ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा
ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा
जीवन के विभिन्न विषयों पर आधारित सब की समस्याओं का समाधान करते हुए, ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा उनके विभिन्न वाट्सएप ग्रुपों में प्रातः 10:00 बजे प्रतिदिन किया जाता है, समस्याएं हर क्षेत्र से संबंधित होती है, इनका समाधान सभी के ज्ञान में वृद्धि कर रहा है
श्रीमती केवरा साहू जी शक्तिघाट ने जिज्ञासा रखी की
आधुनिक काल के बच्चों को कैसा संस्कार दे,की जीवन में अच्छे कार्य करें? माता पिता की सेंवा, अच्छा आचरण करें? कृपया मार्गदर्शन करें बाबाजी, उनकी जिज्ञासा का समाधान करते हुए बाबा जी ने बताया कि जीवन में अच्छे कार्य करने का दायित्व हम हमारे बच्चों को देते हैं, परंतु उसके लिए उसे स्वयं को आचरण में लाना होता है और यही बच्चे देखते हैं और उसको देख कर सीखते है ऐसा नहीं कि कहकर या बोलकर या पढ़ा कर आपने सिखा सकते है उसे स्वयं के आचरण द्वारा ही आप अपने घर परिवार वातावरण द्वारा सिखा सकते हैं, अपने घर में सदाचारी, मृदुभाषी बनिए, अपने से बड़ों का सम्मान करिए तो छोटों के साथ भी विनम्र रहिए, द्वंद का माहौल उत्पन्न नहीं करना चाहिए घर में गाली-गलौज भी नहीं करना चाहिए, अच्छा धार्मिक माहौल अगर बनाया रखा जाए तो बच्चे निश्चित रूप से संस्कारी बनेंगे, बच्चों को माता-पिता की सेवा करने का भाव एवं अतिथि देवो भव की नीति आपको देखकर ही आएगी
पुरुषोत्तम अग्रवाल जी थानखम्हरिया ने जिज्ञासा रखी की,नारद जी भागवत संवाददाता, अप्रतिम संगीतकार, सलाहकार, मध्यस्थ, भगवत् भक्त होने के बावजूद उनकी लोकछवि ऐसी बतायी जाती है जो उनके उपर्युक्त गुणों से भिन्न जान पड़ती है। कृपया इस पर प्रकाश डालेंगे महाराज जी, बाबा जी ने इसे स्पष्ट करते हुए बताया कि इसके लिए हम उनके नाम की व्याख्या को देखते हैं नारद दो शब्दों ना, रद्द से मिलकर बना हुआ है जिन का अर्थ होता है जिनका कहा कभी रद्द ना हो हर युग में नारद जी हुए जो हर जगह उपस्थित है कोई भी युग हो वेद पुराण उपनिषद ग्रंथ सभी में नारद जी की कथा आती है जब धर्म पर संकट होता है या किसी का उद्धार का विषय आता है तो नारद जी वहां उपस्थित होते हैं यह लोक परलोक से परे की बात होती है जो भी नारद जी की बात मानते हैं वह माया के पास से मुक्त होकर परमात्मा को प्राप्त करते हैं और उन्हीं की बात को लोग बिगड़ना कहते हैं जैसे आज के युग में साधु संत के सानिध्य को या साधु बनने को ही बिगड़ना कह दिया जाता है नारद जी ब्रह्मा जी के मानस अवतार हैं जिनकी वाणी कभी भी गलत नहीं हो सकती नारद जी के ज्ञान को पाकर अच्छे-अच्छे जीवों का कल्याण ही हुआ है
तिलक राम जी राजीम ने जिज्ञासा रखी की,गुरुदेव जी महराज बाली और सुग्रीव की उत्पत्ति पर एक बार प्रकाश डालिये, बाबा जी ने बताया कि इन की कथा पुराण में आती है, बाली और सुग्रीव दोनों की उत्पत्ति अलग-अलग देवों से हुई है बाली महाराज की उत्पत्ति सूर्य से तो सुग्रीव महाराज की उत्पत्ति इंद्र के द्वारा हुई है और इनमें प्रगाढ़ प्रेम था
इस प्रकार बाबा जी के सुन्दर मधुर भजन "जरी की पगड़ी बांधे....." के साथ ऑनलाइन सत्संग का समापन हुआ
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम
