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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..21-04-2021*..🎋
जरूरी नही कि मिठाई खिला कर ही दूसरों का मुंह मीठा करें, आप मीठा बोलकर भी लोगों को खुशियां बांट सकते है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻संकल्पों पर ध्यान बहुत जरूरी है, क्योंकि जो भी आप सोचते हैं वह आपके ही सूक्ष्म शरीर का हिस्सा बन जाता है और आपके साथ चलता रहता है। इस जन्म में और अगले जन्म में भी।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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❗ *मौत के डर से ही सही,*.....
*ज़िन्दगी को फुर्सत तो मिली*.....
*सड़कों को राहत*.......
*और घरों को रौनक तो मिली*....
*प्रकृति, तेरा रूठना भी जरूरी था*...
*इंसान का घमंड टूटना भी जरूरी था*..
*हर कोई खुद को खुदा समझ बैठा था*..
*ये शक दूर होना भी जरुरी था!*‼️
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*🙏🏻ओम शांति🙏*
*जिंदगी के उतार चढाव के बावजूद भी..*
*जो आपका साथ न छोड़े,*
*वही आपकी सही मायने मे*
*कद्र करता है बाकी*
*तो बस नाम के रिश्ते है...!!* 🙏
*अंधेरा वहां नहीं है, जहां तन गरीब है!*
*अंधेरा वहां है, जहां मन गरीब है..!!*
*ना बुरा होगा, ना बढ़िया होगा!*
*होगा वैसा, जैसा नजरिया होगा..!!*
*हजार महफिलें हों, लाख मेले हों!*
*पर जब तक खुद से न मिलो,*
*अकेले हो..!!* 🙏
*उत्तम से सर्वोत्तम*
*वही हुआ है...*
*जिसने बड़ा दिल*
*रखकर आलोचनाओं*
*को सुना और सहा है।* 🙏
*अहंकार की*
*बस एक ख़राबी है ….!*
*ये कभी आपको*
*महसूस ही*
*नहीं होने देता कि*
*आप ग़लत हैं....!!* 🙏
*🌹🙏ॐ शांति🙏🌹*
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
*इम्तिहान समझकर* ,
*सारे😷💊🤦🏻♀🤦🏻♂ग़म सहा करो.....*
*शख़्सियत👩🏻👦🏻 महक उठेगी,*
*बस😊 खुश रहा करो.. ✍✍ जीवन का सत्य*
*एक*
*बेहतरीन जिंदगी जीने के लिए*
*यह*
*स्वीकार करना भी जरुरी है*
*कि* ...
*सब कुछ*
*सबको नहीं❌मिल सकता.*
✍🏻...हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें💊🩺🧼🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️बेहिसाब...!
इसी का नाम है ज़िन्दगी चलते🚶🏻♀️🚶🏻♂️रहिये जनाब...!!
*ग़म🤦🏻♀️🤦🏻♂️ न❌करो कि आज🌅 पिंजरे🏠 मे हमारी जान है*।
*शुक्र करो भगवान👆🏻💫🇲🇰👏🏻का कि पिंजरा🏠 तो आलीशान👌🏻 हैं*।
दो🚶🏻♀️😷🚶🏻♂️ गज दूरी बहुत बहुत है जरूरी, सुरक्षित रहे, स्वस्थ रहे, अपनों👬🏼👭🏻👫🏻👨👩👧👦 के साथ मस्त रहे, अपना👩🏻💫👦🏻 खयाल रखें। Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻♀️🧘🏻♂️morning.😊
🙏 *ॐ शांति* 🙏
जितने भी *धर्म-ग्रंथ* पढ़ें... यात्रा व *अनुष्ठान* करें... पर यदि *मन* साफ नहीं तो भगवान आपसे कोसों दूर हैं। कुछ भी धार्मिक क्रिया-कर्म न करें... पर मन से संकल्प मात्र भी किसी को *दुःख* न दें, *भगवान* की गोद आपके लिये है।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*💠🔹सत्य प्रेम को अनुभव करें .🔹💠*
