आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..05-08-2021*..🎋


✍🏻अपनी पीड़ा के लिए आप संसार को दोष न दें, अपने मन को समझाएं, आपके मन का परिवर्तन ही आपके दुःखों का अंत हैं।

💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻जब मन खराब हो तब बुरे शब्द ना बोलें, क्योंकि खराब मन को बदलने के मौके बहुत मिल जायेंगे लेकिन शब्दों को बदलने के मौके फिर नहीं मिलेंगे।

🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*05 अगस्त:-*_ यदि ईश्वर अल्लाह गॉड एल सेकंड में सत्कर्मो का ज्ञान देकर चले जाए तो कोई उन्हें इतने प्यार से याद न करते वे तो अपने सब बच्चों को  सत्कर्म धारण करने में पूरी मदद भी कर रहे है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचनः

ईश्वर हमारी आत्मा का पिता है,यह भूलने से हम पाप कर्म करने लग पड़ते हैं,यदि सदा याद रहे हम किसके बच्चे है ?  तो हमसे कभी पाप कर्म नहीं होंगें !!
        
🙏ओम् शान्ति🙏

🌹 आपका दिन शुभ हो🌹

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

किसी को *सुधारने* की *कोशिश* करने के बजाए स्वयं को सुधारने की मेहनत करो तो पार हो जाएंगे, क्योंकि भगवान भी *मनुष्य* को नहीं *बदल* सकता.. जब तक वो खुद न चाहे... तो फिर हम यह *असंभव* प्रयास क्यो करते रहते हैं?

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार शिव भगवानुवाच l* ♥

🇲🇰मीठे बच्चे 5000 वर्ष का है यह, विश्व ड्रामा का चक्कर l जिसमें आत्माएं ढाई हजार वर्ष पार्ट बजाती है, पावन सुखदाई देवी देवता बनकर l 🇲🇰

🌎उसके बाद ढाई हजार वर्ष, सर्व आत्माओं ने  पार्ट बजाया, दुखदाई नर्कवासी देह अभिमान में आकर l अभी परमपिता परमात्मा ईश्वर, फिर से धरती पर आकर l 🌎

🤝🏻हम आत्माओं को पतित से पावन बनाते हैं, अपना बनाकर l इस पतित दुनिया का विनाश करते हैं🔥

🌎प्रिय भारत को स्वर्ग बनाकर l उस स्वर्ग का हमें अधिकार देकर, 21 जन्मों के लिए देवी देवता बनाते हैं हमें, संपूर्ण पवित्र बनाकर l 🌸

🙇🏻‍♂️अभी फिर से रिपीट होगा यह, विश्व ड्रामा का चक्कर l उसके पहले पावन बनना है, प्रिय परमात्मा पिता की याद में रहकर l🧎🏻 

🧎🏻जो आत्माएं पावन नहीं बनती देह अभिमान में आकर, वह महाविनाश मे सजाएं खाकर, ढाई हजार वर्ष रहेगी मुक्तिधाम घर l ढाई हजार वर्ष के बाद ही आएगी जन्म लेकर, नर्कमय सृष्टि पर l🙏🏼 

👺अभी पांच विकारों को छोड़कर, परमात्मा पिता का बच्चा बनकर👧🏻

🌎ढाई हजार वर्ष के लिए स्वर्ग का अधिकार प्राप्त कर सकते हो, उनकी श्रीमत पर चलकर l 21 जन्म के लिए देवी देवता बनना है🤴🏻

🙏🏼इस अंतिम जन्म में पावन बनकर, या ढाई हजार वर्ष के लिए मुक्तिधाम घर जाना है, सजा खाकर l अभी खुद का फैसला खुद ही करना है, सोच समझ कर l🙏🏼
🇲🇰ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकर शिव भगवानुवाच l ♥🇲🇰

👺मृत्यु लोक में आकर, अजर, अमर, अविनाशी आत्माओं को, सत्य अमर कथा सुनाने वाले अमरनाथl 🇲🇰

🌏विश्व की सर्व आत्माओं का परमपिता परमात्माl सारे विश्व का कल्याण करने वाला, वह विश्व कल्याणकारी विश्वनाथl🇲🇰

 🐗पशु समान पतित आत्माओं को, पावन देवी देवता बनाने वाला, वह पशुपतिनाथl👺

🌏तीनो लोक का, सृष्टि के आदि मध्य अंत का, तीनों कालों का, ज्ञान का तीसरा नेत्र देकर, त्रिकालदर्शी बनाने वाला, वह त्रिलोकीनाथl🇲🇰

