गंगा दशहरा चित्रोत्पला महानदी का अवतरण दिवस पंडित --ब्रह्मदत्त शास्त्री
गंगा दशहरा चित्रोत्पला महानदी का अवतरण दिवस पंडित --ब्रह्मदत्त शास्त्री
नवापारा (राजिम)
गंगा दशहरा है,चित्रोत्पला मां गंगा आज ही के दिन भगीरथ की अखण्ड तपस्या से प्रसन्न होकर इस धरा धाम पर अवतरित हुई थी, उस दिन जो ग्रह नक्षत्रों के दस योग बने थे, उसमे से आज सात योग बन रहे हैं, यह त्रिवेणी संध्या आरती के रचनाकार एवम संयोजक पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इस प्रयागराज में भगवान श्री राजीव लोचन के चरण कमल से निकली, कुलेश्वर महादेव की जटा मुकुट का श्रृंगार मां महानदी साक्षात गंगा है, यह छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा है, इसके दोनों किनारों पर रहकर हर युग में असंख्य ऋषि मुनियों ने तपस्या की है, हम सभी सौभाग्यशाली हैं जो इसके किनारे रहते हैं, हमारा पालन पोषण करने वाली वात्सल्य भरी इस मां के प्रति हम सब कृतज्ञ भाव से भरे हैं, जो आज के दिन मां गंगा का पूजन करता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य फल प्राप्त होता है और उसके दस प्रकार के पाप, 3 कायिक, 3 मानसिक और 4 वाचिक पापों का नाश होता है शास्त्रीजी ने कहा कि आज के दिन महानदी में स्नान दान का बड़ा ही महत्व है, ज्येष्ठ मास की इस झुलसा देने वाली गर्मी में प्याऊ खोलने , जल का दान करने, शीतलता प्रदान करने वाले पेय पदार्थ, छाता, चरण पादुका आदि का दान करना चाहिए
हमारे ब्रह्मलीन संतकवि पवन दीवान जी महानदी के प्रति अनन्य श्रद्धा रखते थे, उनकी कविता थी "यह तन छूटे महानदी तट पर और मुख में हो केवल तेरा नाम, बस इतनी सी बिनती करके राजीव लोचन तुम्हें प्रणाम"
और उनकी यह अभिलाषा पूर्ण हुई , उनके महाप्रयाण के समय उन्हें महानदी के किनारे ही समाधि दी गई

