आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..30-04-2021*..🎋


✍🏻दुआ शब्दो से नहीँ दिल से होनी चाहिये क्योंकि खुदा उनकी भी सुनता है जो बोल नहीँ पाते।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻अच्छा वक़्त सिर्फ उसीका होता है, जो कभी किसी का बुरा नहीं सोचते। सुख दुख तो अतिथि है, बारी बारी से आयेंगे चले जायेंगे यदि वो नहीं आयेंगे तो हम अनुभव कहां से लायेंगे।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*30 अप्रैल:-*_ ईश्वर कहते है तुम मेरे बच्चे हो मेरे चरण नही पड़ो, गुणवान बनो और मुझसे स्वर्ग का सुख का वर्षा लेलो।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*कर्मों से डरिये ईश्वर से नहीं... ईश्वर तो माफ कर देता हैं मगर कर्म कभी माफ़ नहीं करते।यह अटल सत्य है कि जैसे बछड़ा सौ गायों में अपनी मां को ढूंढ लेता है... उसी प्रकार कर्म भी अपने कर्ता को ढूंढ ही लेता है... आज नहीं तो कल।इसलिये कर्म करते वक़्त ज़रूर सोचिये कि इसका फल मुझे ही भोगना है👏🏻*
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        ॐ शांति
*यदि  कोई  कहे  कि  सिमरण करते  हुए  आनंद  और  शांति  नहीं  मिल  रही  तो  इसका  कोई  कारण  अवश्य  होना  चाहिये  ।*

*ये  कभी  नहीं  हो  सकता  कि  लोहा  पारस  को  छू  जाये  और  सोना  न  बने  ।  लोहा  ही  मैला  और  खोटा  या   जंग  लगा  हो  तो  पारस  क्या  करे  ।  यदि  लोहा  और  पारस  पास-पास  होते  हुए  भी  लोहे  की  दशा  नहीं  बदलती  तो  समझ  लेना  चाहिये  कि  बीच  में  अवश्य  कोई  पर्दा  रह  गया  है  ,  चाहे  वह  कितना  ही  बारीक  क्यों  न  हो  ,  उस  पर्दे  ने  लोहे  को  पारस  से  टकराने  नहीं  दिया  है  ।।* 

*पारस  के  स्पर्श  से  साफ  लोहा  सोना  जरूर  बन  सकता  है  पर  पारस  नहीं  ,  मगर भगवान  जो  हैं  जीव  को  उसे  अपना  ही  रूप  बना  लेते  हैं   ।* 

*जरूरत  है  दृड़  विश्वास  की  ,  जो  उनकी  बात  पर  विश्वास  करता  है  तो उसे अपने रुप बनाना चाहते हैं  ।।*

*यही  अन्तर  है  गुरु  में  और  पारस  में ,  पारस  तो  लोहे  को  सोना  ही  बना  सकता  है  परन्तु  गुरु  सच्चे  नाम  की  कमाई  वाले  को  अपने समान ही  महान बना लेते हैं ।।*
         ॐ शांति
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          ओम शांति
*सारा  संसार  सुख  और  शांति  की  तलाश  में  मारा - मारा  फिर  रहा  है  ।  शारीरिक  और  बाहरी  सुख  क्षणभंगुर  और  बदल  जानेवाले  हैं  ।  इंद्रियों  के  घाट  पर  जो  सुख  प्रतीत  होते  हैं  ,  वे  हमारे  अपने  ही  मन  की  वृत्तियों  के  उनके  साथ  जुड़  जाने  के  फलस्वरूप  हैं  ।  वह  सुख  हमारा  अपना  ही  है  जो  एकाग्रता  ( मन  की  वृत्तियों  की  क्षणिक  एकाग्रता )  के  कारण  प्रतीत  होता  है  ;  जिस  प्रकार  कुत्ता  हड्डी  को  चबाता  है  जिससे  उसके  अपने  मुँह  से  खून  बहता  है  ,  वह  उसे  पीकर  मस्त  होता  है  और  समझता  है  कि  यह  हड्डी  से  मिल  रहा  है ।*  

*_ _ _ आत्मा  चेतन  है  ,  उसे  अचेतन  जड़  पदार्थों  से  सुख  कहाँ  !  उसे  तो  केवल  महाचेतन  के  साथ  जुड़ने  से  सच्चा  सुख  मिल  सकेगा  ।  गुरु  का  शब्द  महाचेतन  की  धारा  है  ,  जिसके  साथ  स्पर्श  करके  सुरत  सच्चे  सुख  का  अनुभव  करती  है :*
        ॐ शांति
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी 

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👉 संगर्स ओर चुंनोतियां 🏵️

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*एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया !कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए,कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये!हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये!*

*एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं,लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा!* *परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है,जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!*

*किसान ने गेहूं की फ़सल बोई,जब धूप चाही,तब धूप  मिली,जब पानी तब पानी !तेज धूप, ओले,बाढ़,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी,समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी !*  *किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.*

*फ़सल काटने का समय भी आया,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया,लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा,प्रभु ये क्या हुआ ?*

*तब परमात्मा बोले*


    *ये तो होना ही था,तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया,ना तेज धूप में उनको तपने दिया,ना आंधी ओलों से जूझने दिया,उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया,इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए,जब आंधी आती है,तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है,उर्जा देता है,उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है !*

*उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो,चुनौती  ना हो तो आदमी खोखला  ही रह जाता है,उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता !ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं,अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनौतियो  स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.* 

 *अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियाँ का सामना तो करना ही पड़ेगा* 

*बिना संघर्ष और चुनौतियों के हम कभी अपनी मंजिल को नही पा सकते यह भी एक परीक्षा है जीवन की जिसके बिना हमें उसी तरह ज्ञान नही होता जिस तरह एक बच्चा परीक्षा दिए बिना अगली कक्षा में नही जा पाते,संघर्ष और जीवन की चुनौतियों का सामना तो इस धरा पर आकर श्री राम और श्री कृष्ण जी ने भी किया*

    🙏🙏🏽🙏🏼🙏🏻🙏🏿🙏🏾

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