शदाणी दरबार मे नवापारा नगर के आध्यात्मिक व्याख्या ब्रह्मदत्त शास्त्री द्वारा
शदाणी दरबार मे नवापारा नगर के आध्यात्मिक व्याख्या ब्रह्मदत्त शास्त्री द्वारा
गोबरा नवापारा
भीष्म पितामह की परमात्मा श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य आस्था है, वीरोचित गति को प्राप्त होने जा रहे भीष्म बाणो की शैय्या पर लेटे हुए हैं, सामने मृत्यु हाथ बाँधे खड़ी है क्योंकि भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है और वो परमात्मा श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा कर रहे हैं , भगवान थब आते हैं तब भीष्म 11श्लोकों में उनकी स्तुति करते हैं, सभी में कृष्ण प्रेमाभक्ति, स्नेह और समर्पण छलक रहा है,और अन्त में आत्मनिवेदन करते हुए अपनी मति रूपी कुँवारी कन्या को यदुवर श्रीकृष्ण को सौंप देते हैं, उनकी प्रामज्योति परमात्मा श्रीकृष्ण में समा जाती है..
इस मार्मिक प्रसंग की बड़ी सटीक आध्यात्मिक व्याख्या ब्रह्मदत्त शास्त्री ने की, कथा स्थल पर श्रध्दालुओं की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है, दरबार के गादीपति सन्त युधिष्ठिर लालजी के शिष्य, सेवादार सभी समुचित व्यवस्थाओं में लगे रहते हैं
बुधवार को श्रीकृष्ण प्राकट्य की कथा होगी