💙 कई लोग काम को प्रेम समझने की भूल करते हैं जबकि इतिहास गवाह है कि काम को पूजा नहीं जाता ! कभी रोमियो - जुलियट का मन्दिर नहीं देखा होगा परंतु राधा-कृष्ण और राम सीता के प्रेम के भजन व पूजन से आज भी आँखे नम होती हैं ! पवित्र प्रेम आज भी पूजनीय है फ़िर वह चाहे राधा का कृष्ण से हो,राम का सीता से हो या शिव का पार्वती से! पूजन सदा पवित्र का ही होता है अपवित्र का नहीं! 'काम' अपवित्र है क्योंकि इसमें देह सम्मिलित है जबकि प्रेम आत्मा को आत्मा से जोड़ता है अतः कोई भी भाव जिसमें देहभान का अंशमात्र न हो वह पवित्र है इसको ही संसार नमन करता है जबकि 'काम' एक विकार है इसलिए इसका गायन नहीं है इससे मनुष्य की शारिरीक व मानसिक क्षति होती है जो मनुष्य जीवन में और कई प्रकार की समस्याओं को आमंत्रित करती है! इतिहास बताता है कि बड़े बड़े राजा महाराजाओं का पतन इसी विकार के कारण हुआ! आज समाज में हर प्रकार की अनैतिकता का मूल कारण भी यही विकार है क्योंकि इससे सबसे अधिक आत्मिक उर्जा का पतन होता है बुद्धि व विवेक नष्ट होता है तथा निर्णय शक्ति कम होती है! बड़े बड़े ऋषिमुनियों की उच्च सिद्धियों को भी इसी विकार के कारण खोते हुए पाया! हर मनुष्य आत्मा परमात्मा का बच्चा है और जैसा पिता वैसा ही पुत्र होता है न?_
_📯 पवित्रता हर आत्मा का मूल स्वभाव है पर आज उसका अंशमात्र भी हम में नहीं दिखता, क्यों? क्योंकि आज हम में विकार व्याप्त हैं और उन विकारों में से सबसे प्रमुख है ' काम ' ! आज छोटे-छोटे बच्चे भी इसी विकार से ग्रस्त पाए जाते हैं जिससे उनकी मासूमियत लुप्त है आज बच्चों को भगवान का स्वरूप नहीं कह सकते! केवल कामुकता भरे कर्म करना ही काम विकार से ग्रस्त होना नहीं है, देहभान से भरे संकल्प करना भी ' काम 'ही है काम सबसे पहले संकल्प मे ही उपजता है! 'काम' ही संसारिक कामनाओं का मूल बीज है जिसकी होड़ में मनुष्य की आज यह हालत हो गई है !_
_📯 अतः संकल्पों की शुद्धता अनिवार्य है हमारे संकल्प ईश्वरीय ज्ञान से युक्त होने चाहिए ! काम विकार के संकल्प मात्र से आत्मा की पवित्रता क्षीण होने लगती है! इसलिए इसे पांच विकारों में सबसे पहले रखा गया है•••काम,क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार! आत्मिक पवित्रता के क्षीण होने के कारण ' काम ' कलयुग में केवल प्रजनन की प्राकृतिक विधि है, मनुष्य जीवन में इसका इससे अधिक कोई महत्व नहीं ! जबकि मनुष्य में जीवन 'प्रेम' का अस्तित्व व महत्व अनादि है ! मनुष्य जीवन प्रेम के बिना नीरस है! प्रेम आत्मिक गुणों में से एक है जिसके बिना आत्मा का सम्पूर्ण स्वास्थ सम्भव नहीं है प्रेम एक सुन्दर भाव है इसमें देह का कोई स्थान नहीं! अतः प्रेम को कामुकता से मत जोड़ें क्योंकि कामुकता आत्मा को कमज़ोर करती है जबकि प्रेम आत्मा को सशक्त करता है जो भाव आत्मा को कमज़ोर करे वह विकार है और जो सशक्त वह गुण कहलाता है अतः काम एक विकार है और प्रेम एक गुण! हमें अपने और समस्त मनुष्य समाज की उन्नति के लिए अवगुणों का त्याग करना चाहिए, तो आओ आज से केवल सत्य प्रेम को अनुभव करें फिर वह चाहे जीवन साथी से हो, घर-परिवार से, जीव -जंतुओं से, प्रकृति से या इस धरा के मालिक परमपिता परमात्मा से सच्चा प्रेम करके अपना जीवन सफ़ल बनाएं !_
*♦✨ओम शान्ति ✨♦*
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*♻️★ ईश्वरीय ज्ञान रतन ★♻️*
_● (1). ईश्वरीय ज्ञान और सहज राजयोग को अपने जीवन का नेचर बना लो तो आपकी पुरानी बेकार की नेचर श्रेष्ठ नेचर में बदल जायेगी |_
