आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..02-05-2021*..🎋


✍🏻परिवर्तन के बिना प्रगति असंभव है, और जो अपने मन को नहीं बदल सकते, वे कुछ भी नहीं बदल सकते। परिवर्तन को स्वीकार करें।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻जिंदगी का अच्छा तोहफा माना अपने चेहरे पर मुस्कान रखना। लेकिन जिंदगी का सबसे अच्छा तोहफा माना हमारे प्रयासों से दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना।

🌹 *σм ѕнαитι.*🌹

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

भगवान कहते हैं कि कर्म करने में तुम *स्वतंत्र* हो पर फल भोगने में *परतंत्र* ... अर्थात तुम क्या और कौन सा कर्म करते हो यह तुम्हारी *मर्जी* पर है। लेकिन उस अनुसार जो फल आता है... उसे भोगने में तुम्हारी इच्छा नहीं चलती, उसे तो हर हाल में *भोगना* ही पड़ता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*02 मई:-*_ मन को मारना नही सुधारना है और वह युक्ति हमे शान्ति में बैठकर स्वयम ही निकालनी है।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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           ओम शांति
*मित्रता एकअनमोल रत्न है*  *" सच्चा मित्र ईश्वर का वरदान होता है Iसच्चा मित्र मिलना हमारा सौभाग्य है I ऊपरी मित्रता निभाने वाले, हमारे सुख में हमारा साथ देने वाले मित्र तो बहुत मिल जाते हैं किन्तु सच्चे मित्र तो कुछ ही होते हैं जो जीवन कि हर परिस्थिति में हमारा साथ निभाते हैं I मित्रों से मन की बात कहकर मन हल्का किया जा सकता है, अन्यथा एकाकीपन अभिशाप की तरह हमें सताता है I विपत्ति के समय साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है I सच्चे मित्र संकट के समय आगे खड़े रहते हैं I सच्चे मित्र का चुनाव करने मैं सतर्कता बरतनी चाहिए और विवेक से काम लेना चाहिए I जो मित्र के दुख को बड़ा समझे, अवगुणों को हमारे सामने प्रकट कर उन्हें दूर करने मैं सहायता करे, हमें सही मार्ग दिखाए, प्रेरणा दे, पीठ पीछे अहित न करेऔर मन में कुटिलता न रखे वही सच्चा मित्र होता है I इतने गुणों से परिपूर्ण मित्र का मिलना वास्तव में मनचाहा वरदान   प्राप्त करने के सामान है I*
    ॐ शान्ति
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      ओम शांति
    *स्वाद और विवाद में अधिक न उलझें।*

      यदि व्यक्ति का शरीर स्वस्थ हो और मन में शांति हो, तो फिर और क्या चाहिए? *जिसका शरीर स्वस्थ है, मन शांत है, वही व्यक्ति सुखी है।*

      यूं तो अपने मन में लोग बहुत सी इच्छाएँ रखते हैं, उन का कोई अंत नहीं है। दूसरों से लोग बहुत सी आशाएं रखते हैं, उनका भी कोई अंत नहीं है। इच्छाओं और आशाओं को पूरा करते रहने से, ये दोनों और बढ़ती जाती हैं।

*जो व्यक्ति अपनी इच्छाओंं और आशाओं को बढ़ाता जाता है, वह जीवन में कभी सुखी नहीं हो सकता।*

सुखी रहना तो सभी चाहते हैं, परंतु अपनी अविद्या के कारण काम तो ऐसे करते हैं, जिससे रोगी और अशांत बनते जाते हैं। 

           आज पूरा विश्व रोगों और अशांति का घर बना हुआ है। अपवादस्वरूप कुछ ही लोग शरीर से स्वस्थ एवं मन से शांत मिलेंगे। अधिकांश लोग तो किसी न किसी शारीरिक रोग से ग्रस्त एवं मानसिक चिंताओं से परेशान हैं। यदि आप भी अपने शरीर को स्वस्थ रखना, तथा मन को शांत रखना चाहते हैं, तो आपको भी कुछ विशेष कार्य करने होंगे। 


*शारीरिक रोगों का मूल कारण भोजन माना जाता है। अब भोजन का स्वाद सुख लेने के चक्कर में लोग, मात्रा से अधिक भोजन खाते हैं। बिना भूख के खाते हैं। प्रतिकूल भोजन खाते हैं। इसलिए रोगी पड़ते हैं।*

