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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..31-05-2021*..🎋
✍🏻नि:स्वार्थ कर्म करते रहो, जो भी होगा, अच्छा हीं होगा, थोड़ा LATE होगा, पर LATEST होगा।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻निराशा के काले बादलों को आशा का दीपक ही अपनी रोशनी से हटाने का सामर्थ्य रखता है। अतः सदा ध्यान रहे कि आशा के दीपक का बुझ जाना ही जीवन का समापन होता है। इसलिए आशा के दीपक से अपने जीवन को सदा प्रकाशवान बनाये।
🌹 *σм ѕнαитι.
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💥 *जरा सोचो*💥
🌻ईश्वरीय मिलन का सुख स्वर्ग के सम्पूर्ण सुखों से भी बढ़कर है,......... देवताओं को भी वह सुख प्राप्त नहीं होगा, जो तुम्हें प्राप्त है।
सुख से अपने खजाने भरने के लिये तुम क्या कर रहे हो ?
🌹 *ॐ शांति*🌹
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*🗣️ अनमोल वचन 💐*
*जीवन की हर समस्या का कारण है अज्ञान.... और उसका हल है... सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान। क्योंकि आज मानव को न रास्ते का पता है और न ही मंजिल का... इसलिये तो वह भटका हुआ इच्छा ग्रस्त है!*🌸🌿🌻🌸🌿🌻🌸🌿
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*31 मई:-*_ बदले की भावना जीवन को परेशानियो से भर देती है, इसे शुभ भावना में बदलो।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
मनुष्य जितना *इंद्रियों* के वश होता जाता है... उतनी ही उसकी आयु घटती जाती है। इंद्रियां केवल *भौतिक* सुखों की *भोगना* के लिये हैं, जो सदा काल नहीं रहेगा। अतः भले ही सांसारिक सुख भोगो... पर उस सुख के साथ *चिपको* नहीं, क्योंकि संसार की कोई भी *वस्तु* अविनाशी नहीं है। अविनाशी है तो बस... तुम खुद और खुदा...
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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उस रास्ते पर मत चलो जिसपर डर तुम्हें ले जाये ,
बल्कि उस रास्ते पर चलो जिसपर प्रेम ले जाये,
उस रास्ते पर चलो जिसपर ख़ुशी तुम्हें ले जाये।
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*💎“समस्या का डटकर सामना करें”💎*
_❊ समस्याओं से घबराकर भागने से उनका निराकरण नहीं होता। डटकर सामना करने से ही समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है।_
_❊ एक बार स्वामी विवेकानंद एक सरोवर के किनारे चले जा रहे थे। वे किसी गंभीर चिंतन में उलझे हुए थे। सरोवर से कुछ ही दूरी पर पेड़ों का समूह था, जिस पर कई बन्दर रहा करते थे। बंदरों के झुण्ड ने वक्ता को देखा तो वे उन्हें डराने के लिए उनकी तरफ बढ़े। जब बंदरों का झुण्ड उनके नजदीक आ गया,तब अचानक वक्ता का ध्यान टूटा।_
_❊ उन्होंने देखा कि लाल मुँह के विशाल व विकराल बन्दर उनसे अधिक दूरी पर नहीं थे। उन्हें अपनी ओर आते देख वक्ता घबरा गए और पलटकर भागने लगे। बन्दर भी उनके पीछे -पीछे भागे। वक्ता को लगा कि अब उनकी जिंदगी नहीं बचेगी।_
_❊ तभी उधर से किसी बुजुर्ग का गुजरना हुआ। उन्होंने वक्ता को भागते देखा और उसके पीछे पड़े बंदरों के झुण्ड को भी।_
_❊ वे तुरंत समझ गए कि माजरा क्या है? अनुभवी बुजुर्ग ने वक्ता से जोर से चिल्लाकर कहा-वहीँ रुक जाओ भागो मत। वह पीछे पलटकर बंदरों के सामने खड़े हो गए। उनके इस तरह खड़े हो जाने से बंदरों का झुण्ड रुक गया। वे उसी तरह सीधे खड़े रहे तो बंदरों का झुण्ड वहाँ से भाग गया।_
