आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..23-04-2021*..🎋


✍🏻अच्छा दिल और अच्छा स्वभाव दोनो आवश्यक है। अच्छे दिल से कई रिस्ते बनेगे और अच्छे स्वभाव से वो जीवन भर टिकेगे।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷


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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻खुद से बहस करोगे तो, सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे, अगर दुसरो से करोगे तो और नये सवाल खड़े हो जायेंगे, जब मनुष्य अपनी ग़लती का वक़ील और दूसरों की गलतियों का जज बन जाता है, तो फैसले नही फासले हो जाते है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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आत्मा और शरीर के 50+ सम्बन्ध | 50+ Differences between Body and Soul

आत्म अभिमानी (soul conscious) बनने के लिए आत्मा और शरीर का सम्बन्ध (वा अन्तर) अच्छे से समझना बहुत आवश्यक है… तो आज 52 पॉइन्ट्‍स आत्मा और शरीर के अन्तर पर देखते हैं!

आत्मा और शरीर का मुख्य अन्तर

मैं आत्मा हूँ, यह मेरा शरीर है
मैं रूहानी हूँ, शरीर जिस्मानी है
मैं एक हूँ, शरीर अनेक लिए हैं
मैं ऊपर से आई हूँ, शरीर यहाँ बना है
मैं सूक्ष्म हूँ, शरीर स्थूल है
मैं चैतन्य हूँ, शरीर जड़ है
मैं निराकार हूँ, शरीर साकार है
मैं बिन्दी हूँ, शरीर बड़ा है
मैं हल्की हूँ, शरीर का वज़न है
मैं ऊर्जा हूँ, शरीर 5 तत्वों से बना है
मैं शक्ति (पुरुष) हूँ, शरीर प्रकृति है
मैं अजर हूँ, शरीर बूढ़ा होता है
मैं अमर हूँ, शरीर की मृत्यु होती है
मैं अविनाशी हूँ, शरीर विनाशी है
मैं शाश्वत (permanent) हूँ, शरीर temporary है
शरीर है निवास स्थान

मैं मकान मालिक हूँ… शरीर मकान है
मैं मूर्ति हूँ… शरीर मन्दिर है
मैं लाइट हूँ, शरीर house है (अर्थात साथ में light house)
मैं मेहमान हूँ, शरीर temporary address है
मैं actor हूँ, शरीर costume (चोला) है
मैं showpiece हूँ, शरीर showcase है
मैं हीरा हूँ, शरीर डिब्बी है
मैं अमूल्य हूँ, शरीर का फिर भी मूल्य है
मैं फूल हूँ, शरीर गमला है
मैं गुणवान हूँ, शरीर जैसे कि निर्गुण है
मैं ज्योति हूँ, शरीर मिट्टी का दीपक है
मैं पंछी हूँ, शरीर घोसला है
शरीर है वाहन और instrument (यंत्र)

मैं driver हूँ, शरीर car है
मैं सारथी (वा रथी) हूँ, शरीर रथ है
मैं करावनहार हूँ, शरीर करनहार है
मैं राजा हूँ, कर्मेन्द्रीयां मन्त्री है
मैं सेठ हूँ, कर्मेन्द्रीयां कर्मचारी है
मैं मालिक हूँ, कर्मेन्द्रीयां नौकर-चाकर है
मैं user हूँ, शरीर साधन (मोबाइल आदि) है
मैं programmer हूँ, शरीर computer है
मैं operator हूँ, शरीर robot है
मैं बिजली हूँ, शरीर यंत्र है
मैं दृशता हूँ, आँखें खिड़की है
मैं speaker हूँ, मुख mic हैं
मैं सुनने वाला हूँ, कान sound-receiver हैं
और पॉइंट्स

मैं आत्मा rocket हूँ
मैं स्टार (सितारा) हूँ
मैं तिलक-स्वरूप हूँ
शरीर से ममत्व मिटाने लिए

शरीर पुरानी जुत्ती है
शरीर मिट्टी है
शरीर सर्प है, मैं उसके सिर पर मणि हूँ
शरीर दूम्ब है
शरीर मुर्दा है
शरीर पुराना, विकारी, तमोप्रधान, जड़जड़िभूत है
इस लिस्ट से प्राप्ति

इन सभी पॉइन्ट्‍स को एक के बाद एक दोहराने से… बहुत अच्छी आत्म-अभिमानी स्थिति बनती है!
सारा दिन नैचुरल देही-अभिमानी स्थिति रहतीं हैं
सेकंड में अशरीरी बन सकते हैं
देह-भान से बचे रहते हैं
पुरुषार्थ मैं नवीनता मिलती है
सार

