*जब गम के आंसू खुशी के आंसूओं में हुए तब्दील*
*जब गम के आंसू खुशी के आंसूओं में हुए तब्दील*
सुरेन्द्र जैन /धरसीवा (रायपुर)
अपनो को खोने का गम क्या होता है यह सभी जानते हैं किसी बेटी के पिता और किसी पत्नि का सुहाग जब उससे दूर हो जाये वापस मिलने की कोई उम्मीद दिखाई न दे तो उनकी आंखों में सिंर्फ़ गम के आंसू ही नजर आते है ठीक ऐंसा ही हाल था श्रीमती सीताबाई सोनवानी व उनकी पुत्री नरेसिया टंडन का उनकी आंखों में गम के आंसू थे तभी अचानक मानव सेवा को समर्पित अपना घर से ऐंसी खुशखबरी मिली कि पलभर में ही गम के आंसू खुशी के आंसूओं में तब्दील हो गए।
यह कोई किस्सा कहानी या किसी फिल्म का सीन नहीं बल्कि सोनवानी परिवार की सत्य घटना है।
हुआ यूं कि माहभर पहले सतनामी पारा, नवागांव, मंदिर हसौद रायपुर निवासी पुनितराम सोनवानी अचानक से लापता हो गए पुनितराम सोनवानी विक्षिप्त थे लिहाजा वो अपना नाम भी किसी को नहीं बता पाते थे इधर उनके लापता होने के बाद से ही उनकी धर्मपत्नि श्रीमती सीताबाई सोनवानी व उनकी पुत्री श्रीमती नरेसिया टंडन व दामाद उन्हें खोज खोजकर हताश व निराश हो चुके थे तमाम नाते रिश्तेदारों में आसपास के गांवों में हर जगह उन्हें खोजा पर वह नहीं मिले पल पल हर पल उनकी याद में उनकी धर्मपत्नि ओर पुत्री की आंखों में आंसू भर आते थे तभी उन्हें गांव के परिचित ने आकर शुभ सन्देश दिया कि पुनितराम जी गौड़ी स्थित अपना घर मे हैं जहां मानव सेवा को समर्पित अपना घर मे वह सकुशल है आश्रम में उनकी समुचित देखभाल हो रही है फिर क्या था यह खबर सुनते है एक पत्नि ओर पुत्री की आंखों में जो गम के आंसू थे वह खुशी के आंसुओं में तब्दील हो गए।
*वन्दना ग्लोवल ने समर्पित किया है मानव सेवा को अपना घर*
ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा स्थित वन्दना ग्लोवल पावर एंड इस्पात लिमिटेड के एमंडी गोपाल
*अपना घर आश्रम की टीम ने किया था रेस्क्यू*
ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा में स्थित वन्दना ग्लोवल पावर एंड इस्पात लिमिटेड के एमंडी गोपाल अग्रवाल ने गौड़ी ग्राम में अपना घर आश्रम मानव सेवा को समर्पित किया है जहां ऐंसे बेसहारा बीमार लोगो को आश्रय देकर उनकी सेवा उनका उपचार आदि किया जाता है जिनका दुनिया मे कोई न हो माहभर पहले 21 मई को अपना घर आश्रम गौड़ी रायपुर की रेस्क्यू टीम की नजर पुनितराम पर पड़ी मानसिक रूप से विक्षिप्त पुनितराम अपना नाम पता नहीं बता पा रहे थे उनसे रेस्क्यू टीम ने जब उनका नाम पूंछा तो वह बबुआ बबुआ ही बोले मानसिक रूप से विक्षिप्त नजर आए बबुआ जी को रेस्क्यू टीम अपना घर आश्रम गौड़ी ले गयी जहां उन्हें बबुआ प्रभु जी नाम मिला और उनकी सेवा उनक्त उपचार आश्रम कर्मचारियों द्वारा किया जाने लगा।
*ग्रामीण ने पहचाना ओर घर मे दी सूचना*
मानसिक रूप से विक्षिप्त बबुआ प्रभुजी को आश्रम में एक माह बीत चुका था आश्रम में उनकी देखभाल बेहतर ढंग से होने से देखने मे भी बबुआ प्रभुजी में परिवर्तन आ चुका था तभी उनके गांव का एक ग्रामीण किसी कार्य से आश्रम आया ओर उसकी नजर बबुआ प्रभुजी पर पड़ गई देखते ही वह पहचान गया यह तो पुनितराम जी हैं फिर क्या था उसने तुंरन्त अपना घर आश्रम के कर्मचारियों को अवगत कराते हुए यह खबर पुनितराम के दामाद बेटी और उनकी पत्नी तक पहुचाई खबर सुनते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू भर आये और वह सीधे अपना घर आश्रम पहुची जहां पुनितराम को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा अपना घर आश्रम के कर्मचारियों ने भी जब एक बिछड़े पिता पुत्री ओर पत्नि को मिलते देखा तो खुशी से उनकी भी आंखें भर आईं आश्रम कर्मचारियों ने बबुआ प्रभुजी यानी पुनितराम को उनकी धर्म पत्नी श्रीमती सीताबाई सोनवानी एवं पुत्री श्रीमती नरेसिया टंडन एवं इनके दामाद राजेश के सुपुर्द किया इस परिवार ने अपना घर आश्रम रायपुर का ओर इस आश्रम को बनवाने वाले गोपाल अग्रवाल एमडी वन्दना ग्लोवल का आभार जताया।