_❊ इस घटना ने वक्ता को गहराई तक प्रभावित किया। उसी दिन उन्होंने अपने भाषण में इस घटना का उल्लेख कर कहा-उन विकराल बंदरों से डरकर भागता रहता तो मैं बचता नहीं।_
_❊ बन्दर मुझे मार डालते। लेकिन जब मैं उनके सामने डटकर खड़ा हो गया,तो वे चुपचाप भाग गए। इसी प्रकार संकट व समस्याओं से पलायन करने से वे दूर नहीं होती। हमें इनका सामने से डटकर सामना करना होगा तभी इन पर काबू पाया जा सकता है।_
_❊ मनुष्य की कई समस्याएँ स्वयं की पैदा की हुई होती है, यदि उन समस्याओं का समाधान करना है तो मनुष्य को कुछ देर स्थिर होकर उन समस्याओं की जड़ में जाना चाहिए और उनका सामना करते हुए खत्म करना चाहिए।_
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*💫◆ ओम शान्ति ◆💫*
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*💢◆ ओम शान्ति ◆💢*
_भौतिक क्षेत्र में भी यदि हमारे नेत्रों पर काला चश्मा लगा हो तो हमें सब कुछ काला ही दिखाई देगा । पीलिया के रोगी को सारे पदार्थ पीत-वर्ण के दृष्टिगोचर होते हैं । सावन के अंधे के लिए भी उक्ति प्रसिद्ध है कि उसे सब हरा ही हरा दिखता है । उसी प्रकार विकारी मनुष्य को सभी मनुष्य विकारों से परिपूर्ण ही दिखाई देंगे क्योंकि उसके नेत्रों पर विकारों का चश्मा जो लगा हुआ है ।_
_★ जब हम किसी की ओर एक उंगली उठाते हैं तो बाकी चारों उंगलियां स्वत: ही हमारी ओर उठ जाती है । यह भी सिद्ध करता है कि दूसरों में जो अवगुण हम देखते हैं वह हममें उससे चार गुना अधिक विद्यमान है । अतः आध्यात्मिक साधकों को पर-छिद्रान्वेषण न कर अवगुणों की जड़ अपने में ही खोजनी चाहिए ।_
_★ हमारा ध्येय हंस के समान बनना है । हमें मोती चुगने वाला हंस बनना है ना कि गंद खाने वाला कौवा । हंस का ध्यान मोतियों की खोज में लगा रहता है लेकिन कौवे की दृष्टि दूर से ही गंदगी पर चली जाती है । उसी तरह निर्दोष चित्त वाले व्यक्ति की दृष्टि किसी के अवगुण पर न जाकर उसके गुणों पर जाती है । लेकिन मलिन चित्त दूसरों का अवगुण ही खोजता रहेगा और कहीं किसी में रिंचकमात्र भी दिखाई देने पर प्रफुल्लित होगा और दूसरों को भी उसका अवगुण दिखाकर आनंद लेगा । वह यह नहीं जानता इस तरह वह अपने बहुमूल्य समय और जीवन को व्यर्थ ही खो रहा है तथा अपने कुसंस्कारों को और भी जटिल बना रहा है ।_
_★ पर छिद्रान्वेषण आत्मिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है । सांसारिक रूप में भी किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है । यदि वह ऐसा करता है तो स्वयं भी दंड का भागी बन जाता है ।आध्यात्मिक क्षेत्र में तो यह और भी अधिक सत्य है । सृष्टि नाटक विविधता पूर्ण है और सबके संस्कार भी अलग-अलग है ।_
_★ अतः अपने से भिन्न विचारों वाले व्यक्ति से घृणा करना भूल है । हमें यह सोचकर शांत-चित्त रहना चाहिए कि जो आत्मा जैसा कर्म करेगी ईश्वरीय विधान के अनुसार वह वैसा ही फल पाएगी । लेकिन यदि हम स्वयं किसी को दंड देने का प्रयत्न करेंगे तो हमारी आत्मिक शक्ति का भी ह्रास होगा और सुक्ष्म ईश्वरीय विधान के अनुसार हम भी तो दंड के भागी बन जाएंगे । आध्यात्मिक साधक को दूसरों का उपयोग नहीं वरन् स्वयं का अवगुण देख उससे मुक्त होने का भागीरथी प्रयत्न करना चाहिए ।_
