*कोरोना महामारी के बाद इस महामारी से कैसे बचेंगे किसान -- पूर्व कृषि मंत्री चंदशेखर साहू* - fastnewsharpal.com
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*कोरोना महामारी के बाद इस महामारी से कैसे बचेंगे किसान -- पूर्व कृषि मंत्री चंदशेखर साहू*

 *छत्तीसगढ़ शासन की लचर कार्यवाही - राज्य में बढ़ेगा गुणवत्ता   हीन खाद व बीज का व्यापार*



*कोरोना महामारी के बाद इस महामारी से कैसे बचेंगे किसान -- पूर्व कृषि मंत्री चंदशेखर साहू*



गोबरा नवापारा नगर

 छत्तीसगढ़ राज्य एक कृषि प्रधान प्रदेश है कृषि कार्य करने हेतु कृषकों को मुख्य कृषि आदान के रूप में उर्वरक , बीज एवं कीटनाशक की आवश्यकता होती है आदान सामग्रियों का विक्रय शासकीय एवं निजी कृषि संस्थान द्वारा किया जाता है जिसका निरीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण का संपूर्ण दायित्व कृषि विभाग का होता है वर्तमान में मानसून प्रारंभ होने के साथ ही खरीफ सत्र का कृषि कार्य आरंभ हो जाएगा व कृषको को उक्त कृषि आदानो की आवश्यकता भी पड़ेगी। वर्तमान में शासकीय व निजी विक्रय संस्थानों द्वारा विभिन्न संस्थानों से भारी मात्रा में कृषि अदानो जैसे उर्वरक, बीज एवं कीटनाशकों का भंडारण किया जा रहा है उक्त कृषि आदानो का भंडारण इतनी भारी मात्रा में होता है कि वर्षों से कृषि आदानो की कालाबाजारी नकली खाद व कीटनाशक एवं गुणवत्ताहीन कृषि आदानो का अंदेशा बना रहता है व समय-समय पर उजागर भी हुआ है जिसका भयावह परिणाम किसानों की आत्महत्या के स्तर तक भी देखा गया है अतः छत्तीसगढ़ के कृषकों के हित में कृषि आदान का निरीक्षण व गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है ताकि कृषकों को सही मूल्य में गुणवत्ता युक्त कृषि आदान प्राप्त हो सके व खुले बाजार में इसकी कालाबाजारी पर रोक लगाया जा सके।


कृषि विभाग मे उक्त कृषि आदानो के निरीक्षण व गुणवत्ता नियंत्रण हेतु उर्वरक निरीक्षक व कीटनाशक निरीक्षक एवं बीज निरीक्षक के पद होते हैं इन निरीक्षकों का मूल पद कृषि विकास अधिकारी व वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं सहायक संचालक कृषि होता है भारत शासन के कीटनाशक नियम 1971 बिंदु 26 एवं द फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर 1985 नियम 27 (A) 1 के अंतर्गत ऐसे कृषि विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जिनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कृषि विज्ञान में स्नातक या रसायन शास्त्र में स्नातक हो वह उर्वरक एवं कीटनाशक निरीक्षक होते हैं इसके अलावा सीड रूल्स 1968 नियम 22 के अंतर्गत उक्त पद धारण करने के साथ शैक्षणिक योग्यता कम से कम कृषि विज्ञान में स्नातक अनिवार्य है तभी वह बीज निरीक्षक का कार्य कर सकता है।


कृषि विभाग ने इस तथ्य को पूर्णतः स्वीकार किया है कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 कृषि विकास अधिकारी ही उर्वरक निरीक्षक के रूप में उपलब्ध हैं एवं लगभग 100 वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी व सहायक संचालक कृषि निरीक्षक होने की पात्रता रखते हैं जबकि प्रत्येक विकासखंड में कम से कम तीन निरीक्षक होने से कृषि आदान गुण नियंत्रण का कार्य सुगमता से हो सकता है राज्य में 146 विकास खंडों में निरीक्षको की संख्या लगभग 500 के मुकाबले बहुत ही अल्प है इस प्रकार निरीक्षकों की कमी से विभागीय कार्य व्यवस्था संचालन में कठिनाई होती है इस संबंध में महालेखाकार के अंकेक्षक दल द्वारा भी समय-समय पर आपत्ति ली जाती रही है


 उक्त समस्याओं के निराकरण की दिशा में कृषि विभाग द्वारा विभागीय भर्ती नियम का अनुसरण करते हुए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से कृषि विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया दिसंबर 2020 में प्रारंभ की थी तदुपरांत 3 फरवरी 2021 को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक संपन्न हुई  एवं 25 फरवरी 2021 को पदस्थापना प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया, उक्त पदोन्नति से राज्य में लगभग 250 की संख्या में कृषि स्नातक योग्यता धारी कृषि विकास अधिकारी प्राप्त होंगे जिससे राज्य में उर्वरक एवं कीटनाशक व बीज संबंधी गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य सुचारू रूप से चलने में पर्याप्त सहयोग मिलेगा।


उक्त पदोन्नति में पदस्थापना आदेश जारी करना शेष है परंतु कृषि विभाग में शासन स्तर पर अफसरशाही एवं लालफीताशाही इस कदर हावी है कि पदोन्नत अधिकारियों का पदस्थापना प्रस्ताव विगत 3 माह से मंत्रालय स्तर पर लंबित कर रखा गया है जबकि सामान्य प्रशासन विभाग का कड़ा निर्देश है कि विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से अधिकतम 27 कार्य दिवस के भीतर पदस्थापना आदेश जारी करना होता है कृषि विभाग के शासन स्तर के अधिकारियों द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग के उक्त समय सीमा की भी अवहेलना कर दी गई है जिसका नकारात्मक परिणाम के रूप में कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है  तथा इसका परिणाम कृषको को गुणवत्ताहीन कृषि आदानो के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

अपने आप को किसानों का हितैषी कहने वाले नेता व उच्च अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है जबकि गत वर्ष भी भारी संख्या में गुणवत्ता हीन खाद कीटनाशक एवं अन्य आदान सामग्रियों का मामला उजागर हुआ था वह इसी तारतम्य में कृषक की आत्महत्या का मामला भी सामने आया था

छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के दिशा निर्देशों के अनुरूप पदोन्नति उपरांत पदस्थापना समय सीमा मे करने हेतु बार-बार मांग की गई है एवं आंदोलनात्मक कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है परंतु कृषि विभाग छत्तीसगढ़ शासन कर्मचारी व कृषकों के इस संवेदनशील मामलों में त्वरित कदम उठाने की मंशा में नहीं दिख रही है जो की बहुत ही दुखद व निराशाजनक है।

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