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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠
🎋 *..26-05-2021*..🎋
✍🏻पछतावा अतीत नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य नहीं सँवार सकती, इसलिए वर्तमान का आनंद लेना ही जीवन का सच्चा सुख है।
💐 *Brahma Kumaris* 💐
🌷 *σм ѕнαитι*🌷
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💥 *विचार परिवर्तन*💥
✍🏻केवल रक्त सम्बंध से कोई अपना नहीं होता प्रेम, सहयोग, विश्वास, निष्ठा सुरक्षा, सहानुभूति और सम्मान ये सभी ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं।
🌹 *σм ѕнαитι.*🌹
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✍🏻बदलना तय है, हर चीज का इस संसार में, बस, कर्म अच्छे करें किसी का जीवन बदलेगा, किसी का दिल बदलेगा, तो किसी के दिन बदलेंगे।
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ओम शांति
*"हर स्थिति और परिस्थिति में आगे ही बढ़ते जाने का नाम ही जीवन है...जीवन में निराश और हताश होकर लक्ष्य की प्राप्ति नहीं की जा सकती...जो हमारा समय निकल गया उसकी चिंता छोड़े, जो जीवन शेष बचा है उसके बारे में विचार करे...हममें बहुत से लोग शायद कर्म या भाग्य को न भी मानें, पर हम सबका अधिकार केवल कर्म करना, सदाचार और अनुग्रह करने का ही है...शुभ कर्म करना ही अपने आप में एक तृप्ति है जब तक हम सोते रहेंगे तो हमारा भाग्य भी सोता रहता है और जब हम उठकर चल पड़ते है, तो हमारा भाग्य भी साथ हो लेता है...गीता का सर्वप्रिय और सर्वविदित उपदेश भी यही है कि फल की चिंता किए बिना सत्कर्मो में प्रवृत्त हो जाएं और अपने इस देव दुर्लभ मानव जीवन को सफल करे...मनुष्य एक विचारशील प्राणी है और मानव जीवन दुर्लभ और अमूल्य माना गया है...कृपालु प्रभु से जीवन को सदा गतिमान रखने की कृपामयी प्रार्थना के साथ..."*
ॐ शांति
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अनमोल वचन:
अंदाजा नहीं लगा सकते हम इस दुनिया के दुखों का और हांँ अंदाजा तो लगाओ कभी अपने सुखों का.... तो मुंह से यही निकलेगा कि दातेया.. शुक्र है आपका,शुक्र है आपका..़़़़
🙏ओम् शान्ति🙏
♻️आपका दिन शुभ हो ♻️
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*आशा से मनुष्य सौ बरस भी* *जीवित रह सकता है किन्तु* *यदि आशा टूट जाये तो* *वह जीवित नहीं रह सकता* *भले ही उसके घर में* *करोडों की धन दौलत भरी हो।*
*यह आशा और विश्वास जीवन की शक्ति है।*
*संकट जरूर है वैश्विक भी है लेकिन इसी विष में से अमृत निकलेगा।*
*निश्चित ही मनुष्य विजयी होगा मनुष्यता जीतेगी।*
*तूफान तो आना है आकर चले जाना है*
*बादल है ये कुछ पल का छा कर चले जाना है*
ओम शांति
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*कहते है दान तसुपात्रों को करना चाहिए* 🏵️
एक सहर में
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👳♂️ *सेठ जयचन्द जैन* रहते थे एक बार गाँव में अकाल पड़ा जब 2 महीनो बाद लोगो के पास खाने को अन्न नहीं रहा ।
तब
🤴 *राजा मानसिंह*
ने 📢 मुनादी करवाई की जो सेठ साहूकार सक्षम है वो अन्न, धन दान करे और राजकोष में धन- अन्न🥜💰 जमकरवाये।
*सेठ जय चंद*👳♂️
🥜💰🥜
