अभनपुर क्षेत्र में मुरम माफिया सक्रिय विभागीय अधिकारियों को सूचना के बाद भी नही कर रहे कार्यवाही - fastnewsharpal.com
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अभनपुर क्षेत्र में मुरम माफिया सक्रिय विभागीय अधिकारियों को सूचना के बाद भी नही कर रहे कार्यवाही

 अभनपुर क्षेत्र में मुरम माफिया सक्रिय विभागीय अधिकारियों को सूचना के बाद भी नही कर रहे कार्यवाही








अभनपुर



एक ओर जहां देश कोरोना महामारी से जूझ रहे है। साथ ही रायपुर कलेक्टर द्वारा जिले में पूरा लॉक डाउन घोषित किया गया है। जिसके चलते पेट्रोल डीजल आवश्यक व शासकीय वाहनों को देने की छूट रखी है।


अभनपुर क्षेत्र के ग्राम कुर्रा में तालाब सौदर्यीकरण के नाम पर तालाब से मुरम की खुदाई कर नियमो के विरुद्ध बहुत ही अधिक खुदाई किया गया है।इसकी शिकायत करने के बाद भी रायपुर खनिज विभाग के आला अधिकारी मौका स्थल पर जांच कर कार्यवाही नही किया गया  वही अभी पूरे क्षेत्र में कार्य बंद पड़ा है पर मुरम माफिया द्वारा निश्चिंत के साथ ही थनोद के बड़े नहर  से लगे स्थल में मुरम माफिया बेतहाशा मुरम खुदाई किया जा रहा है। और अत्यधिक गहराई किया गया है जो लोगो के लिये जोखिम से कम नही।

वही नवागांव(लखना)में भी मुरम माफिया इस कदर सक्रिय है कि लॉक डाउन का उससे कोई फर्क नही और किसानों को झांसे में लेकर बेतहाशा अवैध मुरम खुदाई किया जा रहा। इन तीनो ग्रामो के अलावा अभनपुर के समीप गिरोला,ठेलकाबन्धा में भी मुरम माफिया द्वारा नियमो के विरुद्ध मुरम खुदाई किया गया है। रायपुर खनिज विभाग के आला अधिकारियों को सूचना होने के बाद भी कोई न ही जांच न ही कार्यवाही इससे साफ साफ यही जाहिर होता है कि अधिकारीयो द्वारा अपना हिस्सा लेकर सरकार के सरकारी खजाने लूट रहे है और रायल्टी बतौर राशि को चोरी करने में कोई कसर नही छोड़ा। 

इसके साथ ही ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव ,जनप्रतिनिधियों साथ ही जनपद पंचायत के आला अधिकारियों द्वारा अपना हिस्सा लेने में कोई कदर नही छोड़ते और मुरम माफिया ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को अपने झांसे में रख कर शासकीय मद का दोहन कर सरकार को चुना लगाने में कोई कसर नही छोड़ते हैं।

ऐसे अवैध मुरम खनन कर परिवहन वाले वालो को डीजल किस नियमो को छूट कर डीजल एजेंसियों द्वारा दिया जाता है। इस पर भी सरकार के उच्च अधिकारियों की उदासीनता क्षेत्र में दिखाई देता है। और लॉक डाउन का खुलेआम उलंघन इस मुरम माफियो द्वारा किया जा रहा है । जिसमे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जनपद के उच्च अधिकारियों द्वारा इस पर संज्ञान न लेना मानो पंचायत के धरोहर को सेंध लगाने के बराबर अधिकारियों भी दोषी का हिस्सा माना जा सकता है।

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