आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..29-04-2021*..🎋


✍🏻सबसे बड़ी सम्पत्ति बुद्धिमानी है। सबसे ताकतवर शस्त्र धैर्य है। सबसे उत्तम सुरक्षा विश्वास है। और सबसे प्रभावी जो है वह हंसी है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻वाचा(बोली) हमारे व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि रूप और सौंदर्य केवल दूसरो को आकर्षित कर सकता हैं, लेकिन वाणी और अच्छी भाषा हमेशा के लिए दिल जीत सकती है।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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अनमोल वचन :

'रिश्ते’ और ‘रास्ते’ के बीच एक अजीब रिश्ता होता है।कभी 'रिश्तों' से 'रास्ते' मिल जाते है,और कभी 'रास्तों' में 'रिश्ते' बन जाते हैं !! इसीलिए चलते रहिए और रिश्ते निभाते रहिये.......खुशियाँ तो चन्दन की तरह होती हैं, दूसरों के माथे पे लगाओ तो अपनी उँगलियाँ भी महक जाती हैं...... 

🙏ओम् शान्ति 🙏

🎈आपका दिन शुभ हो 🎈

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         ॐ शांति
सारा  संसार  सुख  और  शांति  की  तलाश  में  मारा - मारा  फिर  रहा  है  ।  शारीरिक  और  बाहरी  सुख  क्षणभंगुर  और  बदल  जानेवाले  हैं  ।  इंद्रियों  के  घाट  पर  जो  सुख  प्रतीत  होते  हैं  ,  वे  हमारे  अपने  ही  मन  की  वृत्तियों  के  उनके  साथ  जुड़  जाने  के  फलस्वरूप  हैं  ।  वह  सुख  हमारा  अपना  ही  है  जो  एकाग्रता  ( मन  की  वृत्तियों  की  क्षणिक  एकाग्रता )  के  कारण  प्रतीत  होता  है  ;  जिस  प्रकार  कुत्ता  हड्डी  को  चबाता  है  जिससे  उसके  अपने  मुँह  से  खून  बहता  है  ,  वह  उसे  पीकर  मस्त  होता  है  और  समझता  है  कि  यह  हड्डी  से  मिल  रहा  है ।*  

*_ _ _ आत्मा  चेतन  है  ,  उसे  अचेतन  जड़  पदार्थों  से  सुख  कहाँ  !  उसे  तो  केवल  महाचेतन  के  साथ  जुड़ने  से  सच्चा  सुख  मिल  सकेगा  ।  गुरु  का  शब्द  महाचेतन  की  धारा  है  ,  जिसके  साथ  स्पर्श  करके  सुरत  सच्चे  सुख  का  अनुभव  करती  है :*
     ओम शांति
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*एक सुंदर कहानी*

एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे।

एक दिन पहले एक दिए ने कहा -

इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है...

तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं।

वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । 

जानते है वह दिया कौन था ?

वह दिया था *उत्साह* का प्रतीक ।

यह देख दूसरा दिया जो *शांति* का प्रतीक था, कहने लगा -

मुझे भी बुझ जाना चाहिए।

निरंतर *शांति की रोशनी* देने के बावजूद भी *लोग हिंसा कर* रहे है।

और *शांति* का दिया बुझ गया । 
*उत्साह* और *शांति* के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया *हिम्मत* का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया।

*उत्साह*, *शांति* और अब *हिम्मत* के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा।

*चौथा* दिया *समृद्धि* का प्रतीक था।

सभी दिए बुझने के बाद केवल *पांचवां दिया* *अकेला ही जल* रहा था।

हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह *निरंतर जल रहा* था।

तब उस घर मे एक *लड़के* ने प्रवेश किया।

उसने देखा कि उस घर में सिर्फ *एक ही दिया* जल रहा है।
वह खुशी से झूम उठा।
चार दिए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ।
यह सोचकर कि *कम से कम* एक दिया तो जल रहा है।

उसने तुरंत *पांचवां दिया उठाया* और बाकी के चार दिए *फिर से* जला दिए ।

जानते है वह *पांचवां अनोखा दिया* कौन सा था ?

वह था *उम्मीद* का दिया...

इसलिए *अपने घर में* अपने *मन में* हमेशा उम्मीद का दिया जलाए रखिये ।

चाहे *सब दिए बुझ जाए* लेकिन *उम्मीद का दिया* नही बुझना चाहिए ।

ये एक ही दिया *काफी* है बाकी *सब दियों* को जलाने के लिए ....
        
ख़ुशियाँ आएँगी,  कुछ समय बाद सब सामान्य होगा , *🎀उम्मीद का दिया जलाए रखें* lओम शान्ति l🙏

🙏 *ॐ शांति* 🙏

बात केवल उस अतीन्द्रिय सुख को *अनुभव* करने की है... जिसने परमात्मा के प्रेम का एक बार अनुभव कर लिया, उसे दुनियां का हर सुख *मिथ्या* लगने लगता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी 

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👉 संगर्स ओर चुंनोतियां 🏵️

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👌🏻👌🏻ढ👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

*एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया !कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए,कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये!हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये!*

*एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं,लेकिन लगता है आपको खेती-बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा!* *परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है,जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!*

*किसान ने गेहूं की फ़सल बोई,जब धूप चाही,तब धूप  मिली,जब पानी तब पानी !तेज धूप, ओले,बाढ़,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी,समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी !*  *किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.*

*फ़सल काटने का समय भी आया,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया,लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा,प्रभु ये क्या हुआ ?*

*तब परमात्मा बोले*


    *ये तो होना ही था,तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा सा भी मौका नहीं दिया,ना तेज धूप में उनको तपने दिया,ना आंधी ओलों से जूझने दिया,उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया,इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए,जब आंधी आती है,तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है,उर्जा देता है,उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है !*

*उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो,चुनौती  ना हो तो आदमी खोखला  ही रह जाता है,उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता !ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं,अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनौतियो  स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.* 

 *अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियाँ का सामना तो करना ही पड़ेगा* 

*बिना संघर्ष और चुनौतियों के हम कभी अपनी मंजिल को नही पा सकते यह भी एक परीक्षा है जीवन की जिसके बिना हमें उसी तरह ज्ञान नही होता जिस तरह एक बच्चा परीक्षा दिए बिना अगली कक्षा में नही जा पाते,संघर्ष और जीवन की चुनौतियों का सामना तो इस धरा पर आकर श्री राम और श्री कृष्ण जी ने भी किया*

    🙏🙏🏽🙏🏼🙏🏻🙏🏿🙏🏾

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