*1000 क्विटल, गेहूं 500 किविंटल दाल, 1000 किलो घी, 2000 किलो तेल और 5000 स्वर्ण मुद्राएं दान दी।*
🙌 *5 माह बाद अकाल पूर्ण हुआ।*
और सेठ को पता चला की उनके पास *जैन मंदिर* जहाँ वो दर्शन के लिए जाते थे उसके 👴🏻 *पुजारी के 2 बेटे* 👶🏻👩🏻🦲भूख से मर गए।
उसके 🏤 कोठी के पास का लगदुमल जो सेठ के बचपन का दोस्त था उसने भुखमरी से दम तोड़ दिया🥴।⚰️
यह सुनकर उसे
⚔️ *राज तंत्र* ⚔️पर बहुत रौष ♨️😡♨️आया वह
🤴राजा के पास गया 🕌और राजा से कहा
💁🏻♂️ कि मैंने इतना दान दिया पर दान की चीज़े मेरे आस पास तक नहीं पहुँची।
🤴 *राजा बोले:-* "हे दानवीर आप के दान की मैं प्रशंसा करता हूँ किन्तु राज्य का विस्तार इतना बड़ा है कि जो हम तक और हम जिन तक पहुंच पाये हमने मदद कि कितुं
आपके आस पास के लोग भुखमरी से मरे उसका कारण शायद यह हो सकता है।
🧐 *आपके रिश्तेदार, नौकर-चाकर, मंदिर का माली, पुजारी और मित्र और संमाज के लोग आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे और शायद वो आपसे कहने में हिचकिचा रहे हो।?*
अतः आपको राजकोष दान तो देना चाहिए था किंतु अगर आप उसका 20% अपने आस पास के लोगों को करते तो आपको ज़्यादा संतुष्टि मिलती।
*मित्रो यही स्थिति हमारी है।*
हमें पहले घर
हमारे कर्मचारी
फिर पड़ोस
फिर मोहल्ला
फिर मंदिर के लोग
फिर हमारे रिश्तेदार
फिर शहर
फिर प्रदेश
फिर देश
फिर विश्व
*अपनी प्राथमिकता निर्धारित करे*
और 👳♂️ *सेठ जयचन्द* जैसी गलती करने से बचे।
प्राथमिकता आपको आपके दान की आत्मसंतुष्टि देगा और
*यही मानवता और देश के प्रति आपकी संजीवनी सच्ची ज़िम्मेदारी होगी।*🙏
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🙏 *ॐ शांति* 🙏
अनुभव कहता है कि इस धरा पर इंसाफ सबको मिलता है, केवल हमें *धैर्य* और *संयम* रखने की जरूरत होती है.... यह धरा जिस अटल कानून पर चलती है, उसमें चाहते हुए भी संसार के *कानून* का कोई हस्तक्षेप नहीं चलता।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
👏🌹😊अनमोल मोती-
लोगों के द्वारा प्राप्त सम्मान, हालात और उनकी मानसिक स्थिति के अनुसार सदा बदलते रहते हैं, इसलिए जब तक हम खुद का एक निश्चित सम्मान स्वयम तय नही कर लेते,तब तक लोगों के द्वारा दिए गए मान-अपमान हमें सदा विचलित करते रहेंगे,
*ओम शांति,सुप्रभात*
👍💖😊
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*:-*_ सफल होने के लिए दिमाग में सफलता का नकशा तैयार करो।
🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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🙏 *ॐ शांति* 🙏
इन आँखों से दिखने वाली किसी भी *चीज* को अपनी खुशी का *आधार* न बनाएं, क्योंकि यह सब *परिवर्तनशील* है, आज है... कल नहीं होगा। खुशी की असली चाबी हमारे अंदर है... बाहर नहीं। उसे खोजो तो हर पल *खुश* रहोगे।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️
*भक्ति* 🏵️
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एक बार लक्ष्मी और नारायण धरा पर घूमने आए,कुछ समय घूम कर वो विश्राम के लिए एक बगीचे में जाकर बैठ गए।नारायण आंख बंद कर लेट गए,लक्ष्मी जी बैठ नज़ारे देखने लगीं।
थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा एक आदमी शराब के नशे में धुत गाना गाते जा रहा था,उस आदमी को अचानक ठोकर लगी, ......