👨🏻‍🦳साधारण, तुच्छ, कमजोर, भोली भाली माताओं के, सर्व भोले बच्चों के, शिव भोले भगवान, वह है भोलानाथl 🇲🇰

👨‍👨‍👧‍👧उस एक भगवान शिव के, अनेका अनेक है, कर्तव्य वाचक नामl🇲🇰

🚩जैसे कि बद्रीनाथ, सोमनाथ.. आदि आदिl आज आए हैं वह, भारत की धरती पर, देने हम सर्व आत्माओं को साथl हम सभी के लिए लेकर आए हैं वह, 21 जन्मों तक, सदा सुख भरे स्वर्ग की सौगातl 🤴🏻

👨‍👨‍👧‍👧प्रिय आत्माओं, अब देकर उनके हाथों में हाथl मान लो उनकी हर बातl🙇🏻‍♂️अपने अति प्रिय भगवान बाप से, करलो मुलाकात l ♥
🙏 *ॐ शांति* 🙏

अच्छा बनने का एकमात्र *तरीका* है... नित्य अच्छा सुन कर, देख कर व अच्छाई का चिंतन कर... निरन्तर स्वयं में *अच्छा* भरते जाना!...

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


*💫सच्चा साथी और सारथी*🌷

✍️...........द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त श्री कृष्ण" ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना,संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो उसका खास खयाल रखना, तो अर्जुन ने कहा, *"हे प्रभु " सबकुछ अगर मुझे ही करना है, तो फिर आप क्या करोगे, ???*
*वासुदेव हंसते हुए बोले, हे पार्थ जो आप से नहीं होगा वह में करुंगा,*
पार्थ ने कहा प्रभु ऐसा क्या है जो मैं नहीं कर सकता, ??? वासुदेव फिर हंसे और बोले, जिस अस्थिर, विचलित, हिलते हुए पानी में तुम मछली का निशाना साधोगे , उस विचलित "पानी" को स्थिर "मैं" रखुंगा !! 

कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य के हर पल भटकते और विचलित मन को स्थिर करने का कार्य केवल प्रभु ही कर सकते हैं, वह भी यदि आप निश्चय बुद्धि हो तो!
जीवन की सत्यता यह है, कि आप चाहे कितने ही निपुण क्यूँ ना हो , कितने ही बुद्धिवान क्यूँ ना हो , कितने ही महान एवं विवेकपूर्ण क्यूँ ना हो , लेकिन आप स्वंय हरेक परिस्थिति के उपर पूर्ण नियंत्रण 
नहीँ रख सकते ......... 
आप सिर्फ अपना प्रयास कर सकते हो , लेकिन उसकी भी एक सीमा है। और जो उस सीमा से आगे की बागडोर संभालता है, 
*बस वही एक सच्चा साथी और सारथी कहलाता है!*
*उसी का नाम "परमपिता परमात्मा शिव है ......*

*सदा स्मृति रहे कि आप एक शांत स्वरूप और वरदानी आत्मा है!!*
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*🟡👉🏿धर्म पथ➖*🏵️

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*पुराने जमाने में एक शहर में दो ब्राह्मण पुत्र रहते थे, एक गरीब था तो दूसरा अमीर..* *दोनों पड़ोसी थे..,,गरीब ब्राम्हण की क्षपत्नी ,उसे रोज़ ताने देती , झगड़ती ..।।*

*एक दिन ग्यारस के दिन गरीब ब्राह्मण पुत्र झगड़ों से तंग आ जंगल की ओर चल पड़ता है , ये सोच कर , कि जंगल में शेर या कोई मांसाहारी जीव उसे मार कर खा जायेगा , उस जीव का पेट भर जायेगा और मरने से वो रोज की झिक झिक से मुक्त हो जायेगा..।*


         *जंगल में जाते उसे एक गुफ़ा नज़र आती है...वो गुफ़ा की तरफ़ जाता है...। गुफ़ा में एक शेर सोया होता है और शेर की नींद में ख़लल न पड़े इसके लिये हंस का पहरा होता है..*


