🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..20-04-2021*..🎋
✍🏻घड़ी की सुईयो की तरह जीवन में अपने रिश्तों को बनाए रखें, कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई तेज है और कोई धीमा मायने रखता है जुडे रहना।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻हमारे साथ होनेवाली कोई भी घटना अपने आप नही हो रही है, इन घटनाओ का बिज भूतकाल में हमारे द्वारा ही बोया गया था।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
♻🍁♻🍁♻🍁♻🍁♻
🌈💧🌈💧🌈💧🌈💧
*अपनी ‘ज़िंदगी’ मे हर किसी को*
*‘अहमियत’ देनी चाहिए ...*
*क्योंकि*
*जो ‘अच्छे’ होंगे वो ‘साथ’ देंगे ...*
*और जो ‘बुरे’ होंगे वो ‘सबक’ देंगे ...*
*जिंदगी जीने के लिए ‘सबक’ और ‘साथ’ दोनों जरुरी होता है ...*
*🌴 सुप्रभात 🌴*
😄😄😄😄😄😄😄😄😄
अनमोल वचन :
खुशी बाहरी उपलब्धियों पर नहीं...आंतरिक भरपूरता पर निर्भर करती है और आंतरिक धन बढ़ता है भगवान के ज्ञान और ध्यान से...। इसलिए पल भर की खुशी नहीं,हर पल की खुशी के लिये भगवान के ज्ञान और ध्यान की दवाई हर रोज लीजिये...........
🙏ओम् शांति🙏
💐आपका दिन शुभ हो💐
😄😄😄😄😄😄😄😄😄
🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️
®🙏 *꧁!! ओम शांति !!꧂*🙏®
*यूँ तो अधिकांश लोग जिन्दगी से शिकायत किया करते हैं। मगर बहुत थोड़े ही लोग हुआ करते हैं जो शिकायतों में भी हँसकर जिया करते हैं। जिन्दगी से हमारी शिकायतों का कारण अभाव नहीं अपितु हमारा स्वभाव है।*
*हम सिर्फ खोने का दुःख मनाना जानते हैं पाने की ख़ुशी नही। ख़ुशी के लिए काम करोगे तो ख़ुशी ही मिले यह निश्चित नहीं मगर खुश होकर काम करोगे तो ख़ुशी अवश्य मिलेगी।*
*जिन्दगी से शिकायत करने की अपेक्षा जो प्राप्त है, उसका आनंद लेना सीखो। यही जीवन की वास्तविक उपलब्धि है।*
*तकदीर के लिखे पर कभी शिकवा न कर ,*
*तू अभी इतना समझदार नहीं कि*
*ईश्वर के इरादे समझ सके।*
*◆●ॐ शांति●◆*
🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️🧚🏼♂️
☀ आत्मा के मुख्य 3 अंग इस प्रकार हैं:
मन - बुद्धि - संस्कार
⚜ आत्मा एक सूक्ष्म पॉइंट ऑफ़ लाइट है। उस पर कोई भी भौतिक शक्ति प्रभाव नहीं डाल सकती जिस तरह शरीर की कर्मेन्द्रियाँ है, उसी तरह आत्मा की भी तीन सूक्ष्म इन्द्रियाँ हैं मन, बुद्धि और संस्कार।
जैसे परमाणु में सूक्ष्म Electron, Neutron और Proton होते उसी प्रकार आत्मा में सूक्ष्म मन, बुद्धि और संस्कार होते हैं।
