,ब्रह्माकुमारी आश्रम पर धन्वंतरि जयंती मनाई गई ,धन का नहीं, आरोग्य का दिन !--- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई* - fastnewsharpal.com
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,ब्रह्माकुमारी आश्रम पर धन्वंतरि जयंती मनाई गई ,धन का नहीं, आरोग्य का दिन !--- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई*

  ,ब्रह्माकुमारी आश्रम पर धन्वंतरि जयंती मनाई गई ,धन का नहीं, आरोग्य का दिन !--- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई* 



अलीराजपुर,  

धन्वंतरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयंती की बधाई लेते-देते या धनवर्षा की प्रत्याशा में किसी कर्मकांड में शामिल होने के पहले यह जान लेना जरूरी है कि आज के दिन का धन-संपत्ति से कहीं  कोई संबंध नहीं है। यह धन का नहीं, आरोग्य का दिन है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित ब्रम्हाकुमारी सभागृह में धन्वंतरि जयंती के उपलक्ष में  नगर वासियों को इसका महत्व समझाते हुए बताया कि पुराणों के अनुसार यह दिन उस घटना की स्मृति है जब समुद्र मंथन के  अभियान में देवों और असुरों ने समुद्र पार के किसी देश में अमृत-घट के साथ महान चिकित्सक धन्वंतरि की खोज की थी। 



प्राकृतिक  चिकित्सा-विज्ञान में पारंगत धन्वंतरि को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का आदिपुरुष कहा जाता है। देवों ने उन्हें अपना चिकित्सक बनाया और  उन्हें भगवान विष्णु का अवतार तक घोषित किया। हजारों वर्षों से लोगों का यह  विश्वास रहा है कि इस दिन संध्या समय धन्वंतरि को याद कर यम को दीपदान करने से रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिलती है। पता नहीं कैसे कालांतर में  विकृतियों का शिकार होकर आयुर्वेद को समर्पित यह  दिन धन की वर्षा का दिन बन गया। हमारी धनलिप्सा ने एक महान चिकित्सक को भी धन का देवता बना दिया।धनतेरस का यह वर्तमान स्वरुप बाजार और उपभोक्तावाद की देन है जिसने हमें बताया  कि धनतेरस के दिन सोने-चांदी में निवेश करने, विलासिता के महंगे सामान खरीदने या जुआ-सट्टा खेलने से धन तेरह गुना तक बढ़ जाता है।



आज के दिन कहीं निवेश करना है तो आयुर्वेद के आदिपुरुष धन्वंतरि को याद कर अपने आरोग्य में निवेश कीजिए। अच्छे स्वास्थ्य से बड़ा इस दुनिया में कोई धन नहीं। कार्यक्रम के अंत में सभी ने धनवंतरी जयंती की याद को कायम रखने के लिए मोमबत्ती वह दिए चलाएं धनवंतरी देवता की पूजा की गई एवं उनकी अच्छाइयों को जीवन में धारण करने का सभी ने दर्द संकल्प किया कार्यक्रम में डॉ कन्हैया लाल और ब्रह्मा कुमारी सेना बहन ने भी संबोधित किया।

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