       *हंस ज़ब दूर से ब्राह्मण पुत्र को आता देखता है तो चिंता में पड़ सोचता है..ये ब्राह्मण आयेगा ,शेर जगेगा और इसे मार कर खा जायेगा... ग्यारस के दिन मुझे पाप लगेगा...इसे बचायें कैसे???*


        *उसे उपाय सूझता  है और वो शेर के भाग्य की तारीफ़ करते कहता है..ओ जंगल के राजा... उठो, जागो..आज आपके भाग खुले हैं, ग्यारस के दिन खुद विप्रदेव आपके घर पधारे हैं, जल्दी उठें और इन्हे दक्षिणा देकर रवाना करें...आपका मोक्ष हो जायेगा.. ये दिन दुबारा आपकी जिंदगी में शायद ही आये, आपको पशु योनी से छुटकारा मिल जायेगा...।*


       *शेर दहाड़ कर उठता है , हंस की बात उसे सही लगती है और पूर्व में शिकार मनुष्यों के गहने वो ब्राह्मण के पैरों में रख , शीश नवाता है, जीभ से उनके पैर चाटता है..।*


       *हंस ब्राह्मण को इशारा करता है विप्रदेव ये सब गहने उठाओ और जितना जल्द हो सके वापस अपने घर जाओ...ये सिंह है.. कब मन बदल जाय..*


        *ब्राह्मण बात समझता है और घर लौट जाता है.... पडौसी अमीर ब्राह्मण की पत्नी को जब सब पता चलता है तो वो भी अपने पति को जबरदस्ती अगली ग्यारस को जंगल में उसी शेर की गुफा की ओर भेजती है....*


      *अब शेर का पहरेदार बदल जाता है..नया पहरेदार होता है ""कौवा""*


      *जैसे कौवे की प्रवृति होती है वो सोचता है ... बढिया है ..ब्राह्मण आया.. शेर को जगाऊं ...*


      *शेर की नींद में ख़लल पड़ेगी, गुस्साएगा, ब्राह्मण को मारेगा, तो कुछ मेरे भी हाथ लगेगा, मेरा पेट भर जायेगा...*


       *ये सोच वो कांव.. कांव.. कांव...चिल्लाता है..शेर गुस्सा हो जागता है..दूसरे ब्राह्मण पर उसकी नज़र पड़ती है , उसे हंस की बात याद आ जाती है.. वो समझ जाता है, कौवा क्यूं कांव..कांव कर रहा है..*


      *वो अपने, पूर्व में हंस के कहने पर किये गये धर्म को खत्म नहीं करना चाहता..*

 *फिर भी शेर,शेर होता है जंगल का राजा...*


       

*वो दहाड़ कर ब्राह्मण को कहता है..""हंस उड़ सरवर गये, और अब काग भये प्रधान...तो विप्र थांरे घरे जाओ,,,,मैं किनाइनी जिजमान...,*


       *अर्थात हंस जो अच्छी सोच वाले अच्छी मनोवृत्ति वाले थे उड़ के सरोवर यानि तालाब को चले गये है और अब कौवा प्रधान पहरेदार है जो मुझे तुम्हें मारने के लिये उकसा रहा है..मेरी बुध्दि घूमें उससे पहले ही..हे ब्राह्मण, यहां से चले जाओ..शेर किसी का जजमान नहीं हुआ है..वो तो हंस था जिसने मुझ शेर से भी पुण्य करवा दिया,*


       *दूसरा ब्राह्मण सारी बात समझ जाता है और डर के मारे तुरंत प्राण बचाकर अपने घर की ओर भाग जाता है...*


        *कहने का मतलब है हंस और कौवा कोई और नहीं ,,,हमारे ही चरित्र है...*


      *कोई किसी का दु:ख देख दु:खी होता है और उसका भला सोचता है ,,,वो हंस है...*


       *और जो किसी को दु:खी देखना चाहता है ,,,किसी का सुख जिसे सहन नहीं होता ...वो कौवा है...*


     *जो आपस में मिलजुल, भाईचारे से रहना चाहते हैं , वे हंस प्रवृत्ति के हैं..*


      *जो झगड़े कर एक दूजे को मारने लूटने की प्रवृत्ति रखते हैं वे कौवे की प्रवृति के है...*


       *अपने आस पास छुपे बैठे कौवौं को पहचानों, उनसे दूर रहो ...और जो हंस प्रवृत्ति के हैं , उनका साथ करो.. इसी में सब का कल्याण छुपा है* ।

       



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