💥 मन - mind:- सकारात्मक व नकारात्मक विचार, ज़रूरी व व्यर्थ विचार उत्पन्न करना।
💥 बुद्धि - intellect:- सकारात्मक (सही) व नकारात्मक (गलत) निर्णय लेना ।
💥 संस्कार- resolves:- सकारात्मक (सही) व नकारात्मक (गलत) कार्यों की पुनरावृत्ति करना।
☀ जिस प्रकार Electric Energy भौतिक ऊर्जा का स्रोत है उसी प्रकार Eternal Energy (आत्मा) Spiritual Energy का स्रोत है।
Electric Energy में तीन शक्तियां होती हैं।
1) Magnetic power
2) Vibration power
3) Radiation power
ठीक उसी प्रकार आत्मा में भी ये तीनों शक्तियां होती हैं।जिसके प्रति हम संकल्प करते उसको आकर्षित करते, संकल्प तरंगो द्वारा उस तक पहुंचते भी हैं, विकिरण शक्ति द्वारा संकल्पों को एकाग्र कर उस व्यक्ति के मनोदशा को बदल भी सकते, उसकी बीमारी को भी ठीक कर सकते हैं।
⚜ मन - यह आत्मा की विचार शक्ति है मन की शक्ति के द्वारा ही आत्मा सोचती है। मन की गति आवाज की गति से भी तीव्र है।
मन और हृदय में अन्तर है क्योंकि हृदय शरीर का भौतिक अंग है जो रक्त संचारण को बनाये रखता है परंतु मन तो आत्मा की शक्ति है।
⚜ बुद्धि - यह आत्मा की तर्क और परखने की शक्ति है इसका कार्य है समझना, निर्णय लेना, तर्क करना।
बुद्धि और मस्तिष्क में भी अन्तर है क्योंकि मस्तिष्क शरीर के नियंत्रण कक्ष के रूप में है लेकिन बुद्धि आत्मा की निर्णायक शक्ति है।
⚜ संस्कार:- यह आत्मा के किये हुए कर्मो का प्रभाव है जो आत्मा अपने साथ अगले जन्म में ले जाती है इसके आधार पर ही फिर मन में संकल्प उत्पन्न होते हैं।आत्मा प्रकाश और शक्ति से युक्त एक पॉइंट ऑफ़ लाइट है।भृकुटि में निवास करती है।
⚜ संस्कार के बारे में उदाहरण:-
दो Identical twins के संस्कार भी same नहीं हैं। उन्हें गर्भ में भी एक जैसा ही वातावरण मिलता है।उनका nutrition भी same placenta से होता है। घर में भी उन्हें एक जैसा ही पालना होती है।फिर भी उनके संस्कार अलग क्यों होते हैं ?
क्योंकि वो पिछले जन्म के अपने संस्कार साथ लेके आते हैं।
⚜ संस्कार मुख्यतः पांच प्रकार हैं।
१. अनादि संस्कार: आत्मा के सात ओरिजिनल संस्कार:- पवित्रता, प्रेम, शांति, सुख , आनंद, ज्ञान व शक्ति
२. आदि संस्कार :- दैवी गुण युक्त
३. पूर्व जन्म के संस्कार
४. खानदानी संस्कार (Genetically acquired )
५. संग व वातावरण द्वारा
दृढ़ता के संस्कार (Will power )
:- ओम् शान्ति !
शरीर में आत्मा का जितने दिन का पार्ट है वह बजा लेने के बाद आत्मा को वह शरीर छोड़ना ही पड़ेगा।….
