11 अगस्त को ही रक्षा बन्धन मनाना श्रेयस्कर---पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री
11 अगस्त को ही रक्षा बन्धन मनाना श्रेयस्कर---पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री
गोबरा नवापारा नगर
अंचल के विभिन्न पंचांगों में रक्षा बन्धन का पर्व कहीं 11 अगस्त कहीं 12 अगस्त को मनाए जाने की बात लिखी होने के कारण आम जनमानस में संशय की स्थिति बन गई है, पण्डितो में भी मतभेद की बात सामने आ रही है, वही अलग अलग तिथि के कारण भ्रम फैल रहा है, इस विषय को स्पष्ट करते हुए।
नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि यह संशय भद्रा को लेकर पैदा हुआ है, हमारे सनातन धर्म एवम संस्कृति में त्योहारों को लेकर उत्साह रहता ही है, ज्योतिष शास्त्र सम्मत तिथि गणना के अनुसार दोष रहित तिथि में ही त्योहार मनाए जाने की परम्परा है, होली एवम राखी के त्यौहार में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है, रक्षा बन्धन का पर्व सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है, 11 अगस्त गुरुवार को पूर्णिमा दिन में10:38 मिनट से लग रही है और ठीक उसी समय भद्रा भी लग रही है, किन्तु यह पाताल लोक में निवास करने वाली भद्रा है, भद्रा के शुभ या अशुभ होने का निर्णय उसके विभिन्न लोकों में निवास के आधार पर किया जाता है,कर्क, सिंह, कुम्भ व मीन राशि की भद्रा का निवास पृथ्वी लोक या मृत्यु लोक में रहता है, यह अशुभ और सभी शुभ कार्यों का विनाश करने वाली कही गई है, मेष, वृष, मिथुन व वृश्चिक राशि की भद्रा को स्वर्ग में रहने वाली सुख देने वाली शुभ करने वाली माना गया है, कन्या, तुला, धनु व मकर राशि की भद्रा पाताल लोक निवासनी है, जो धनागम की सूचक व वित्त संवर्धन कारक कही गई है, ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि यह मकर राशि की भद्रा है, जो पाताल लोक या नाग लोक में रहती है, यह अशुभ नहीं है, शास्त्रों में कहा गया है, "स्वर्गे भद्रा शुभम कुर्यात, पाताले च धनागाम, मृत्युलोक स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी" मुहूर्त मार्तंड ग्रंथ में भी लिखा है "स्थिता भुरलोख्या भद्रा सदा त्याज्या, स्वर्ग पातालगा शुभा अतः किसी को भी भद्रा को लेकर संशय नहीं करना चाहिए, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कभी भी सूर्य या चन्द्र ग्रहण पड़ता है तो उससे संबंधित सूतक आदि नियमों का हम palan करते है, किंतु यदि वो भारत देश में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक या अन्य नियम हम नहीं मानते, इस लिए इस मकर राशि की पाताल लोक की भद्रा को जो शास्त्रों के अनुसार शुभ और धन देने वाली भी है, उसे लेकर कोई भ्रम या संशय नहीं करना चाहिए, जिस लोक में भद्रा रहती है वो उस लोक में प्रभावी रहती है, चूंकि यह भद्रा हमारे लोक की नही है इसलिए इसका कोई भी दुष्प्रभाव हम पर नहीं पड़ेगा, दूसरे दिन 12 अगस्त शुक्रवार को पूर्णिमा तिथि सुबह 7:05 तक ही है, तीन घड़ी भी मुहूर्त ना होने के कारण और पूर्णिमा युक्त प्रतिपदा को प्रशस्त ना मानने के कारण 11 अगस्त को ही श्रावणी उपकर्म करना व रक्षा बन्धन का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत व श्रेयस्कर होगा, उन्होंने कहा कि यह ब्राह्मणों का व भाई बहनों का पावन त्यौहार है इसलिए इसे खूब हर्ष उल्लास के साथ मनाना चाहिए।
