आज का चिंतन(सुविचार) - fastnewsharpal.com
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आज का चिंतन(सुविचार)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..01-05-2021*..🎋


✍🏻किसी का दिल मत दुखाओ, क्योंकि आप के माफी माँगने के बाद भी उन्हें दुखः जरूर रहेगा, जैसे दीवार में से कील निकालने के बाद भी छेद रह जाता हे।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻अहम् से ऊँचा कोई आसमान नहीं। किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं। स्वयं को पहचानने से अधिक कोई ज्ञान नहीं। और क्षमा करने से बड़ा कोई दान नहीं।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹


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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*01 मई:-*_ सदा ध्यान रहे में आत्मा इस शरीर को चलनेवाली मालिक हु, दिनभर 3 बार इस मालिकपन की सीट पर बेठना है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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*सब में सद्भाव रखो। जगत के किसी भी जीव के प्रति कुभाव रखोगे तो वह जीव तुम्हारे प्रति भी कुभाव ही रखेगा। किसी भी जीव के प्रति कुभाव रखना ईश्वर के प्रति कुभाव रखने के बराबर है। सब को भगवान ने बनाया*

    *किसी जीव के साथ क्या किसी जड़ वस्तु के प्रति भी कुभाव नहीं रखना चाहिए। जड़ पदार्थों के साथ भी प्रेम करना है। सद्भावना के अभाव में किया गया धर्म सफल नहीं होता।*

      *कोई भी क्रिया सद्भाव के बिना सफल नहीं होती। ईश्वर का भाव जो मन में प्रत्यक्ष सिद्ध करे उसी का धर्म पूर्णतः सफल होता है। अतः संत के साथ जुड़े रहनेका प्रयास करते रहिये।*
     ॐ शांति
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       ओम शांति
*दूध के गिलास को समुन्दर में डाल दिया जाए तो दूध का पता ही नही चलेगा कहाँ गया और यदि उसी दूध को थोड़ा गर्म करके जाग (खट्टा) लगाकर एकांत में कुछ देर के लिए रख दें तो दही बन जाता है, उसी का मंथन करके मक्खन निकलता है ! अब यदि उस मक्खन को समुन्दर में डालो तो वो समुन्दर में बह नही जाएगा बल्कि ऊपर ही तैरेगा !*

*इस कथा में यही समझाया है कि हम उस दूध के समान है और ये संसार समुन्दर के समान ! अब फैसला हमारा है कि हमने दूध बनकर संसार रूपी समुन्दर में बह जाना है या प्रभु  का सिमरन करके, अपना मंथन करके मक्खन बनकर तैर कर समुन्दर रूपी संसारके भवसागर को पार करना है !*
           ॐ शांति
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अनमोल वचन :

कर्मों से डरो,ईश्वर से नहीं... ईश्वर तो माफ कर देता हैं मगर कर्म कभी माफ़ नहीं करते,यह अटल सच्चाई है।जैसे बछड़ा सौ गायों में अपनी मांँ को ढूंढ लेता है... उसी प्रकार कर्म भी अपने कर्ता को ढूँढ ही लेता है... आज नहीं तो कल। इसलिये हर कर्म करते वक़्त ज़रूर सोचिये कि इसका फल मुझे ही भोगना है.........

🙏ओम् शान्ति 🙏

🌺आपका दिन शुभ हो 🌺

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अनमोल वचन :

जो परमात्मा के आगे झुकेगा, फिर वो दुनिया के आगे उसे झुकने नही देगा और जो उस के दर पे जायेगा वो दर-दर की ठोकरें खाने से बच जायेगा.......

🙏ओम् शांति 🙏

🌹आपका दिन शुभ हो🌹

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         ओम शांति
*मन कभी भी ख़ाली नहीं बैठ सकता, कुछ ना कुछ करना इसका स्वभाव है, इसे काम चाहिए। अच्छा काम करने को ना मिला तो ये बुरे की तरफ भागेगा। मन खाली हुआ, बस उपद्रव प्रारम्भ कर देगा। लड़ाई-झगड़ा, निंदा-आलोचना, विषय- विलास ऐसी कई गलत जगह पर यह आपको ले जायेगा जहाँ पतन निश्चित है।*

          *पतन एक जन्म का हो तो भी कोई बात नहीं, ऐसे कई अपराध और गलत कर्म करा देता है जिसके प्रारब्ध फल को भुगतने के लिए कई कई जन्म कम पड़ जाते हैं।* 

         *मन को सृजनात्मक और रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखिये। इससे आपका आत्मिक साथ में भौतिक विकास भी होगा। मन सही दिशा में लग गया तो जीवन मस्त (आनंदमय) हो जायेगा। नहीं तो अस्त-व्यस्त और अपसेट होने में भी देर ना लगेगी।* 

