मन प्रदूषित तो पर्यावरण भी प्रदूषित हो गया-- ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन
मन प्रदूषित तो पर्यावरण भी प्रदूषित हो गया-- ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन
हम प्रकृति के प्रति उदार भाव, पवित्र भाव रखें तो पर्यावरण भी संवर जाएगा --ब्रह्माकुमार नारायण भाई
अलीराजपुर
विश्व पर्यावरण दिवस जल जन अभियान के अवसर पर , 5 जून ,प्रकृति हमें सदियों से बहुत कुछ देती आ रही है, अब हमारा फर्ज है कि प्रकृति की सेवा करें। वर्तमान समय हमारे मन में नकारात्मकता का प्रदूषण विचारों में भी आने लगा जिसके कारण प्रकृति के पांच तत्व भी प्रदूषित होने लगे ,पर्यावरण भी प्रदूषित होने लगा। जल, जमीन, जंगल, जानवर,जन सब दूषित हो गए इसके कारण पर्यावरण पर असर आया।मानव का आवरण जब देह अभिमान से खराब हो गया तो पर्यावरण दूषित हो गया ।
यह विचार ब्रम्हाकुमारी सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर दीपा की चौकी पर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में अपने वक्तव्य में नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया। इस अवसर पर सहयोग संस्था के संरक्षक बालकृष्ण गुप्ता ने बताया कि कोई भी संस्था और समाज अपनी खुशी के लिए प्रोग्राम करते हैं तो उस खुशी में एक पौधा लगाए जो सभी को आजीवन खुशी देता रहे और उस पौधे की 5 वर्ष तक पालना करें तो यह एक यादगार कायम रहेगी ।पौधे हमें आजीवन ऑक्सीजन देते हैं। अगर हम कभी आकस्मिक दुर्घटना का शिकार होते हैं तो दो दिन वेंटिलेटर पर कितने लाख रुपए खर्च कर देते हैं, तो प्रकृति का हमें उपकार मानना चाहिए ।माननीय अतिथि अरविंद गहलोत भूतपूर्व प्राचार्य समाजसेवी ने बताया कि पर्यावरण की कई समस्याओं का कारण मनुष्य का स्वार्थ। वह आवश्यकता से अधिक प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करता है। और जब हम वासुधेव कुटुंबकम की भावना रखते हैं तो हमें केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व का ध्यान रखना है। पौधारोपण के साथ-साथ हमें भावनाएं भी सकारात्मक होनी चाहिए। इस अवसर पर इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने बताया की पर्यावरण का अर्थ होता है किसी दूसरे का वरण करना अर्थात हम आत्मा मालिक है, रचयिता है , आत्मा पुरुष है जिस तरह से आत्मा की क्वालिटी होती है वैसा ही पर्यावरण बनता है। पर्यावरण आत्मा के विचारों का वरण अर्थात अवशोषित करता है। आत्मा के विचार के अनुसार पर्यावरण या वातावरण भी वैसा ही निर्मित होता है। आज हमारे मन में नकारात्मक भाव होने के कारण लेने की भावना आ गई तो प्रकृति भी हमसे बदला ले रही है। प्रकृति की सेवा करने के लिए रोज अमृतवेला हम सुभावना का दान दें। हम प्रकृति को रोज निहारा करें सुंदर-सुंदर संकल्प दिया करें उससे प्रकृति का पोषण होता है, प्रकृति तंदुरुस्त, शक्तिशाली बनती है। इस अवसर पर नारायण भाई ने सभी को पौधे हाथ में लेकर पौधों को जिए दान देने के लिए राजयोग के माध्यम से कॉमेंट्री भी कराई। कार्यक्रम के अंत में नरेश भाई वाघेला संस्कारधाम वाटिका के अध्यक्ष ने बताया कि समाज की ओर से एक गार्डन का निर्माण कराया गया जिसमें प्रतिवर्ष डेढ़ सौ पौधों को लगाया जाता है पर्यावरण के प्रति जागृति लाने के लिए। उसकी संभाल समाज के द्वारा किया जाती है। कार्यक्रम के पश्चात ब्रम्हाकुमारी कैंपस में आए हुए सभी माननीय अतिथि ने पौधारोपण किया।









