धरसींवा -घोड़े पर सवार होकर आए थे हनुमान जी
धरसींवा -घोड़े पर सवार होकर आए थे हनुमान जी
सुरेन्द्र जैन /धरसीवा
"संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलवीरा" श्रीराम भक्त हनुमान जी की कृपा दृष्टि जिस पर हो जाये उसके सभी संकट टल जाते हैं उन्हें संकट मोचन भी कहते हैं ऐंसे ही संकट मोचन पवन पुत्र हनुमान जी विराजे हैं थाना धरसीवा के हनुमान मंदिर में जिनका अपना एक रोचक इत्तिहास है....करीब तीन दशक से इस मंदिर में पूजन भक्ति कर रहे पंडित ओमकार शर्मा व दुर्गेश अग्रवाल ने बताया कि अंग्रेजो के जमाने मे पुलिस वालों के घोड़े पर विराजित होकर हनुमानजी 4 किलो मीटर दूर से यहां आये थे.....किसी कार्य से तत्कालीन थाना प्रभारी व हवलदार सत्यनारायण मिश्रा ओर सोनू तिवारी देवरी गए हुए थे कोल्हान नाले के पास घोड़ा अचानक रुक गया आगे ही न बढ़े और एक झाड़ के पास घोड़ा रुका उतरकर देखा तो वहां हनुमानजी की प्रतिमा थी तब घोड़े पर उस प्रतिमा को लेकर धरसीवा थाना आये और थाने के सामने छोटीं से मढिया बनवाकर हनुमानजी को विराजित किया हनुमानजी की प्रसिद्धि दिनों दिन बढ़ती गई और आसपास के लोगो की आस्था का केंद्र यह स्थाब बन गया दानदाताओं ने यहां बाद में मन्दिर निर्माण कराया...प्रतिवर्ष यहां हनुमान जयंती पर विशाल भंडारा होता है भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है इस साल भी हनुमान जयंती पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी है.....हनुमान जयंती धरसीवा सहित ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा में भी धूमधाम से मनाई जा रही है।
