*पुलिस के मुताबिक कमरे में धुंआ भरने से हुई घटना*
उरला की फैक्ट्री में सिक्युरिटी गार्ड व एक फीटर की संदिग्ध मौत
*पुलिस के मुताबिक कमरे में धुंआ भरने से हुई घटना*
सुरेन्द्र जैन/धरसीवां
राजधानी से लगे ओधोगिक क्षेत्र उरला में दो लोगो की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है हालांकि पुलिस ने प्रथम दृष्ट्या कमरे में धुंआ भरने से घटना होने की बात कही है।
जानकारी के मुताबिक ओधोगिक क्षेत्र उरला अछोली में स्थित हीरा पावर विकास फेरोलाइज में बुधवार की सुबह सर्वेंट क्वाटर में मैकेनिकल के फीटर ओर सिक्योरिटी गार्ड बेहोशी की हालत में मिले उन्हें रायपुर के निजी अस्पताल में उपचारार्थ भर्ती किया गया जहां उनकी मौत हो गई मृतक अमित त्रिपाठी भिलाई सुखलाल बिलाईगढ़ बलौदाबाजार के मूल निवासी थे।
*क्या कहते हैं उरला टीआई*
इस मामले में उरला थाना के टीआई अमित तिवारी का कहना है प्रथम दृष्टया मामला कमरे में धुंआ भरने से दम घुटने से मौत होने का लगता है दोनों मृतक एक ही कमरे में रहते थे सर्दी के कारण उन्होंने आग तापने सिगड़ी जलाई थी और सो गए थे कमरे में कार्बन मोनो ऑक्ससाइड भरने से दम घुटने से यह घटना हुई पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पोस्ट मार्डम को भेजे हैं आज पोस्टमार्डम होगा पोस्टमार्डम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सही कारण सामने आएगा।
*जिम्मेदार कौन*
ओधोगिक क्षेत्र उरला हो या सिलतरा इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं फेक्ट्रीयो ने कहीं अपने परिसर के अंदर तो कहीं अपनी बाउंड्री से लगकर बाहर सरकारी जमीन पर श्रमिको के लिए कालोनियां बना रखी है लेकिन उनमे श्रमिक किस तरह से रह रहे हैं क्या कर रहे हैं खिड़की दरवाजे बिजली पानी की क्या ओर केंसी व्यवस्था है कही कोई लापरवाही मनमानी तो नही चल रही यह देखने वाला कोई नही
कुछ दिन पहले ही सिलतरा की वंदना ग्लोबल फेक्ट्री की बाउंड्री से सरकारी नाले के समीप बनी श्रमिक कालोनी में तीसरी मंजिल से एक श्रमिक ने एक अन्य को ऊपर से धक्का देकर गिरा दिया था इलाज के दौरान मंगलवार को उसकी भी मौत हो गई मामला दारू को लेकर विवाद का सामने आया था ।
*प्रबन्धको की लापरवाही*
जिन उधोगों ने अपनी फेक्ट्रियो के बाउंड्री के बाहर श्रमिक कालोनियां बनाईं हैं वहां प्रबन्धको की बड़ी लापरवाही देखने को मिलती है अन्य प्रान्तो से आने वाले श्रमिको में कौन कैसा है क्या कर रहा है ड्यूटी के बाद कब कहाँ जा रहा है क्या कर रहा है इस दिशा में अब तक किसी भी फेक्ट्री प्रबन्धन ने ध्यान नही दिया है न ही अब तक अधिकांश फेक्ट्रियो ने अपने यहां काम करने वाले कर्मियों व श्रमिको का सचित्र वायोडाटा पुलिस को देना शुरू किया इससे कई बार पुलिस को भी सत्य जानने में परेशानियां झेलना पड़ती हैं।