और सहनशक्ति नम्रता सभ्यता आदि सद्गुण  कम होते जा रहे हैं। क्रोध ईर्ष्या अभिमान आदि दोष जीवन में बढ़ते जा रहे हैं। जिनका परिणाम यह है कि व्यक्ति शारीरिक स्तर पर रोगी; और मानसिक स्तर पर अशांत होता जा रहा है। 

         *यदि आप शरीर से स्वस्थ रहना चाहते हों, लंबी आयु जीना चाहते हों, तो आपको भोजन में स्वाद पर नियंत्रण करना होगा।* भोजन को स्वाद सुख लेने के लिए न खाएं,  बल्कि जीवन रक्षा के लिए खाएँ। *इसी प्रकार से शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए दूसरों के साथ लड़ाई झगड़ा न करें। अपने अंदर थोड़ी सहनशीलता बढ़ाएँ। झगड़ालू लोगों से बच कर रहें। धार्मिक बुद्धिमान मनुष्यों के साथ मित्रता आदि व्यवहार रखें।* आप शारीरिक रोगों और मानसिक तनाव से मुक्त होकर, आनंद से अपना जीवन जी पाएंगे।
           Om shanti
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*अंधेरे मे जब हम दीया हाथ मे लेकर चलते है तो हमे यह भ्रम रहता है कि हम दीये को लेकर चल रहे है....*
*जबकि सच्चाई एकदम उल्टी है दीया हमे लेकर चल रहा होता है ।*

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अनमोल वचन :

दूध के गिलास को समुन्दर में डालो तो दूध का पता ही नही चलेगा कहाँ गया ? और यदि उसी दूध को थोड़ा गर्म करके जाग (खट्टा) लगाकर एकांँत में कुछ देर के लिए रख दें तो दही बन जाता है,उसी का मंथन करके मक्खन निकलेगा और मक्खन को समुन्दर में डालो तो वो समुन्दर में ऊपर ही तैरेगा ! हम उस दूध के समान है और ये संसार समुन्दर के समान है ! अब फैसला हमारा है कि हमने दूध बनकर संसार रूपी समुन्दर में बह जाना है या प्रभु  का सिमरन और ज्ञान मंथन करके मक्खन बनकर तैर कर समुन्दर रूपी संसार के भवसागर को पार करना है !

🙏ओम् शांति🙏

🌺आपका दिन शुभ हो 🌺

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

भगवान से कुछ पाने के लिये नहीं... *भगवान* को पाने के लिये उसे *याद* करो, क्योंकि जिसे भगवान *मिल* गया... उसके लिये संसार की किसी भी वस्तु को पाना *सहज* हो जाता है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐


प्रेरणादायक कहाँनी 📚

✍🏼 दो भाई 👬🏼 समु्द्र🏝के किनारे टहल रहे थे , दोनों में किसी बात को लेकर बहस हो रही थी, अचानक बड़े 🙎🏻‍♂ भाई ने छोटे 💁🏻‍♂भाई को थप्पड़ मार दिया l

छोटे भाई ने कुछ ❌नहीं कहा सिर्फ रेत🏝 पे लिखा ...."आज मेरे भाई ने मुझे मारा" l

अगले दिन🌅 दोनों फिर समुद्र के किनारे घुमने निकले , छोटा भाई 💁🏻‍♂समुद्र में नहाने लगा , अचानक वो डूबने लगा ,बड़े भाई 🙎🏻‍♂ ने उसे बचाया l

छोटे भाई ने पत्थर पे लिखा ...."आज मेरे बड़े भाई ने मुझे बचाया" l बड़े भाई 🙎🏻‍♂ ने पुछा ....!! जब मेंनै तुम्हें मारा तो तुमने रेत पे लिखा, ओर🌅 आज मेंनै तुमको बचाया तो पत्थर पे लिंखा; ऐसा क्यो ......???

विवेकशील छोटे भाई💁🏻‍♂ ने जवाब दिया --------- " जब हमें कोई दु:ख दे तो रेत पे लिखना चाहिए ताकि वो जल्दी मिट जाए,परन्तु जो हमारे लिए अच्छा करता हैं .....तो हमें पत्थर पे लिखना चाहिए .... जो मिट न पाए और हमेशा के लिए यादगार बन जाए ll

ॐ👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️ शांति.🙏🏻😊

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