प्रदेश में शासकीय अस्पताल भगवान भरोसे।
प्रदेश सरकार के द्वारा एस्मा एक्ट लागू है किंतु धरातल में नियमों का कोई पालन नही किया जा रहा है।
गरियाबंद
💥विष्णु गायकवाड़ जो २५ वर्ष स्वास्थ्य विभाग में सेवा दिया जो उसी स्थान में ईलाज के अभाव में तड़प तड़प का जान दे दिया।
छुरा गरियाबंद सतनामी समाज का सामाजिक नेता भी था।
समाज एवं गरियाबंद छुरा में घटना से काफ़ी आक्रोश व्याप्त हो चली है।
पीड़ित परिवार का आरोप हैं की मरीज़ की तबीयत बिगड़ने पर ड़ा ड़िवटी से नदारत ड़ा को घर में जाकर मरीज़ को देखने के लिए मिन्नते करते रहे।
लेकिन कोई असर नही हुवा जो घोर लापरवाही है अथवा सड्यंत्र की बू आ रही है।
💥 ड़ा डिवटी से नदारत कार्यवाही मात्र वेतन रोकने का नोटीश देकर मामले को ठंडा किया जा रहा है।
राज्य सरकार नागरिकों को उचित ईलाज उपलब्ध कराने में बेबस नज़र आ रही है।
एक ओर प्रदेश महामारी से ज़ुझ रही है वहीं रेमडीसिविर ईंजेक्शन पंद्रह हज़ार से बीस हज़ार में पीड़ित मजबूरी में लेने को लचार बेबस नज़र आ रही हैं।
इंसानियत के दुश्मन नरभक्षि हो गये है सेवा ईनसानियत तार तार हो गयी है कही दिखाई नही दे रही है।
नरभक्षि का रूप कई निजी अस्पताल एवं दवाई मेडिकल आपदा को अवसर में बदलकर रूपये बनाने में मसगुल हैं।
