आज का चिंतन(सुविचार)
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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..26-04-2021*..🎋
✍🏻अगर आप अपने जीवन को आनंदमय बनाना चाहते हैं, तो साधनों को छोड़ साधना और संबंधों को महत्व देना सीखें।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻गुणवान व्यक्तियों के संपर्क में रहकर सामान्य व्यक्ति भी गौरव प्राप्त करता है, जैसे कि फूलों की माला में रहकर धागा भी ईश्वर के मस्तक पर स्थान प्राप्त करता है।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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अनमोल वचन :
आप वही लिखें,जिस के नीचे आप अपने हस्ताक्षर कर सकें ।आप सोचें वही,जो आप बेहिचक बोल सकें।बोलें वही, जिस का आप जवाब सुन सकें।अगर आप खुश़ नहीं हैं पैसा,उपलब्धि,मान,सम्मान, कुछ भी मायने नहीं रखता । जिंदगी की सबसे पहली जरूरत है ख़ुश रहना। इस लिए हमेशा खुश रहें, मुस्कराते रहें.....
🙏ओम् शान्ति 🙏
🌷आपका दिन शुभ हो 🌷
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*🪦★ OM SHANTI ★🪦*
_◆सहानुभूति अर्थात् सहयोग देना, सेवा करना, सौहार्द से व्यवहार करना ।_
_◆ सहानुभूति का यह अर्थ नहीं है कि हम दूसरे को दुखी देखकर स्वयं भी दुखी हों । यदि हम स्वयं भी दुखी होंगे तो हमारी अपनी योग्यताओं का क्षय होगा और हम संतुलित मन से तथा पूरी शक्ति से दूसरे की सेवा सुश्रुषा या मदद नहीं कर पाएंगे बल्कि हम स्वयं भी शांति एवं दया के पात्र बन जाएंगे ।_
_◆ सहानुभूति का अर्थ यह भी नहीं है कि हम किसी व्यक्ति द्वारा दुखाभिव्यक्ति को देखकर उसके गलत तकाजे या आग्रह को मान लें । यदि बच्चा मां से विश का आग्रह करें और उसके लिए दीवार से अपना सिर मारने लगे या फर्श पर हाथ पीटने लगे तो सहानुभूति का यह अर्थ नहीं है कि मां उसके हुएाथ में विष का प्याला थमा दे । यदि बच्चा शराब के लिए मां से पैसे मांगे तो सहानुभूति या सहयोग का यह अर्थ नहीं है कि मां उसे पैसे दे दे । यह सहयोग पाप ही नहीं बल्कि अपराध भी है ।_
_◆ परमात्मा का साथ (सह) अनुभव करते हुए किसी के कल्याण के लिए कोई कार्य करना ही सहानुभूति है । स्वयं आनंद का अनुभव करते हुए दूसरों को भी अपने साथ मिलाकर उन्हें ईश्वर या आनंद का अनुभव कराना ही सह अनुभूति है । नहीं तो स्वयं भी दुख का अनुभव करना तथा औरों को भी दुख का अहसास कराना तो संसार में दुख की वृद्धि करना तथा इसे शोकसागर बनाना है ।_
_◆अत: हम हर नर नारी की ऐसी सेवा करें कि वह सदा के लिए सभी प्रकार के दुखों व अशांति के सभी रूपांतरण से छूट जाए । यह तभी हो सकता है कि जब हम उसे शांति में स्थित होने, समस्याओं का सामना करने, प्रभु से नाता जोड़ कर उनसे सहयोग एवं सामर्थ्य लेने तथा बुरी आदतों को छोड़कर अच्छे कर्म करने का मार्ग दिखा दे और उस पर चलने की विधि भी बता दें तथा उसके लिए उत्साह भी भर दे । किसी को अपने पांव पर खड़ा करना ही सबसे बड़ी सेवा है ।_
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*💫★ ओम शान्ति ★💫*
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