तो चलिए आज सारा दिन… इन सभी points को स्मृति में रख नैचुरल आत्म-अभिमानी स्थिति (अर्थात शान्ति, प्रेम और आनन्द के निरन्तर अनुभव!) में स्थित रहे… जिससे हमारा बाबा से कनेक्शन भी मजबूत रहेगा, और हम सबके साथ इन गुणों का अनुभव बांटते रहेंगे… जिससे सहज ही यह संसार स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति!
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*23 अप्रैल:-*_ जैसे सूर्य का प्रकाश गुफा का अँधेरा दूर करदेता है, उसी तरह परमात्मा ज्ञान से ह्रदय का दुःख रूपी अंधकार मिट जाता है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन :

हम जितने भी धर्म-ग्रंथ पढ़ लें...यात्राएँ व यज्ञ कर लें... पर यदि मन साफ नहीं तो भगवान हमसे कोसों दूर हैं। कुछ भी धार्मिक क्रिया-कर्म न भी करें...पर मन से भी किसी को दुःख न देंवें, तब भगवान की गोद हमारे लिये हो सकती है। जब तक मन में खोट वा पाप हैं,तब तक सारे मंत्र और जाप बेकार हैं......

🙏ओम् शांति🙏

💐आपका दिन शुभ हो💐

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®​​​​​​🙏 *꧁!! ओम शांति !!꧂*🙏​​​​​​®                                                          
*माना कि वक्त बहुत कठिन है, दौर बहुत मुश्किल है, पर हिम्मत और सावधानी से लड़ा जा सकता है। सच है की जिंदगी थोड़ी थम सी गई है, पर हम चाह कर भी इस धीमी गति से नहीं चल सकते। घर में रहकर हम लंबे समय तक नहीं रह सकते इसलिए बहुत जरूरत होने पर ही सावधानी बरतते हुए हमें घर से बाहर निकलना है, अपनी जिंदगी को फिर से गति देनी है। डरे नहीं, बस सावधान रहें। याद रखें बहादुरी और मूर्खता में बहुत मामूली सा फर्क होता है, लेकिन वही फर्क एक इंसान को जिता देता है और दूसरे को हरा देता है।* 
                                                                                                       
*◆●ओम शांति●◆*
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.     *🦚ओम शांति🦚*
         *जीवन एक सुलझा हुआ सरल मार्ग है।*
*इसे अखण्ड प्रसन्नता के साथ पूरा किया जा सकता है,*
*किंतु यह तभी संभव होगा, जब मनुष्य अपनी स्थिति में पूर्ण सन्तुष्ट रहे,*
*अपनी शक्ति - सीमा के अनुरूप इच्छाएं करे,*
*उन्हें पाने के लिए सम्पूर्ण शक्ति का उपयोग करे और आकस्मिक असफलताओं को अंगीकार करने के लिये साहसपूर्वक तैयार रहे।*

 *जीवन मे एक नदी की तरह बनना होगा*
*कुछ लोग इसमें नहाते हैं।*
*कुछ पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं,*
*इसमें कुछ छप और खेलते हैं।*
*जबकि कुछ थूकते भी हैं।*

*चाहे जो कुछ भी हो, नदी सब कुछ स्वीकार कर लेती है और अप्रभावित सभी को गले लगाती है।*

*बस ऐसे ही, हमे इतने प्रसन्न रहना है कि दूसरे के चेहरे पर भी स्मित आये।*
*और इतना मजबूत बनो कि दूसरे अपनी करतूतो से हमारे चेहरे का स्मित छीन न सके।*
.                *ॐ शांति*
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              *🔰◆ OM SHANTI ◆🔰*

_*बहुत से लोगों को भगवान और उसका ज्ञान समझ नहीं आता क्यों?*_

_❆ समझने का कार्य बुद्धि का है जिसका पवित्र होना अनिवार्य है यदि बुद्धि में केवल संसार के ही चित्र व चारित्र चित्रित होते रहते हैं यह ज्ञान समझ नहीं आएगा। इसलिए पहले बुद्धि को दिव्य बनाना ज़रूरी है भक्ति से बुद्धि दिव्य बनती है क्योंकि भक्ति से बुद्धि में दिव्य चित्र व चारित्र घूमते रहते हैं पर जो लोग भक्ति नहीं करते उनकी बुद्धि सदा संसार की बातों में ही घूमती रहती है ऐसी आत्मायों को यह ज्ञान समझ कतई नहीं आएगा!_

_❆ Actually बुद्धि से हम जिस चीज़ को देखते हैं वह बुद्धि पर अंकित होती जाती है क्योंकि बुद्धि ही subconscious  mind है इसमें ही memory है इसलिए यदि इस पर संसारिक चीज़ों की छाप अधिक है तो भगवान के ज्ञान की छाप पड़ने में समय अधिक लगेगा ! इसलिए 83 साल से परमात्मा पढ़ा रहा है पर फ़िर भी संसार में से कुछ ही आत्माएँ ईश्वर का बनी क्योंकि पवित्र बनना कोई मासी का घर नहीं!_