शरीर में आत्मा का जितने दिन का पार्ट है वह बजा लेने के बाद आत्मा को वह शरीर छोड़ना ही पड़ेगा। और जब शरीर छूटेगा तो सम्बन्ध और पदार्थ भी छूटेंगे । इसलिये सम्बन्धो की गाँठ जितनी ढीली होगी , अंत समय उसे खोलना उतना ही आसान होगा।
यदि हमे कहीं कोई ऐसी गाँठ बांधनी हो जिसे थोड़े समय के बाद खोलना हो तो हम उसे ढीला बांधते हैं।यदि कस कर बाँध दी तो सहजता से नही खुलेगी,बहुत मेहनत लगानी पड़ेगी और हो सकता है कि गाँठ खुले ही नही।और जब गाँठ खुलेगी नही तो उसे काट कर ही अलग करना पड़ेगा ।
इसी प्रकार परिवारजनो के साथ,पदार्थों के साथ और सम्बंधियों के साथ मोह ममता की गाँठ ढीली ढीली बंधिये क्योकि उसे आज नही तो कल खोलना ही पड़ेगा।शरीर में आत्मा का जितने दिन का पार्ट है वह बजा लेने के बाद आत्मा को वह शरीर छोड़ना ही पड़ेगा।और जब शरीर छूटेगा तो सम्बन्ध और पदार्थ भी छूटेंगे ।
यदि इन सबके साथ मोह और आसक्ति की गाँठ कस कर बाँधी होगी तो जीते जी मर्ज झेलना पड़ेगा और अंत समय आत्मा अलग होने में कष्ट अनुभव करेगी ।
इसलिए सदैव स्मृति में रहे कि संसार रूपी नाटक में हमारा फर्ज है कि हम अपना अभिनय अनासक्ति के साथ करें।दूसरे के अभिनय की तरफ ध्यान ना दे कर अपने पार्ट को अच्छी तरह निभाएं।
यदि हम आपसी सम्बन्धो में न्यारे,हर्षित,शांत व सच्चे हो कर रहते हैं तो फर्ज है पर यदि अज्ञानतावश क्रोध , मोह, अहंकार और दुःख का लेन देन करते हैं तो यही सम्बन्ध मर्ज बन जाते हैं ।
🌾🌾om shanti🌿🌿🙏
*🌹 ॐ शान्ति 🌹*
*🙏Thanks God & All🙏*
____________________________✍
*जो भीतर का आंनद अनुभव कर लेते हैं, उन्हें बाहर भटकने की लालसा नहीं सताती है। अन्तर मुखी, सदा सुखी..*
*Those who experience the bliss within, do not feel the temptation to wander outside. Introverts are always happy..* (4DQuotes)
______________________________
*Health, Wealth, Happiness & Success is Our Godly Birthright*
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*20 अप्रैल:-*_ गुस्सा और अहंकार जीवन में क्रेडिट कार्ड की तरह है, अभी उपयोग कीजिये बाद में भुगतान।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰💥🇲🇰
♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*कोरोना -गुणात्मक वृद्धि 🏵️
FX
🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
एक बार मुगल बादशाह अकबर और उनका अति प्रिय बुद्धिमान मंत्री बीरबल दोनों शतरंज खेलने बैठे । दोनों के बीच यह शर्त लगी कि उनमें से जो भी व्यक्ति शतरंज की यह बाजी हारेगा, उसे जीतने वाले की इच्छा के अनुसार जुर्माना चुकाना होगा । इसी क्रम में पहले बीरबल बोला जहांपनाह यदि आप जीत गए और मैं हार गया तो हुकुम फरमाएं कि मैं आपको क्या जुर्माना चुकाऊंगा ? बादशाह ने जवाब दिया बीरबल यदि यह बाजी मैं जीता और तुम हारे तो तुम्हें, जुर्माना स्वरूप मुझे सौ स्वर्ण मुद्राएं सौंपनी होगी । इस पर बीरबल ने हां में गर्दन हिलाई । अब बारी बीरबल की थी, वह बोला जहांपनाह यदि इस बाजी में आप हारे और मैं जीता तो आप मुझे जुर्माने के रूप में शतरंज के 64 खानों में गेहूं के दाने रखकर चुकाएंगे लेकिन इसमें मेरी एक छोटी सी शर्त यह रहेगी कि आपको शतरंज के पहले खाने में गेहूं का एक दाना रखना होगा, दूसरे खाने में पहले के दुगने दो दाने, तीसरे खाने में दो के दुगने चार दाने, चौथे खाने में चार के दुगने आठ दाने, पांचवें खाने में आठ के दुगने सोलह दाने । ऐसे करते हुए शतरंज के सभी चौसठ खानों में गेहूं के