"ब्रह्माबाबा का जीवन त्याग, तपस्या और सादगी का संगम था"- ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी
"ब्रह्माबाबा का जीवन त्याग, तपस्या और सादगी का संगम था"- ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी
इंदौर,
18 जनवरी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा की 57वीं पुण्य स्मृति दिवस पर इंदौर न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर में माउंट आबू में बनी ब्रह्माबाबा की समाधि 'शांति स्तंभ' की प्रतिकृति, बाबा की कुटिया, ब्रह्माबाबा की जीवन कहानी को दर्शाती चित्र प्रदर्शनी तथा मेडिटेशन रूम को एक क्विंटल फूलों से सजाया गया। इस अवसर पर हजारों ब्रह्माकुमार कुमारियों ने मौन रहकर ब्रह्माबाबा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने ब्रह्माबाबा के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिताश्री ब्रह्माबाबा दादा लेखराज के रूप में जाने-माने हीरे जवाहरात के व्यापारी थे। उनका जीवन राजसी ठाठ-बाठ, धन-धान्य, पारिवारिक सुख से संपन्न था। लेकिन परमात्मा शिव की प्रवेशता के पश्चात उन्होंने अपना तन, मन, धन, जन, सुख सुविधा सब ईश्वरीय सेवा अर्थ समर्पण कर दिया तथा त्याग, तपस्या और सादगी को अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया। उन्होंने सदियों से अबला, भोग्या समझी जाने वाली नारी को सशक्त कर उनके दैवी स्वरूप को जागृत किया। सत्संग में आने वाले छोटे बच्चों के लिए भी बोर्डिंग खोल उनकी ऐसी पालना की जो वही बच्चे पिताश्री के अव्यक्तारोहण के बाद दादियों के रूप में ब्रह्माकुमारी संस्थान की नींव बनें तथा यहां की सेवाओं को विश्व स्तर तक पहुंचाया। जिसने वर्तमान समय में नारी शक्ति द्वारा संचालित सबसे बड़ी संस्थान का रूप ले लिया है।
आरंभ में हेमलता दीदी ने ईश्वरीय महावाक्यों का वाचन किया तथा सभी ब्रह्माकुमारी बहनों ने मिलकर परमात्मा शिव को भोग स्वीकार कराया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडिया, प्रशासन, व्यापार, उद्योग, चिकित्सा तथा शिक्षा जगत के कई प्रबुद्धजनों ने संगठित रूप से योग तपस्या कर विश्व में शांति, प्रेम तथा सद्भाव के प्रकंपन फैलाएं।





