शिवालयों में गुंजा हर-हर महादेव, भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने भक्तों की लगी कतार
शिवालयों में गुंजा हर-हर महादेव, भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने भक्तों की लगी कतार
सुरेन्द्र जैन/धरसीवां
हिन्दू कैलेंडर के पांचवा और देवो के देव महादेव के सबसे प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है। और पहले सोमवार पर सुबह से ही क्षेत्र के शिवालयों में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और अभिषेक करने भक्तों की कतार लगी रही। शिवभक्त बाबा भोलेनाथ की दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक और रूद्राभिषेक करने फूल माला,नारियल,अगरबत्ती और बेल पत्ता आदि लेकर पहुंचे हुए थे। धार्मिक मान्यता है कि सावन महीने मे भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत फलदायी होता है। सबसे विलक्षण बात यह है कि इस साल सावन महीना केवल 29 दिन का होगा। और केवल चार सोमवार ही पड़ेगा। सावन में कृष्णपक्ष तो पूरा 15 दिन का होगा। लेकिन शुक्लपक्ष 14 दिन का ही रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार कृष्णपक्ष के द्वितीया और शुक्लपक्ष के नवमी तिथि का क्षय हो रहा है।वहीं इस साल सावन में दो श्रवण नक्षत्र भी पड़ रहा है। साथ ही सावन महीना इस साल रविवार से शुरू होकर रविवार को ही खत्म होगा। यानी सावन महीने की शुरूआत 25 जुलाई से श्रवण नक्षत्र में होकर समापन 22 अगस्त को धनिष्ठा नक्षत्र में होगा।हिन्दू पंचांग के मुताबिक पहला सावन सोमवार व्रत 26 जुलाई को धनिष्ठा नक्षत्र में पड़ रहा है। वहीं दूसरा 2 अगस्त को कृत्तिका नक्षत्र में तीसरा 9 अगस्त को आश्लेषा नक्षत्र में और चौथा सावन सोमवार व्रत 16 अगस्त को अनुराधा नक्षत्र में पड़ रहा है। वैसे तो भोलेनाथ की आराधना के लिए हर महीने पवित्र है लेकिन सावन महीने को विशेष पावन और उत्तम बताया गया है। पूरे महीने भर भक्त जल,दूध, दही,घी,शक्कर,शहद,गंगाजल,
आदि से भोलेनाथ को स्नान कराएंगे और बेलपत्र,समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न करेंगे। और भोग के रूप में धतूरा,भाँग और श्रीफल भी महादेव को चढ़ाएंगे। पहले सोमवार को दूर-दूर से पहुंचे शिवभक्त हर-हर महादेव और बोल बंम के जयकारा लगाते हुए गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किए तो वहीं केसरयुक्त चंदन के महक से मंदिर परिसर महक उठा। सपरिवार पधारकर भक्त शिवलिंग को धूप, दीप, नैवेद्य, जलाभिषेक और पंचामृत स्नान से पूजन अर्चन कर दीप प्रज्जवलित किए और सुख समृद्धि के साथ मनवांछित फल की कामना भी किए।
