*कुलेश्वनाथ मंदिर में मनाया गया शिव-पार्वती विवाह समारोह* - fastnewsharpal.com
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*कुलेश्वनाथ मंदिर में मनाया गया शिव-पार्वती विवाह समारोह*

 *कुलेश्वनाथ मंदिर में मनाया गया शिव-पार्वती विवाह समारोह*



राजिम

 माघी पुन्नी मेला में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान राजीवलोचन मंदिर से ध्वज पताका कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में ले जाकर फहराया गया। इस मौके पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास जी महाराज, पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय, जनपद के पूर्व अध्यक्ष राघोबा महाड़िक, सर्वराकार भूषण सिंह ठाकुर, सचिव अनिल तिवारी, राजेन्द्र मनू, तुषार ठाकुर, चन्द्रभान सिंह ठाकुर, प्रभाकर अम्बिलकर, शिव सिंह ठाकुर, पंडित विजय शर्मा आदि ने द्वादश शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। जिसमें मुख्य रूप से कुलेश्वरनाथ महादेव, भूतेश्वरनाथ महादेव, पंचेश्वरनाथ महादेव, दान दानेश्वरनाथ महादेव, राज राजेश्वरनाथ महादेव आदि पर पुष्प अर्पित कर पूजन किया गया। लोक धारणा है कि महाशिरात्रि पर भगवान विष्णु के साथ ही भोलेनाथ एवं माता पार्वती अन्य वेश धारण कर मेला का भ्रमण करते हैं। आज गुरूवार को महाशिवरात्रि पर रात 12 बजे से लेकर दो बजे तक रूद्राभिषेक किया गया। चना-दाल, मिश्री, काजू किसमिस, फल का भोग लगाया गया तथा पोशाक के साथ ही श्रृंगार से भोलेनाथ की छवि अत्यंत ही मनमोहनी प्रतीत हुआ। इस मौके पर शिव-पार्वती विवाह समारोह मनाया गया।

राजीवलोचन मंदिर मंें रही रिकाॅर्ड तोड भीड़

प्रसिद्ध भगवान राजीवलोचन मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक दर्शनार्थियों की रिकाॅर्ड तोड भीड़ रही। इस भीड़ को देखकर हर कोई कहने लगा। यह आस्था की परिणिति हैं लोग लम्बी लाईन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते रहें। राजीवलोचन भगवान की जयकार पूरा मंदिर परिसर में गूंज उठा।

राज राजेश्वरनाथ में किया अर्धपरिक्रमा

राजीवलोचन मंदिर के पश्चिम में राज राजेश्वरनाथ महादेव का मंदिर हैं। जिसमें दर्शनार्थीगण पूजन करते रहें। विल्व पत्र, धतुरा, केसरिया, दूध, दही, गंगा जल, सरसों तेल, सुगंधित तेल से अभिषेक किया गया। भोलेनाथ कें पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप श्रद्धालुआंे ने किया बता दे कि जाप तीन प्रकार के होते हैं वाचिक जाप, उपांशु जाप एवं मानसिक जाप जिसकों भी जो अच्छा लगा भगवान की आराधना में तल्लीन रहें।

सोमेश्वरनाथ में चढ़ाया विल्व पत्र

पवन दीवान आश्रम परिसर में प्राचीन सोमेश्वरनाथ महादेव का मंदिर प्रस्थापित हैं। गर्भगृह में अर्धनारीश्वर, शिवलिंग में विल्व पत्र चढ़ाकर प्रार्थना किया गया। बताया जाता हैं कि इस शिवलिंग की स्थापना राजा सोमदत्त ने किया था। उनके द्वारा सोम यज्ञ सम्पन्न कराने की जानकारी मिलती हैं।

रेत से बनाया शिवलिंग

श्रद्धालुओं ने संगम के पानी में स्नान कर रेत से शिवलिंग बनाकर पूजा-अर्चना किया तथा पूजन सामग्री समर्पित की संगम मंे प्राचीन परम्परा के अनुसार रेत से शिवलिंग बनाकर अभिषेक करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। 

वराह अवतार में रही भक्तों की भीड़

मुख्य मंदिर राजीवलोचन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में वराह अवतार भगवान की प्रतिमा गर्भगृह मंे करीब पांच फीट उंची हैं। काले पत्थरों से निर्मित प्रतिमा में उत्कृष्ट कला का नक्काशी का उदाहरण प्रस्तुत किया गया हैं। पाश्र्व भित्ती के दाये बाये दोनो ओर शानदार कलाकृति का नमुना पेश किया गया। भगवान विष्णु के चैबीस अवतारों में वराह अवतार प्रमुख हैं। यहाॅ ंभक्तों की जमकर भीड़ रहीं। इनके आलावा कमलक्षेत्र के आराध्य देवी माॅं महामाया, लक्ष्मीनारायण मंदिर, बाबा गरीबनाथ, जगन्नाथ मंदिर, राजिम तेलीन भक्तिन मंदिर आदि में भक्तों देखते ही भीड़ बन रही थी।

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