*सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं*
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं
सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं। सत्संगति आनंद और कल्याण का मूल है। सत्संग की सिद्धि ही फल है और सब साधन तो फूल है,परन्तु इस फल की प्राप्ति कोरोना काल में असंभव सी प्रतीत हो रही है, क्योंकि अभी सभी जगह सामाजिक दूरी का पालन करना आवश्यक है सत्संग संभव नहीं हो पा रहा है, परंतु पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी के द्वारा उनके सीता रसोई संचालन वाट्सएप ग्रुप में प्रतिदिन ऑनलाइन सत्संग का आयोजन किया जाता है जो कि उनका अद्भुत प्रयास है जिससे सभी भक्त लाभान्वित हो रहे हैं
इस सत्संग परिचर्चा में प्रतिदिन सभी अपनी जिज्ञासाओं को, श्री राम बालक दास जी के समक्ष रखते हैं और समाधान प्राप्त करते हैं आज की परिचर्चा में बहन ऋचा गहरवार ने शिव भोले और राम जी के बीच मधुर संबंधों को स्पष्ट करने की विनती बाबा जी से कि इस विषय को स्पष्ट करते हुए बाबाजी ने बताया कि भूत भावन भोलेनाथ और श्री राम के बीच प्रेम संबंध का प्रसंग हरिहर के नाम से जाना जाता है किसी कवि ने कहा भी है कि" रमा पति राम, उमापति शंभू एक दूजे का नाम उर धरा, राम दरबार है जग सारा" अर्थात शिवजी सदा राम राम भजन करते हैं और राम जी सदा शिव शिव भजन करते हैं अद्भुत प्रेम है दोनों का शिव एवं राम एक दूसरे का पर्याय है कुछ लोग शिव भक्त हैं तो राम जी को नहीं पूजते तो कुछ कृष्ण और राम जी के उपासक है तो वह शिव को नहीं पूजते तो ऐसे में आप की उपासना निराधार सिद्ध होती है क्योंकि स्वयं भगवान राम जी ने रामचरितमानस के उत्तरकांड में स्वधाम गमन करते हुए अपने प्रजा को कहा है
जिसे बाल्मीकि जी एवं गोस्वामी तुलसीदास जी ने उल्लेख किया है हे प्रजा वासियों मुझे पाने का एक गुप्त मंत्र है कि भगवान शिव के भजन बिना तुम्हें मेरी प्राप्ति नहीं हो सकती
भगवान शिव की अराधना रावण ने की, शिव की आराधना करके सब कुछ पाने वाला रावण भगवान राम का तिरस्कार और अपमान करके विनाश को प्राप्त हुआ अतः जो प्रभु श्रीराम का विरोध करेंगे उनके शत्रु बनेंगे उनका विनाश निश्चित है शिव भी उनकी रक्षा नहीं कर सकते और जो राम की उपासना करके शिव का विरोध करेंगे तो भोलेनाथ तो कुछ नहीं करेंगे परंतु रामजी उन्हें कभी स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए जो राम उपासक हैं बे शिव भक्त होने चाहिए और जो शिव भक्त हैं उन्हें राम उपासक होना चाहिए
हम वैष्णव जन जब पूजा उपासना करते हैं भगवान शिव की पूजा अभिषेक से प्रारंभ करते हैं तुलसी की माला ग्रहण करते हैं और जब भोले बाबा पर बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं तो उन पर भी राम नाम अंकित होता है कितना मधुर संबंध है इसलिए पंच देव की पूजा का विधान हमारे शास्त्रों में है इसलिए राम कृष्ण शिव में कोई भेद नहीं है अतः आप अभेद भक्ति से शिव राम की उपासना करें
रामेश्वर वर्मा जी ने कबीर दास जी की वाणी "कबीरा खड़े बाजार में सबकी मांगे खैर, ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर को स्पष्ट करने की विनती बाबा जी से कि इस दोहे को स्पष्ट करते हुए बाबाजी ने बताया कि कभी-कभी संतों की जो वाणी होती है वह परमहंसी वाणी होती है हम सोचते हैं कि वह हमारे लिए कहा गया है तो उसका अर्थ हमारे लिए नहीं होता यह उनकी गति है बाबा कबीर दास जी जिस स्थिति में पहुंच चुके हैं वह स्थित परमहंस संत की है और इस स्थिति में वह कह सकते हैं कि उनका किसी से भी बैर भाव नहीं है और ना ही किसी से कोई लेना देना परंतु हम जिस संसार में रह रहे हैं उसमें यह स्थिति व्यावहारिक जीवन में आप नहीं ला सकते इस संसार में सबसे अपने रिश्ते नाते निभाना व्यवहार करना आवश्यक हो जाता है और मनुष्य जीवन को अच्छे से जीते हुए 1 दिन उस मंजिल को प्राप्त करना जिसके लिए हमने जन्म लिया जीवन में अच्छे ज्ञान का अर्जन करना अच्छे गुणों को धारण करना और आंतरिक मन को शांत रखना आवश्यक है आंतरिक मन शांत रहेगा तो आपको जीवन के लोभ मोह द्वेष में फंसने की आवश्यकता नहीं रह पाएगी, सदैव अपने करम ऐसे रखें कि अपने कर्मों से कभी किसी को कष्ट न पहुंचे तो आप अपने कर्मों से सदैव संतुष्ट रहेंगे, और इस जीवन को जीते हुए भी सन्त दृष्टिकोण आपके हृदय में वास करेगा
इस प्रकार आज का आनंददायक भक्ति मय संगीत मय भजनों से परिपूर्ण सत्संग हुआ।
