पाटेश्वर धाम में बन रहा 25 करोड़ की लागत से विशाल मंदिर,वही 8 अगस्त को होगा सन्त महात्यागी का जन्म दिवस
पाटेश्वर धाम में बन रहा 25 करोड़ की लागत से विशाल मंदिर,वही 8 अगस्त को होगा सन्त महात्यागी का जन्म दिवस
बालोद जिला के डौंडीलोहारा ब्लॉक मुख्यालय से 21 किमी दूर पाटेश्वर धाम है। 1975, संत राजयोगी बाबा जी ने घने जंगलों में यहां अपना आश्रम बनाया, उस समय का इतिहास बताता है कि इस देवस्थल में 12 गांवों के लोगों द्वारा जानवरों की बली दी जाती थी। संत राजयोगी बाबा ने यहां बलि प्रथा बंद करवाई। कई विरोध के बाद उन्हें सफलता मिली। धीरे-धीरे संत राजयोगी बाबा जी की ख्याति पास के गांव में नहीं सुदूर क्षेत्रों में भी होने लगी थी, आपकी भक्तों में परम् भक्त मंगसा से गुरुजी निगम प्रसाद आडिल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कमलादेवी है,आप राज योगी बाबा जी के दर्शन के लिए उस समय पर यहां आया करते थे तब यहां पर कच्चा रास्ता था पगडंडियों के द्वारा रास्ता तय करके यहां पर भक्तगण आते थे मैया एवं गुरु जी बाबा जी से इतना अधिक प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने 9 वर्ष के बालक को राजयोगी बाबा जी को देने का निर्णय किया और यह वही दिव्य बालक है जिनके कारण आज पूरे पाटेश्वर धाम एवम बालोद जिला और छत्तीसगढ़ की ख्याति पूरे विश्व में हो रही है
संत राम बालक दास जी का जन्म ग्राम पथरी सिलयारी जिला रायपुर में 8 अगस्त 1976 को हुआ था, क्योंकि बचपन से ही आप संत है इसीलिए आपको बालयोगेश्वर की उपाधि प्राप्त है,
वर्तमान में आपके द्वारा प्रदेश का 108 फीट ऊंचे माँ कौशल्या जन्मभूमि मंदिर का निर्माण 29 जनवरी 2005 से चल रहा है। मंदिर में राजस्थान के बंशी पहाड़पुर के लाल रंग के पत्थर का उपयोग हो रहा है। संत रामबालक दास महात्यागी ने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य में 25 करोड़ खर्च आएगी। अब तक आठ करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया जा चुका है। प्रथम तल का निर्माण पूर्ण होने के बाद दूसरे चरण का काम चल रहा है। मंदिर में पंचमुखी हनुमान की मूर्ति है।
मंदिर में 108 मूर्तियां लगाई जाएंगी, 44 लग चुकीं: मंदिर के अंदर दिवारों में अष्टवस्तु, पंचकन्या, यक्षगंधर्व, आपको 108 हिंदू देवी-देवताओं के मूर्तियां देखने को मिलेंगी। अब तक प्रथम तल में 44 मूर्ति लगाई जा चुकी है। जिसमें सर्व समाज के अलावा देश के हिंदू धर्म गुरुओं की मूर्तियां। मंदिर में उद्भुत तो यह होगा कि प्रवेश द्वार में 51 किलो की घंटी और अंदर अपसरा हवा में लटकी हुई मिलेगी। यह किसी के सहारे पर नहीं टिकी होगी।भविष्य मे हिंदू धर्म की 108 देवी देवताओं की मूर्तियां देख सकेंगे लोग।
मंदिर के अंदर दीवारों पर अष्टवस्तु, पंचकन्या, यक्षगंधर्व आपको 108 हिंदू देवी-देवताओं के मूर्तियां देखने को मिलेंगी। जिसमें सर्व समाज के अलावा देश के हिंदू धर्म गुरुओं की मूर्तियां स्थापित की जाएगी।यह अद्भुत होगा की मंदिर प्रवेश द्वार में 51 किलो की घंटा और अंदर अपसराएं बिना किसी के सहारे हवा में लटकी हुई रहेगी। चुंबक के सहारे हवा में लटका रहेगा।
संत राम बालक दास जी ने छत्तीसगढ़ के उस क्षेत्र को विश्व में विख्यात किया जो कि इससे पूर्व घने जंगलों से ढका हुआ था आज एक तीर्थ के रूप में स्थापित है, मैया कौशल्या के धाम के रूप में स्थापित यह तीर्थ आज विश्व विख्यात है, बाबा जी के द्वारा यहां पर अद्भुत भोजन व्यवस्था सीता रसोई के नाम से संचालित की जाती है जिसमें भक्तगण अपनी शादी की वर्षगांठ अपने प्रिय जनो की पुण्यतिथि और अपने एवं अपने परिजनों के जन्मदिवस पर मात्र ₹700 की सेवा देकर जुड़ते हैं, संत राम बालक दास जी ने कोरोना काल में अद्भुत ऑनलाइन सत्संग का आयोजन भी 16 महीने से लगातार जारी रखा है जिससे सभी भक्तगण जो कि इस महामारी से तनाव से ग्रसित है धार्मिक वातावरण प्राप्त करके अपने मानसिक संतुलन को प्राप्त कर पाए उनकी द्वारा यह ऑनलाइन सत्संग निरंतर जारी है, जो कि उनकी विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से किया जाता है, भक्तगण इसमें जुड़ते हैं सुंदर-सुंदर भजनों की प्रस्तुति होती है बच्चों का जुड़ना एवं उनकी मधुर आवाज में दिए गए भजन सबका मन मोह लेते हैं भक्तगण के द्वारा रामायण की चौपाइयों से सभी के ज्ञान का एवं आनंद का स्रोत भी खुलता है यही नहीं बाबा जी प्रतिदिन भक्तों की जिज्ञासाओं का भी समाधान करते हैं वे जिज्ञासा धार्मिक वैज्ञानिक समसामयिक एवं पारिवारिक होती हैं, संत राम बालक दास जी के द्वारा उनके यूट्यूब चैनल
Rambalakdas
पर उनके बाबा जी की पाती का कार्यक्रम का प्रसारन प्रतिदिन संध्या 5 बजे किया जाता है
प्रतिवर्ष भक्तों द्वारा 8 अगस्त को संत श्री राम बालक दास जी का जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से पूरे प्रदेश और देश मे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, गौ माता की सुंदर प्रसादी के साथ छप्पन भोग का आयोजन भक्त गणों के द्वारा किया जा रहा है, सीता रसोई में विभिन्न भक्तगण के द्वारा सेवा दी जाती है, सुंदर वीडियो के द्वारा भक्त शुभकामनाएं भी प्रेषित करते हैं
इस तरह से आज डिजिटल टेक्नोलॉजी का पूरी तरह से उपयोग करते हुए बाबा जी जन जन तक पहुंच चुके हैं, आज छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बूढ़े तक आपके ज्ञान से अभिभूत होकर आपके सानिध्य को अपना सौभाग्य मानते हैं
जय सियाराम जय गौ माता जय गोपाल
