*मजदूर वर्ग की पहुच से दूर होता जा रहा 5 किलो ग्राम का व्यवसायिक सिलेंडर,रिफिल चार्ज हुआ 626 रुपये*
*मजदूर वर्ग की पहुच से दूर होता जा रहा 5 किलो ग्राम का व्यवसायिक सिलेंडर,रिफिल चार्ज हुआ 626 रुपये*
सुरेन्द्र जैन/ धरसीवां
पड़ोसी प्रांतों एवं प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से आकर उधोगों में मेहनत मजदूरी करने वालों के लिए 5 किलो ग्राम के व्यवसायिक गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें अब उन्हें गैस पर भोजन बनाने से दूर कर लकड़ियों पर भोजन बनाने की तरफ खींच रही हैं।
दरअसल हर माह 5 किलो ग्राम के व्यवसायिक सिलेंडर पर दाम बढ़ते बढ़ते अब इस माह इसकी रिफिल दर 626 रुपये हो गई है कुछ साल पहले तक इसकी रिफिल दर तीन सौ से साढ़े तीन सौ रुपये के आसपास थी।
*मजदूरों की मजबूरी है यह सिलेंडर*
सरकार ने गरीबो के लिए उज्ज्वला योजना चलाई लेकिन वह कनेक्शन सिलेंडर उन गरीबो के घरों में उपयोग होते हैं और उन गरीब परिवारों के सदस्य जब कहीं अन्यत्र मजदूरी करने कमाने खाने जाते हैं तो न तो वह उज्ज्वला के सिलेंडर साथ ला सकते हैं न ही उनके पास इतने पैसे होते हैं कि वह जहां मजदूरी कर रहे वहां 14.2 केजी घरेलू का कनेक्शन करा सकें ऐंसे में उन्हें सबसे आसान होता है 5 किलो ग्राम का व्यवसायिक सिलेंडर लेना क्योकि जब तक मजदूरी किये तब तक उपयोग किये और जाते समय वापस कर सिलेंडर का डिपाजिट वापस लेकर घर लौट जाते है साथ ही इसका मिलना भी आसान होता है इसलिए प्रदेश के दूरस्थ अंचल से व पड़ोसी राज्यों से ओधोगिक इकाइयों में मजदूरी करने आने वाले इसी सिलेंडर का उपयोग भोजन बनाने में करते है लेकिन अब इसका डिपाजिट भी एक हजार से ऊपर हो गया है एवं रिफिल चार्ज भी 626 हो गया इसलिये यह सिलेंडर भी मजदूर वर्ग की पहुच से दूर हो गया है झोपड़ीयो में एवं कच्चे मकानों में सस्ते में किराए से रहने वाले मजदूर वर्ग को अब लकड़ी छैना ही सहारा बचा है।