आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..20-05-2021*..🎋


✍🏻जिस मनुष्य के हृदय में सच्ची मानवता हो, उसकी सोच हमेशा यही होगी, कि मुझे मिला हुआ दुःख किसी को नही मिले, और मुझे मिला हुआ सुख सबको मिले।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻किसी इंसान के कुछ समय के बुरे व्यवहार की वजह से उसको हमेशा के लिए बुरा ना समझे, कभी कभी हालात बुरे होते है, इंसान नही।
🌹 *σм ѕнαитι.*
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*20 मई:-*_ जो सदा खुश रहते है वह स्वयम को और सर्व को भी प्रिय लगते है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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 *वक़्त का काम*

                      *तो गुजरना है...*

            *बुरा है तो "सब्र" करो*

          *अच्छा हो तो "शुक्र" करो*
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अनमोल वचन :

मै इस शरीर को चलाने वाली आत्मा हूंँ और मुझ आत्मा का पिता शिव परमात्मा है। शिव को ही सत्यम,शिवम, सुंदरम कहते है। इस सच्चाई को दिल से मान लेने से सच्चाई की ताकत बढ़ेगी और सदा परमात्मा की मदद का अनुभव होता रहेगा ।

🙏ओम शान्ति🙏

🌹आपका दिन शुभ हो 🌹
 
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*कभी भी लोगों की*

*टीका टिप्पणी से*

*घबराना नही चाहिए*

*क्योंकि खेल में* *दर्शक ही शोर मचाते हैं* 

*खिलाडी नहीं !..*
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          *अपना ग़म सोच समझ कर*


                      *बांटना चाहिए*


      *दुनिया में हमदर्द कम,*


              *सिरदर्द ज्यादा मिलते हैं!*

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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी♦️♦️♦️


 *👉 क्रोध-रूपी पिशाच 🏵️                    🔅🔅🔅🔅🔅 🔅🔅🔅🔅🔅

एक बार श्री कृष्ण बलदेव 

एवं सात्यकि रात्रि के समय 

रास्ता भटक गये !

.

सघन वन था ;न आगे राह 

सूझती थी न पीछे लौट 

सकते थे ! 

.

निर्णय हुआ कि घोड़ो को 

बांध कर यही रात्रि में 

विश्राम किया जाय ! 

.

तय हुआ कि तीनो बारी-

बारी जाग कर पहरा देंगे ! 

.

सबसे पहले सात्यकि जागे

बाकी दोनो सो गये ! 

.

एक पिशाच पेड़ से उतरा 

और सात्यकि को मल्ल-

युद्ध के लिए ललकारने 

लगा !

.

पिशाच की ललकार सुन 

कर सात्यकि अत्यंत क्रोधित 

हो गये ! 

.

दोनो में मल्लयुद्ध होने लगा ! 

.

जैसे -जैसे पिशाच क्रोध

करता सात्यकि दुगने क्रोध 

से लड़ने लगते !

.

सात्यकि जितना अधिक 

क्रोध करते उतना ही पिशाच 

का आकार बढ़ता जाता !

.

मल्ल-युद्ध में सात्यकि को 

बहुत चोटें आईं !

.

एक प्रहर बीत गया अब 

बलदेव जागे !

.

सात्यकि ने उन्हें कुछ न 

बताया और सो गये !

.

बलदेव को भी पिशाच की 

ललकार सुनाई दी !

.

बलदेव क्रोध-पूर्वक पिशाच 

से भिड़ गये !

.

लड़ते हुए एक प्रहर बीत

गया उनका भी सात्यकि 

जैसा हाल हुआ !

.

अब श्री कृष्ण के जागने 

की बारी थी !

.

बलदेव ने भी उन्हें कुछ न 

बताया एवं सो गये !

.

श्री कृष्ण के सामने भी 

पिशाच की चुनौती आई !

.

पिशाच जितने अधिक क्रोध 

में श्री कृष्ण को संबोधित 

करता श्री कृष्ण उतने ही 

शांत- भाव से मुस्करा देते ;

पिशाच का आकार

घटता जाता !

.

अंत में वह एक कीड़े जितना 

रह गया जिसे श्री कृष्ण ने 

अपने पटुके के छोर में

बांध लिया !

.

प्रात:काल सात्यकि व बलदेव 

ने अपनी दुर्गति की कहानी 

श्री कृष्ण को सुनाई तो श्री 

कृष्ण ने मुस्करा कर उस

कीड़े को दिखाते हुए कहा -

यही है वह क्रोध- रूपी 

पिशाच जितना तुम क्रोध 

करते थे इसका आकार 

उतना ही बढ़ता जाता था !

.

पर जब मैंने इसके क्रोध का 

प्रतिकार क्रोध से न देकर तो 

शांत-भाव से दिया तो यह

हतोत्साहित हो कर दुर्बल 

और छोटा हो गया !

.

*अतः क्रोध पर विजय पाने* 

*के लिये संयम से काम ले !*

 


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