और बोला गुरु जी चोरी तो मेरा काम है ये तो नहीं छूटेगी मेरे से.. 

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अब गुरु जी बोले ठीक है मैं तुझे एक दूसरा काम देता हुँ, वो निभा लेना...

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बोले पराई इस्त्री को माता बहन समझना.. 

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चोर बोला ठीक है जी ये मैं निभा लूंगा।

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एक राजा के कोई संतान नहीं थी तो उसने अपनी रानी को दुहागण कर रखा था 

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10-12 साल से बगल मे ही एक घर दे रखा उसमे रहती और साथ ही सिपाहियों को निगरानी रखने के लिए बोल दिया।

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उसी चोर का उस रानी के घर मे चोरी के लिए जाना हुआ.. रानी ने देखा के चोर आया है।

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उधर सिपाहियों ने भी देख लिया के कोई आदमी गया है रानी के पास... 

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राजा को बताया राजा बोला मैं छुप-छुप के देखूंगा... अब राजा छुप छुप के देखने लगा।

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रानी बोली चोर को कि तुम किस पे आये हो.. 

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चोर बोला ऊंट पे.. 

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रानी बोली की तुम्हारे पास जितने भी ऊंट हैं मैं सबको सोने चांदी से भरवां दूंगी बस मेरी इच्छा पुरी कर दो।

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चोर को अपने गुरु का प्रण याद आ गया.. बोला नहीं जी.. आप तो मेरी माता हो.. 

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जो पुत्र के लायक वाली इच्छा हो तो बताओ और दूसरी इच्छा मेरे बस की नहीं है।

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राजा ने सोचा वाह चोर होके इतना ईमानदार... 

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राजा ने उसको पकड़ लिया और महल ले गया.. बोला मैं तेरी ईमानदारी से खुश हुँ तू वर मांग..

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चोर बोला जी आप दोगे पक्का वादा करो.. 

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राजा बोला हाँ मांग..

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चोर बोला मेरी मां को जिसको आपने दुहागण कर रखा है उसको फिर से सुहागन कर दो..

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राजा बड़ा खुश हुआ उसने रानी को बुलाया.. और बोला रानी मैंने तुझे भी बड़ा दुख दिया है तू भी मांग ले कुछ भी आज.. 

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रानी बोली के पक्का वादा करो दोगे और मोहर मार के लिख के दो के जो मांगूंगी वो दोगे।

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राजा ने लिख के मोहर मार दी।

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रानी बोली राजा हमारे कोई औलाद नहीं है इस चोर को ही अपना बेटा मान लो और राजा बना दो।

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अब सतसंगियों गुरु के एक वचन की पालना से राज दिला दिया।

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अगर हमारा विश्वास है तो दुनिया की कोई ताक़त नहीं जो हमें डिगा दे.. सतगुरु के वचनों अनुसार चलते रहे।        



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