_❆ भगवान से जुड़ने के लिए बुद्धि को दिव्य बनाना पड़ता है बुद्धि को दिव्य बनाने के लिए उसे संसारिक चित्रों, चरित्रों से हटा कर अध्यात्मिक चित्रों, चरित्रों पर focus करना पड़ता है ताकि बुद्धि reprogramme हो सके!_

_❆ बुद्धि ही हमारा nature decide करती है, क्योंकि बुद्धि में ही memory है, बुद्धि  पर जो चीज़ अंकित हो जाती है वह संस्कार बन जाती है बुद्धि को reprogramme करने के लिए information जो आप अपने आपको daily देते हैं उसके स्रोत को बदलना होगा इसिलिए कहा जाता है ज्ञान का मनन चिंतन बार बार करो ताकि वही विचार बुद्धि पर अंकित हो जाएं और वह आपका व्यव्हार बन जाएं और पुण्य कमाई कर्म में आ सके, तभी फ़िर ईश्वर से योग लगा सकेंगे और उससे सच्ची भरपूर कमाई कर सकेंगे नहीं तो यह सम्भव नहीं क्योंकि जब तक बुद्धि साफ़ नहीं तो उसमें भगवान का ज्ञान ठहर ही नहीं सकता।_

_❆ तभी तो बाबा कहते हैं शेरनी का दूध सोने के बर्तन में ही ठहर सकता है परमात्मा का परम पवित्र ज्ञान हो और बुद्धि अपवित्र हो नहीं सकता  इससे न तो ज्ञान समझ आएगा और न ही भगवान इसलिए पहले अपनी बुद्धि को साफ़ बनाना है इसके लिए भगवान जो जो अभ्यास बताते हैं उनको करते जाना है।_

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                 *♻️★ ओम शान्ति ★♻️*

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          *🪦★ OM SHANTI ★🪦*

_◆सहानुभूति अर्थात् सहयोग देना, सेवा करना, सौहार्द से व्यवहार करना ।_

_◆ सहानुभूति का यह अर्थ नहीं है कि हम दूसरे को दुखी देखकर स्वयं भी दुखी हों । यदि हम स्वयं भी दुखी होंगे तो हमारी अपनी योग्यताओं का क्षय होगा और हम संतुलित मन से तथा पूरी शक्ति से दूसरे की सेवा सुश्रुषा या मदद नहीं कर पाएंगे बल्कि हम स्वयं भी शांति एवं दया के पात्र बन जाएंगे ।_

_◆ सहानुभूति का अर्थ यह भी नहीं है कि हम किसी व्यक्ति द्वारा दुखाभिव्यक्ति को देखकर उसके गलत तकाजे या आग्रह को मान लें । यदि बच्चा मां से विश का आग्रह करें और उसके लिए दीवार से अपना सिर मारने लगे या फर्श पर हाथ पीटने लगे तो सहानुभूति का यह अर्थ नहीं है कि मां उसके हुएाथ में विष का प्याला थमा दे । यदि बच्चा शराब के लिए मां से पैसे मांगे तो सहानुभूति या सहयोग का यह अर्थ नहीं है कि मां उसे पैसे दे दे । यह सहयोग पाप ही नहीं बल्कि अपराध भी है ।_

_◆ परमात्मा का साथ (सह) अनुभव करते हुए किसी के कल्याण के लिए कोई कार्य करना ही सहानुभूति है । स्वयं आनंद का अनुभव करते हुए दूसरों को भी अपने साथ मिलाकर उन्हें ईश्वर या आनंद का अनुभव कराना ही सह अनुभूति है । नहीं तो स्वयं भी दुख का अनुभव करना तथा औरों को भी दुख का अहसास कराना तो संसार में दुख की वृद्धि करना तथा इसे शोकसागर बनाना है ।_

_◆अत: हम हर नर नारी की ऐसी सेवा करें कि वह सदा के लिए सभी प्रकार के दुखों व अशांति के सभी रूपांतरण से छूट जाए ।  यह तभी हो सकता है कि जब हम उसे शांति में स्थित होने,  समस्याओं का सामना करने, प्रभु से नाता जोड़ कर उनसे सहयोग एवं सामर्थ्य लेने तथा बुरी आदतों को छोड़कर अच्छे कर्म करने का मार्ग दिखा दे और उस पर चलने की विधि भी बता दें तथा उसके लिए उत्साह भी भर दे । किसी को अपने पांव पर खड़ा करना ही सबसे बड़ी सेवा है ।_

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             *💫★ ओम शान्ति ★💫*

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🙏 *ॐ शांति* 🙏


ईश्वर को किसी *इच्छापूर्ति* के लिये मत पुकारो। उस से प्यार है इसलिये उसे याद करो, क्योंकि वो किसी विशेष पर *कृपा* नहीं करता बल्कि अपना ज्ञान व ध्यान सिखा कर हम सब पर एक *समान* कृपा करता है। ताकि हम अपनी *बिगड़ी* स्वयं बना सकें।


🌸 सुप्रभात...


💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

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