_● (2).जब भी कोई समस्या आये तब अपने आदि-अनादि संस्कारों को इमर्ज करे तो समस्याओं से पार हो जायेंगे :- अनादि संस्कार :- मैं आत्मा शांत स्वरूप , मैं आत्मा शक्ति स्वरूप , मैं आत्मा पवित्र स्वरूप , मैं आत्मा ज्ञान स्वरूप , मैं आत्मा प्रेम स्वरूप , मैं आत्मा आनंद स्वरूप हूँ ,मैं आत्मा सुख स्वरूप हूँ | आदि संस्कार :- सर्वगुण सम्पन्न ;16 कला सम्पूर्ण ;सम्पूर्ण निर्विकारी;मर्यादा पुरुषोत्तम,सम्पूर्ण पवित्र;डबल अहिंसक ;अहिंसा परमोधर्म |_
_● (3). विघ्नों से घबराने के बजाए उसका हिम्मत के साथ सामना करो, ये विघ्न कोई न कोई अनुभव देने आते है इसलिए इन अनुभवों को प्राप्त करते जाओ | इन विघ्नों को पेपर समझकर पार करते जाओ | पेपर आना माना अनुभवी बनना | तो घबराओ नहीं |_
_● (4).नाजुक परिस्थितियों से घबराओं नहीं उनसे पाठ पढ़कर स्वयं को परिपकव बनाओ |_
_● (5).निगेटिव और व्यर्थ सोचने का रास्ता बंद कर दो तो सफलता स्वरूप बन जायेंगे |_
_● (6).जैसे धूप के आते ही अँधेरा साथ छोड़ जाता है वैसे ही अच्छे कर्म करने से बुरे कर्म स्वत: ही साथ छोड़ देते है | [ अथार्त आपके संस्कारों में बुरे कर्म करना है तो आप अच्छे कर्म करते जाओ तो बुरे कर्म करने के संस्कार स्वत: ही समाप्त होते जायेंगे | ] [ याद रखो बुरे कर्म आपके खाते में पापों का खाता बढाते है जबकि अच्छे कर्म पूण्य का खाता बढ़ायेंगे | याद रखो :- पाप कर्म का भविष्य में परिणाम है दुःख अशांति बीमारी दुर्धटनायें है जबकि अच्छे कर्म सुख-शांति आनंद निरोगी जीवन मान-सम्मान को बढ़ाने वाले है | ]_
_● (7).जो काम प्रेम से निपट सकता है उसके लिए चीख-चिल्लाकर काम को मत बिगाड़ो |_
_● ( 8). .जैसा संकल्प ( सोच-विचार ) मैं करूंगा मेरे संकल्प अनुसार का वैसा ही वातावरण बनेगा | जैसे मेरे मन में उमंग-उत्साह का,ख़ुशी का संकल्प मन में रहता है तो मेरे आस-पास का वातावरण भी खुशिओं भरा होता जायेगा |_
_● (9).संकल्प द्वारा भी किसी भी आत्मा को दुःख देना व लेना - यह भी हिंसा है |सम्पूर्ण अहिंसक अथार्त संकल्प द्वारा भी किसी को दुःख न देने वाला | अथार्त मन में भी किसी को दुःख देने की बात ना आये | तथा आपके द्वारा मन से भी कोई दुखी ना हो | तब कहेंगे सम्पूर्ण अहिंसक |_
_● (10).शांति की शक्ति धारण करने से मानसिक रोग समाप्त हो जायेंगे |_
_● (11).यदि आप खोटे मनुष्यों की संगत करते हो तो आप बहुत दिनों तक अच्छे नहीं रह सकते है | " सतसंग तारे , कुसंग बोरे | " सत्संग माना :- परमात्मा का संग , परमात्मा द्वारा रचा ब्राह्मण परिवार का संग | कुसंग माना :- कलयुगी आसुरी ( गंदे/बुरे ) संस्कारों वाले लोगों का संग l जिनके संग से आप स्वयं ही गिर जाओगे और आपको पता भी नहीं चलेगा |_
_● (12).नियम है :- " जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे " :- तो अच्छा सोचो ,ऊँचा सोचो |_
_● (13).बुद्धिमान लोग चुप रहते है , समझदार लोग सोच-समझकर युक्तियुक्त समर्थ बोल ही बोलते है | तथा मुर्ख लोग अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए दूसरों से बहस करते है | ( ज्यादा बोलने से दिमाग की एनर्जी कम हो जाती है इसलिए शार्ट [ कम ] बोलो और स्वीट बोलो )_
_● (14).दुःख धाम ( माना यह कलयुगी दुनियाँ , इस दुनियाँ में रहने वाले बुरे संस्कारों वाले लोग; चाहे फिर वो अपने रिश्तेदार सगे-सम्बधी ही क्यों ना हो ) से बुद्धि द्वारा आप किनारा कर लो तो दुखों से छूट जायेंगे |_
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*💜◆ ओम शान्ति ◆💜*
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