रायपुर के ऐतिहासिक महाराजबंध तालाब की दयनीय स्थिति, प्रशासनिक लापरवाही और पुनर्जीवन की आवश्यकता - fastnewsharpal.com
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रायपुर के ऐतिहासिक महाराजबंध तालाब की दयनीय स्थिति, प्रशासनिक लापरवाही और पुनर्जीवन की आवश्यकता

रायपुर के ऐतिहासिक महाराजबंध तालाब की दयनीय स्थिति, प्रशासनिक लापरवाही और पुनर्जीवन की आवश्यकता



रायपुर — 

जो कभी तालाबों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध था — आज अपनी पहचान खोने की कगार पर है। शहर के ऐतिहासिक जलाशय, जो हमारी संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय धरोहर के प्रतीक हैं, अब लापरवाही और गंदगी के शिकार हो रहे हैं।



ऐसा ही एक महत्वपूर्ण जलाशय महाराजबंध तालाब, जो रायपुर के मध्य में स्थित है, आज अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुँच चुका है। यह तालाब कलचुरी राजा ब्रह्मदेव के काल में निर्मित हुआ था और धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान रायपुर प्रवास में दूधधारी मठ में रुके थे और यह क्षेत्र उनके चरणों से पवित्र हुआ था।


सदियों से यह स्थान संतों, साधुओं और श्रद्धालुओं का केंद्र रहा है, किंतु आज इसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तालाब में गंदगी और कचरे का अंबार लगा है, जलकुंभी और खरपतवार ने पूरे क्षेत्र को ढँक लिया है, और वर्षों से कोई गहरीकरण कार्य नहीं हुआ। घरों और नालियों का गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है, जबकि एस.टी.पी. प्लांट निष्क्रिय पड़ा हुआ है।


शासन द्वारा तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण हेतु करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए थे, किंतु अधिकांश योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित हैं। सीमांकन न होने से अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, और विसर्जन कुंड के अभाव में मूर्तियाँ व झांकियाँ तालाब में ही सड़ रही हैं। परिणामस्वरूप स्थानीय लोग बदबू, मच्छरों और बीमारियों से परेशान हैं, और मॉर्निंग वॉक जैसी गतिविधियाँ भी अब असंभव हो चुकी हैं।


इतिहास और आस्था का प्रतीक यह धरोहर अब राजनीति और प्रयोगों का विषय बनकर रह गई है।


ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ की माँगें


ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ शासन और प्रशासन से मांग करती है कि —


तालाब का तत्काल गहरीकरण, सफाई और पुनर्जीवन कार्य शुरू किया जाए।


नालियों और घरों का गंदा पानी तालाब में गिरने से रोका जाए।


एस.टी.पी. प्लांट को पुनः प्रभावी रूप से संचालित किया जाए।


विसर्जन कुंड का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाए।


स्थानीय नागरिकों को जोड़कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।



समय-सीमा एवं ग्रीन आर्मी का संकल्प


यदि शासन-प्रशासन एक माह (10 दिसंबर 2025) तक ठोस कार्रवाई नहीं करता है,

तो ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ स्थानीय नागरिकों के सहयोग से

“महाराजबंध तालाब पुनर्जीवन अभियान”

11 दिसंबर 2025 से स्वयं प्रारंभ करेगी।


संक्षेप में


महाराजबंध तालाब केवल एक जलाशय नहीं,

यह रायपुर की आस्था, इतिहास और अस्तित्व का प्रतीक है।

इसे बचाना केवल सरकार की नहीं,

बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।


ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ यह संकल्प लेती है कि

हम इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित करेंगे

और आने वाली पीढ़ियों को

एक स्वच्छ, सुंदर और जीवंत तालाब सौंपेंगे।


कार्यक्रम उपरांत जानकारी:


ग्रीन आर्मी के लगभग 100 सदस्य इस अवसर पर उपस्थित रहे।

तालाब परिसर का निरीक्षण किया गया और स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया गया।


इस अवसर पर उपस्थित रहे —

प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे,

रायपुर जिला अध्यक्ष गुरदीप टुटेजा,

ब्लू विंग अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव,

प्रदेश मीडिया प्रभारी शशिकांत यदु,

ब्राउन विंग अध्यक्ष पंडित विनीत शर्मा,

तथा ग्रीन आर्मी के अन्य पदाधिकारी व सदस्यगण।

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