दाने रख कर वे सारे गेहूं के दाने जुर्माना स्वरूप मुझे सौंप दें । बस यही मेरी शर्त है । बीरबल की इस छोटी सी मांग को सुनकर बादशाह अकबर ने जोरदार ठहाका लगाया और बोला बीरबल मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है । इसके बाद शतरंज का खेल शुरू हुआ । अब संयोग देखिए कि शतरंज की उस बाजी में बीरबल जीत गया और बादशाह अकबर को हार का मुंह देखना पड़ा । अब बारी आई हारने वाले को जीतने वाले का जुर्माना चुकाने की । हारने वाले अकबर बादशाह ने बड़े ही अहंकार के साथ अपने खजांची को हुकुम दिया कि वह बीरबल को शर्त के अनुसार शतरंज के चौसठ खानों में गेहूं के दाने रख कर कुल दाने चुका दें । बीरबल की इस शर्त को पूरी करने के दौरान अकबर बादशाह का खजांची थोड़ी ही देर में पसीने-पसीने हो गया । फिर वह अकबर बादशाह के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला जहांपनाह हम हुकूमत का सारा खजाना खाली कर लें तो भी बीरबल की इस शर्त को पूरी नहीं कर पाएंगे । अकबर याने सुल्तान-ए-हिन्द को खजांची की बात पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन जब खुद उसने 64 खानों की जोड़ लगाई तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया ।
आप भी शायद मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं । चलिए मैं आपको समझाता हूं । बीरबल की शर्त के अनुसार जहां शतरंज के पहले खाने में गेहूं का केवल एक दाना, दूसरे खाने में दो दाने, तीसरे खाने में चार दाने ऐसे रखे गये थे वहीं शतरंज के सबसे आखिरी अकेले चौसठवें खाने में गेहूं के 9223372036854775808 दाने रखने पड़ रहे थे और एक से लगा कर चौसठ तक के सभी खानों में रखे जाने वाले गेहूं के कुल दानों की संख्या हो रही थी 18446744073709551615. जिनका कुल वजन होता है 1,19,90,00,00,000 मैट्रिक टन जो कि वर्ष 2019 के सम्पूर्ण विश्व के गेहूं के उत्पादन से 1645 गुणा अधिक है ।
साथियों, वृद्धि दो तरह की होती है । पहली संख्यात्मक वृद्धि और दूसरी होती है गुणात्मक वृद्धि !! यदि शतरंज के चौसठ खानों में क्रमशः 1, 2, 3…..62, 63, 64 कर के प्रत्येक खाने में उसकी संख्या के अनुसार गेहूं के दाने रखे जाते तो सभी 64 खानों में रखे गेहूं के कुल दानों का योग होता मात्र 2080 दाने और यह कहलाती है संख्यात्मक वृद्धि जबकि बीरबल के द्वारा बताई गई गणना कहलाती है गुणात्मक वृद्धि । जहां संख्यात्मक वृद्धि में 64 खानों का योग मात्र 2080 दाने होते हैं वहीं गुणात्मक वृद्धि में तो मात्र 11 खानों का योग ही 2047 दाने हो जाता है ।
साथियों, ना मैं गणित की टीचर हूं ना ही विज्ञान की लेकिन कोरोनावायरस की तेज वृद्धि और उसके विश्वव्यापी दुष्प्रभाव का आंकलन करने पर यह पोस्ट बनाने का विचार आया । कोरोना वायरस की वृद्धि को आप संख्यात्मक वृद्धि समझने की भूल कभी मत करना । हकीकत में कोरोना वायरस की वृद्धि एक गुणात्मक वृद्धि है इसलिए *आप सभी से हाथ जोड़कर विनंती है कि कोरोनावायरस को हल्के में ना लें । इस सम्बन्ध में हम जरा गम्भीर हो जाएं और कम से कम 15 दिन तक अपने परिवार के साथ अपने घरों में ही बने रहें । इससे ना केवल आप खुद सुरक्षित रहेंगे अपितु इस महामारी को फैलने से रोकने की आप एक अहम कड़ी भी बनेंगे क्योंकि इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए एक कड़ी को तोड़ना ज्यादा फायदेमंद है, ज्यादा जरूरी है । यही इसे रोकने का एकमात्र उपाय है*
*सदैव प्रसन्न रहिये*
*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*
🌺♦🌺🔹🌺♦🌺