तो उस पत्थर को लात मारने और अपशब्द कहने लगा,लक्ष्मी जी को बुरा लगा, अचानक उसकी ठोकरों से पत्थर हट गया,वहां से एक पोटली निकली उसने उठा कर देखा तो उसमें हीरे जवाहरात भरे थे,वो खुशी से नाचने लगा और पोटली उठा चलता बना।
लक्ष्मी जी हैरान हुई,उन्होंने पाया ये इंसान बहुत झूठा,चोर और शराबी है।सारे ग़लत काम करता है,इसे भला ईश्वर ने कृपा के काबिल क्यों समझा,उन्होंने नारायण की तरफ देखा,मगर वो आंखें बंद किये मगन थे।
तभी लक्ष्मी जी ने एक और व्यक्ति को आते देखा,बहुत ग़रीब लगता था,मगर उसके चेहरे पे तेज़ और ख़ुशी थी,कपडे साफ़ मगर पुराने थे,ljktतभी उससे व्यक्ति के पांव में एक बहुत बड़ा शूल यानि कांटा घुस गया,ख़ून के फव्वारे बह निकले, उसने हिम्मत कर उस कांटे को निकाला,पांव में गमछा बाँधा,प्रभु को हाथ जोड़ धन्यवाद दे लंगड़ाता हुआ चल दिया।इतने अच्छे व्यक्ति की ये दशा।उन्होंने पाया नारायण अब भी आँख बंद किये पड़े हैं मज़े से।
उन्हें अपने भक्त के साथ ये भेद भाव पसंद नहीं आया,उन्होंने नारायण जी को हिलाकर उठाया,नारायण आँखें खोल मुस्काये।लक्ष्मी जी ने उस घटना का राज़ पूछा।तो नारायण ने जवाब में कहा।
लोग मेरी कार्यशैली नहीं समझे।
मैं किसी को दुःख या सुख नहीं देता वो तो इंसान अपनी करनी से पाता है।
यूं समझ लो मैं एक accountant हूं।
सिर्फ ये हिसाब रखता हूं।
किसको किस कर्म के लिए कब या किस जन्म में अपने पाप या पुण्य अनुसार क्या फल मिलेगा।
जिस अधर्मी को सोने की पोटली मिली, दरअसल आज उसे उस वक़्त पूर्व जन्म के सुकर्मों के लिए,पूरा राज्य भाग मिलना था मगर उसने इससे जन्म में इतने विकर्म
किये कि पूरे राज्य का मिलने वाला खज़ाना घट कर एक पोटली सोना रह गया।
और उस भले व्यक्ति ने पूर्व जन्म में इतने पाप करके शरीर छोड़ा था कि आज उसे शूली यानि फांसी पर चढ़ाया जाना था मगर इस जन्म के पुण्य कर्मो की वजह से शूली एक शूल में बदल गई।
अर्थात
ज्ञानी को कांटा चुभे तो उसे कष्ट होता है, दर्द तो होता,मगर वो दुखी नहीं होता।दूसरों की तरह वो भगवान को नहीं कोसता, बल्कि हर तकलीफ को प्रभु इच्छा मान इसमें भी कोई भला होगा मानकर हर कष्ट सह कर भी प्रभु का धन्यवाद करता है।
तो आगे से आप भी किसी तकलीफ में हो तो विचारिये?
सिर्फ़ कष्ट में हैं या दुःखी हैं।
*सच्चे दिल से प्रभु पर विश्वास से आपकी आधी सज़ा माफ़ हो जाती है और बाक़ी तकलीफ सहने के लिए परमात्मा आपको उसे ख़ुशी ख़ुशी झेलने की हिम्मत और मार्गदर्शन देते हैं।*