राजयोग द्वारा मन व तन की बीमारियों पर आयोजित पांच दिवसीय शिविर का कार्यक्रम-- ब्रहमा कुमार नारायण भाई
शारीरिक व मानसिक बीमारी का कारण नेगेटिव एनर्जी। अच्छे स्वास्थ के लिए सकारात्मक सोच
राजयोग द्वारा मन व तन की बीमारियों पर आयोजित पांच दिवसीय शिविर का कार्यक्रम-- ब्रहमा कुमार नारायण भाई
कुक्षी 12 जून
,आजकल हम सभी एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां के वातावरण में काम, क्रोध, लोभ, मोह अहंकार जैसे पांच विकारों के नेगेटिव वाइब्रेशंस समय के साथ-साथ, बहुत सी मनुष्य आत्माओं द्वारा रेडिएट किए जा रहे हैं। इसी तरह से बहुत सी गंभीर बीमारियां, जो मनुष्यों के लिए जानलेवा हैं, समय के साथ बढ़ती जा रही हैं। तो आइए, जानते हैं कि, इन दोनों बातों में क्या कनेक्शन है?जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर, भोजन के ऊपर, जल के ऊपर और हवा के ऊपर निर्भर करता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि, सब्जियों, फलों और अनाजों में मिलावट होने से, यहां तक कि पिए जाने वाले पानी में भी मिलावट, और बढ़ती हुई कारों की संख्या और इंडस्ट्रीलाइजेशन के द्वारा हवा में प्रदूषण और विषैली गैसों की मिलावट की वजह से, हमारे शरीरों में गंभीर बीमारियां पैदा हो रही हैं।लेकिन, फिजिकल अशुद्धियों और मिलावट को छोड़ कर, एक अलग तरह की मिलावट हमारे भोजन, जल और हवा में मौजूद है जो कि, इस दुनिया की करोड़ों आत्माओं के नेगेटिव वाइब्रेशन द्वारा रेडिएट हो रही हैं। पांच विकार; वह नॉन फिजिकल अशुद्धियां हैं जिनका सब्जियों पर, फलों पर और अनाजों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है, और जब हम इन्हें ग्रहण करते हैं, तो पानी और हवा में मिले हुए बहुत से अशुद्ध वाइब्रेशंस की वजह से मानव शरीर में फिजिकल और मेंटल इलनेस बढ़ती जा रही है।वातावरण में रेडिएट हुई यह एनर्जी विकारों की नेगेटिव एनर्जी जो है हमारे देह अभिमान के द्वारा पैदा होती है जिन्हें मनुष्य और अन्य प्राणी रेडिएट करते हैं। ऐसे वाइब्रेशन लोगों के नेगेटिव एक्शन से आते हैं,और जो आत्माऐं उन्हें रेडिएट करती हैं, उनकी लाइफ में नेगेटिव परिस्थितियां लाने के साथ-साथ, वे हमें भी भोजन, जल और हवा के माध्यम द्वारा प्रभावित करती हैं।जिससे हमारी फिजिकल बॉडी के अंदर स्थित स्पिरिचुअल एनर्जी यानि आत्मा की क्वालिटी भी प्रभावित होती है। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रहमा कुमार नारायण भाई ने गणेश मंदिर सुतार मोहल्ला में राजयोग द्वारा मन व तन की बीमारियों पर विजय पांच दिवसीय शिविर के दूसरे दिन के अवसर पर सकारात्मक विचार व स्वास्थ के विषय पर नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया कि हमारे शरीरों में इस प्रकार के सूक्ष्म बदलाव की वजह से, बहुत सारी बीमारियां आती हैं और साथ ही साथ ये हमारी आत्मा को भी दुष्प्रभाव पहुंचाती हैं।शरीर मेंं लाल और सफ़ेद कोशिकाएं होती हैं ! सफेद कोशिकाओं में रोगों से लड़ने की शक्ति होती है । जब ये कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं तॊ हमें रोग होने लगते हैं । सफेद कोशकायो के कमजोर होने का कारण काम क्रोध, लोभ, मोह अहंकार और ईर्ष्या, द्वेष, आलस्य, उत्पीड़न, शोषण, निंदा चुगली तथा अन्य नकारात्मक विचार और कल्पना है ।
लोग फास्ट फूड खाते हैं जिन से पर्याप्त न्यूट्रीशन नहीं मिलता और सफेद कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं । तेज दवाइयां खाने से भी सफेद कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं । मां - बाप के रोग और आदते बच्चों में भी चली जाती हैं । उनकी ये आदते इन्ही सफेद कोशिकाओं में स्थित डी एन में चली जाती हैंं । जो अगली पीढ़ी में जाती रहती हैं । इस लिये नकारात्मक विचारों और कल्पनाओं से बचना चाहिए ताकि हमारी सफेद कोशिकाएं शक्तिशाली बनी रहें ! कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मा कुमारी ममता बहन ने किया। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने मानसिक साइलेंस का अनुभव करने के लिए राजयोग का अभ्यास कराया। इस कार्यक्रम में कुक्षी के आसपास के गांव से काफी संख्या में आत्माएं लाभ ले रही है।


