रक्षा-सूत्र जागरूकता की एक नई पहल - fastnewsharpal.com
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रक्षा-सूत्र जागरूकता की एक नई पहल

 रक्षा-सूत्र जागरूकता की एक नई पहल



नवापारा नगर

समीपस्थ ग्राम सोंठ में रक्षाबंधन पवित्र त्यौहार के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना, रेडक्रॉस के स्वयंसेवकों ने रक्षा सूत्र जन-जागरूकता का आयोजन कार्यक्रम संयोजक डॉ. आर. के. रजक एवं सरपंच सेवाराम यादव के नेतृत्व में किया गया। स्वयंसेवकों ने ग्राम के चौक-चौराहे पर बड़े-बुजुर्गों, माताओं, बहनों, देवालयों की मूर्तियोें, पेडों़, गौमाताओं तथा अपने गुरूजनों को रक्षा सूत्र बाँधकर संदेश दिया कि केवल भाई-बहन के रिश्ते में ही राखी नही बाँधी जाती अपितु  हम उन सभी को रक्षा सूत्र बाँध सकते हैं जो दैनिक जीवन में हमारी रक्षा करते हैं। 







हम मंदिरों में मूर्ति पूजा कर जीवन रक्षा की कामना करते हैं, गौमाता के दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन कर स्वस्थ व रोगमुक्त होते हैं। पेड़-पौधे की छाया, उनसे प्राप्त फल-फूल व जडी़-बूटियों के सेवन से  मानव जीवन की रक्षा होती है। सरपंच सेवाराम यादव ने कहा कि यह जागरूकता ग्रामीणों के लिए एक नवाचार होगा। वास्तव में जो भी हमारी रक्षा करते है वे सभी रक्षा सूत्र के पात्र होते हैं। डॉ. आर के रजक ने बताया कि वैदिक राखी का विशेष महत्व होता है श्रावण मास में यदि रक्षा सूत्र कलाई में बाँधी जाती है तो इससे संक्रामक रोगों से लड़ने की हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है साथ ही हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचरण भी होता है। भाई की शादी के बाद बहनें अपनी भाभी को चूड़ी-राखी बाँधती हैं। चंपारण के कार्यक्रम अधिकारी खुमान साहू ने बताया कि रक्षा सूत्र बाँधने से वर्षभर रोगों से, बुरे भावों से एवं बुरे कार्यों से रक्षा बनी रहे ऐसा एक-दूसरे के प्रति सत्संकल्प करते हैं। अमिता तिवारी कार्यक्रम अधिकारी ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व समाज के टूूटे हुए मनों को जोड़ने का सुंदर अवसर है। इसके आगमन से परिवार में कलह समाप्त होने लगती है, दूरियाँ मिटने लगती हैं एवं सामूहिक संकल्पशक्ति साकार होने लगती है। इस विशेष जागरूकता अभियान में रविशंकर देवांगन प्रधानपाठक, श्रीमती हीरा साहू उप-सरपंच, पंच मोंगरा बाई फूलचंद महाविद्यालय, शा. उच्च. विद्यालय चंपारण व गोबरा नवापारा के स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। जिसमें प्रमुख रूप से मृत्युंजय साहू, सूरज प्रकाश सिन्हा, तुलसी साहू, काजल साहू, तारनी साहू, यामिनी साहू, मीना साहू, पारख साहू, अजित साहू, तृप्ति साहू, स्वाती यादव, विद्या साहू, दामिनी साहू, संतोषी साहू, ओमेश्वर साहू, पोखन साहू सहित 42 स्वयंसेवकों का यागदान रहा।

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