*ॐ शांति*🙏🙏
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️    

                       

*👉🏿मृत्यु एक सत्य हैं* 🏵️

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एक राधेश्याम नामक युवक था | स्वभाव का बड़ा ही शांत एवम सुविचारों वाला व्यतयक्ति था | उसका छोटा सा परिवार था जिसमे उसके माता- पिता, पत्नी एवम दो बच्चे थे | सभी से वो बेहद प्यार करता था |


इसके अलावा वो कृष्ण भक्त था और सभी पर दया भाव रखता था | जरूरतमंद की सेवा करता था | किसी को दुःख नहीं देता था | उसके इन्ही गुणों के कारण श्री कृष्ण उससे बहुत प्रसन्न थे और सदैव उसके साथ रहते थे | और राधेश्याम अपने कृष्ण को देख भी सकता था और बाते भी करता था | इसके बावजूद उसने कभी ईश्वर से कुछ नहीं माँगा | वह बहुत खुश रहता था क्यूंकि ईश्वर हमेशा उसके साथ रहते थे | उसे मार्गदर्शन देते थे | राधेश्याम भी कृष्ण को अपने मित्र की तरह ही पुकारता था और उनसे अपने विचारों को बाँटता था |


एक दिन राधेश्याम के पिता की तबियत अचानक ख़राब हो गई | उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया | उसने सभी डॉक्टर्स के हाथ जोड़े | अपने पिता को बचाने की मिन्नते की | लेकिन सभी ने उससे कहा कि वो ज्यादा उम्मीद नहीं दे सकते | और सभी ने उसे भगवान् पर भरोसा रखने को कहा |


तभी राधेश्याम को कृष्ण का ख्याल आया और उसने अपने कृष्ण को पुकारा | कृष्ण दौड़े चले आये | राधेश्याम ने कहा – मित्र ! तुम तो भगवान हो मेरे पिता को बचा लो | कृष्ण ने कहा – मित्र ! ये मेरे हाथों में नहीं हैं | अगर मृत्यु का समय होगा तो होना तय हैं | इस पर राधेश्याम नाराज हो गया और कृष्ण से लड़ने लगा, गुस्से में उन्हें कौसने लगा | भगवान् ने भी उसे बहुत समझाया पर उसने एक ना सुनी |


तब भगवान् कृष्ण ने उससे कहा – मित्र ! मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ लेकिन इसके लिए तुम्हे एक कार्य करना होगा | राधेश्याम ने तुरंत पूछा कैसा कार्य ? कृष्ण ने कहा – तुम्हे ! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो | राधेश्याम झट से हाँ बोलकर तलाश में निकल गया | उसने कई दरवाजे खटखटायें | हर घर में ज्वार तो होती लेकिन ऐसा कोई नहीं होता जिनके परिवार में किसी की मृत्यु ना हुई हो | किसी का पिता, किसी का दादा, किसी का भाई, माँ, काकी या बहन | दो दिन तक भटकने के बाद भी राधेश्याम को ऐसा एक भी घर नहीं मिला |


तब उसे इस बात का अहसास हुआ कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं | इसका सामना सभी को करना होता हैं | इससे कोई नहीं भाग सकता | और वो अपने व्यवहार के लिए कृष्ण से क्षमा मांगता हैं और निर्णय लेता हैं जब तक उसके पिता जीवित हैं उनकी सेवा करेगा |


थोड़े दिनों बाद राधेश्याम के पिता स्वर्ग सिधार जाते हैं | उसे दुःख तो होता हैं लेकिन ईश्वर की दी उस सीख के कारण उसका मन शांत रहता हैं |


दोस्तों इसी प्रकार हम सभी को इस सच को स्वीकार करना चाहिये कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं उसे नकारना मुर्खता हैं | दुःख होता हैं लेकिन उसमे फँस जाना गलत हैं क्यूंकि केवल आप ही उस दुःख से पिढीत नहीं हैं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति उस दुःख से रूबरू होती ही हैं | ऐसे सच को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही जीवन हैं |


कई बार हम अपने किसी खास के चले जाने से इतने बेबस हो जाते हैं कि सामने खड़ा जीवन और उससे जुड़े लोग हमें दिखाई ही नहीं पड़ते | ऐसे अंधकार से निकलना मुश्किल हो जाता हैं | जो मनुष्य मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता हैं उसका जीवन भार विहीन हो जाता हैं और उसे कभी कोई कष्ट  तोड़ नहीं सकता | वो जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता जाता हैं |



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