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*☀️● OM SHANTI ●☀️*
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
लोग कहते हैं... *स्वभाव* नहीं बदल सकता, किसी की *प्रकृति* थोड़े ही बदलती है! नहीं... संस्कार, स्वभाव, प्रकृति बदल सकता है। जैसे-जैसे मनुष्य के *विचार* बदलते जाते हैं... *स्वभाव* बदलता जाता है। इसलिये कहते हैं *ज्ञान* बिना *गति* नहीं क्योंकि ज्ञान से हमारे विचारों का शुद्धिकरण होता है।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*मुस्कुरा😊 कर देखने*
*और*
*देख कर😊 मुस्कुराने*
*मे बड़ा फर्क है....*
*नतीजे बदल जाते है*
*और*
*कभी कभी👬🏻👭🏻👫🏻 रिश्ते भी.....!*
*जीवन में महत्वपूर्ण यह नहीं है कि,*
*आपकी "उम्र" क्या है,*
*बल्कि*
*महत्वपूर्ण यह है कि,*
*"सोच"🙇🏻♀️🙇🏻♂️किस उम्र की रखते हो..!!!*
*ये ना पूछँना*
*ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है,*
*क्योकि शिकायते तो उन्हें भी है..*
*जिन्हें ज़िन्दगी🍱🥼🏬📲💻🏍️🚘✈️🚁🛳️ सब देती है !!!*
*मानो तो मौज हैं*...
*नही तो🤦🏻♀️🤦🏻♂️ समस्या🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️तो रोज हैं*!!
Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻♀️🧘🏻♂️morning😊
♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*👉🏿अच्छे संस्कार * 🏵️ 🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
अख़बार बेचने वाला 10 वर्षीय बालक एक मकान का गेट बजा रहा है।
मालकिन - बाहर आकर पूछी क्या है ?
बालक - आंटी जी क्या मैं आपका गार्डेन साफ कर दूं ?
मालकिन - नहीं, हमें नहीं करवाना है, और आज अखबार नही लाया ।
बालक - हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्व आंटी जी करा लीजिये न, अच्छे से साफ करूंगा,आज अखबार नही छपा,कल छुट्टी थी दशहरे की ।"
मालकिन - द्रवित होते हुए "अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा ?"
बालक - पैसा नहीं आंटी जी, खाना दे देना।"
मालकिन- ओह !! आ जाओ अच्छे से काम करना ।
(लगता है बेचारा भूखा है पहले खाना दे देती हूँ..मालकिन बुदबुदायी।)
मालकिन- ऐ लड़के..पहले खाना खा ले, फिर काम करना ।
बालक -नहीं आंटी जी, पहले काम कर लूँ फिर आप खाना दे देना।
मालकिन - ठीक है, कहकर अपने काम में लग गयी।
बालक - एक घंटे बाद "आंटी जी देख लीजिए, सफाई अच्छे से हुई कि नहीं।
मालकिन -अरे वाह! तूने तो बहुत बढ़िया सफाई की है, गमले भी करीने से जमा दिए। यहां बैठ, मैं खाना लाती हूँ।
जैसे ही मालकिन ने उसे खाना दिया, बालक जेब से पन्नी निकाल कर उसमें खाना रखने लगा।
मालकिन - भूखे काम किया है, अब खाना तो यहीं बैठकर खा ले। जरूरत होगी तो और दे दूंगी।
बालक - नहीं आंटी, मेरी बीमार माँ घर पर है,सरकारी अस्पताल से दवा तो मिल गयी है,पर डाॅ साहब ने कहा है दवा खाली पेट नहीं खाना है।
मालकिन की पलके गीली हो गई..और अपने हाथों से मासूम को उसकी दूसरी माँ बनकर खाना खिलाया फिर उसकी माँ के लिए रोटियां बनाई और साथ उसके घर जाकर उसकी माँ को रोटियां दे आयी । और आते आते कह कर आयी "बहन आप बहुत अमीर हो जो दौलत आपने अपने बेटे को दी है वो हम अपने बच्चों को नहीं दे पाते हैं" ।
माँ बेटे की तरफ डबडबाई आंखों से देखे जा रही थी...बेटा बीमार मां से लिपट गया...
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