* समुद्र की फरारी का समीकरण गणित से नही राजनीति से हो रहा है संचालित* - fastnewsharpal.com
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* समुद्र की फरारी का समीकरण गणित से नही राजनीति से हो रहा है संचालित*

 समुद्र की फरारी का समीकरण गणित से नही राजनीति से हो रहा है संचालित



अजीत सिंह,बिलासपुर 

आबकारी विभाग में पूर्व ओएसडी समुद्र सिंह पर 4 अप्रेल 2019 को इओडब्ल्यू की एफआईआर हुई थी। 26 अप्रेल 2019 को टीम ने उनके विभिन्न ठिकानों पर छापा मारा। छापा पड़ने के बाद से ही समुद्र सिंह उनकी पत्नी और बेटा फरार हो गए है। विशेष अदालत ने एक एक करके सभी के अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी, और पुलिस ने 100 करोड़ बेनामी संपत्ती के अधिकारी की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। समुद्र सिंह की अग्रीम जमानत याचिका मई 2019 में उच्च न्यायलय बिलासपुर से भी खारिज हो चुकी है। 2 अक्टुबर गांधी जयंती 2020 से 6 दिन आबकारी विभाग ने मद्यनिषेध की मुहिम चलाई। समुद्र सिंह सेवा निवृत्त के बाद इसी विभाग में 9 साल संविदा के तहत ओएसडी रहे। उनका त्रिकोणिय हनिमून भाजपा शासन काल में 9 साल चला। तब भी 9 बार गांधी जयंती आई होगी और पुरे विभाग ने इसी भ्रष्ट ओएसडी के निर्देश पर गांधी जयंती के कार्यक्रम मनाएं होंगे। गांधी सबके है तब 100 करोड़ वाले समुद्र सिंह के भी है। गांधी प्रभाव कारी है किन्तु उनके प्रभाव तब असरदार साबित नही होते जब करोड़ो के घपले बाज उनके बताए हुए उपायों को करते है। सारे प्रदेश में अवैध शराब का  घंधा यू ही बदनाम है। असल घपला तो वैध शराब के धंधे में जो पहले ठेकेदार करता था, वही अब सरकार कर रही है। एक नंबर दो नंबर की तर्ज पर कहा जाता है कि शराब की बोतलों में भी दो स्तर बन गए है। दोनो स्तर की शराब एक साथ दुकान पर उपलब्ध है। किन्तु दुकान पर मौजूद स्टाफ दो नंबर की शराब ग्राहक को देता है। शराब की बिक्री में गिरावट आ रही है। किन्तु यह आधा सच है। दुकान के बाहर खड़ा ग्राहक तो आज भी यह दावा करता है कि वह तनाव में पहले से ज्यादा  पीता है। तब आबकारी की सेल कम कैसे हो सकती है। जवाब यही है कि स्टाफ ग्राहक को जो बोतल उठा के देता वह दो नंबर की शराब है जिसकी बिक्री और मौजूदगी रिर्काड में दर्ज नही होती। सरकार किसी की भी हो वे जीत कर आने पर सबसे पहले भारतीय सविंधान के नीति निर्देशक तत्वों को भुला देते है। ऐसा करने के बाद शासन करना बेहद आसान है। ईओडब्ल्यू का आरोपी जिसकी चल-अचल संपत्तीयां रायपुर, बिलासपुर, मुंगेली, अनुपपुर, राजस्थान, हरियाणा, गोवा तक में मिली। लगातार फरार  रहने का रिर्काड बना रहा है। जब कानून के हाथ के लंबे होने का दावा किया जाता है। तभी यह भी पता चलता है कि अपराधी के फरार होने की कीमत कितनी उंची है। यह लंबाई और ऊंचाई का समीकरण गणित से नही राजनीति से संचालित होता है।



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