आज का सुविचार(चिंतन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिंतन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..04-06-2021*..🎋


✍🏻पछतावा अतीत नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य नहीं संवार सकती इसलिए वर्तमान का आनंद लेना ही जीवन का सच्चा सुख है।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥

✍🏻समझदारी की बातें सिर्फ़ दो ही लोग करते हैं एक वो जिसकी उम्र और तर्जुबा दोनो अधिक हो और एक वो जिसने बहुत कम उम्र में अच्छा और बुरा दोनो वक़्त देखा हो।
🌹 *σм ѕнαитι.*
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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*04 जून:-*_ अब साइंस की दवाइयो से शरीर में एनर्जी भर्ती है तो सोचिये साइलेंस में परमात्मा पिता की याद से आत्मा में कितनी एनर्जी भरेगी।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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            ओम शांति
*जीवन का एक सीधा सा नियम है, और वो ये कि अगर अनुशासन नहीं तो प्रगति भी नहीं।। अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है। अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती है।। और अनुशासन में रहकर ही वायु फूलों की खुशबु को अपने में समेटकर स्वयं भी सुगंधित हो जाती है व चारों दिशाओं को सुगंध से भर देती है।। पानी अनुशासन हीन होता है, तो बाढ़ का रूप धारण कर लेता है, हवा अनुशासन हीन होती है। तो आँधी बन जाती है, और अग्नि अगर अनुशासन हीन हो जाती है, तो महा विनाश का कारण बन जाती है।। ऐसे ही अनुशासनहीनता स्वयं के जीवन को तो विनाश की तरफ ले ही जाती है साथ ही साथ दूसरों के लिए भी विनाश का कारण बन जाती है।। गाड़ी अनुशासन में चले तो सफर का आनंद और बढ़ जाता है। इसी प्रकार जीवन भी अनुशासन में चले तो जीवन यात्रा का आनंद और बढ़ जाता है।। जीवन का घोड़ा निरंकुशता अथवा उच्छृंखलता का त्याग करके निरंतर प्रगति पथ पर अथवा तो अपने लक्ष्य की ओर दौड़ता रहे, उसके लिए अपने हाथों में अनुशासन रुपी लगाम का होना भी परमावश्यक हो जाता है।।*
       ओम शांति
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अनमोल वचन : 

आशा से मनुष्य सौ बरस जी सकता है किन्तु यदि आशा टूट जाये तो वह जीवित नहीं रह सकता, भले ही उसके घर में करोडों की धन दौलत भरी हो। यह आशा और विश्वास जीवन की ताकत है।।संकट जरूर है,लेकिन इसी विष से अमृत निकलेगा। निश्चित ही मनुष्य विजयी होगा,मनुष्यता जीतेगी। तूफान तो आना है, आकर चले जाना है। बादल है ये कुछ पल के,छा कर चले जाना हैं.......... 

🙏ओम् शांति🙏

🎈आपका दिन शुभ हो 🎈

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         ओम शांति
*आनंद किसी से मिलता नहीं है, भीतर से आता है। सुख सदा बाहर से आता है। सुख सदा किसी पर निर्भर होता है।। इसलिए सुख के लिए आपको सदा दूसरे का मोहताज होना पड़ता है। अगर आप आनंदित होना चाहते है, तो आप अकेले भी हो सकते हैं।। जिसे आनंद मिलता है, उसे दुख का उपाय नहीं रह जाता। सुख का विपरीत दुख है। दया के समानांतर खड़ी है, क्रूरता। आनंद अकेला है।। क्योंकि यह स्वयँ पर है। द्वंद्व के बाहर है।।*
         ॐ शांति
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🙏 *ॐ शांति* 🙏

सकारात्मक सोच का ये मतलब नहीं होता कि हम हर बार ये *आशा* करें कि सब कुछ *श्रेष्ठ* हो, बल्कि उसका मतलब ये *स्वीकार* करना है कि जो कुछ हो रहा है... वही *श्रेष्ठ* है।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
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             *🌟★ OM SHANTI ★🌟*

_★ जीवन में ज्ञान और प्रेरणा कहीं से भी एवं किसी से भी मिल सकती है । प्रकृति ऐसे अनंत उदाहरणों से भरी हुई है, जो हमें सिखाती है कि जीवन हर पल आनंद से सराबोर है । नदियों का कल कल करता संगीत, झूमते गाते पेड़ एवं छोटे छोटे जीव हमें सिखाते हैं कि जीवन को ऐसे जियो की जीवन का हर पल खुशियों की सौगात बन जाए ।_

_● जैसे मुर्गा रोज जल्दी सवेरे उठने की प्रेरणा देता है । कोयल मीठी बोली बोलने की प्रेरणा देती है । चिड़िया चीं चीं करती हुई यह कहती है कि संगठन में शक्ति है बड़ी, दुश्मन जाता जिससे हार ।_

_● कितनी आसानी से जीव जंतु  अपनी अच्छाइयों से, जीवन को संवारने का संदेश दिया है । ऐसे कई जीव हैं जो हमें सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देते हैं । कुनबे के साथ रहने वाली चींटी संघर्ष और मेहनत का सजीव उदाहरण है ।_

_● डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन जी ने अपनी कविता हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती के माध्यम से चीटियों के संघर्ष को बहुत ही खूबसूरती से परिलक्षित किया है । चीटियां सिखाती हैं कि स्वयं पर भरोसा रखें । दस में से नौ बार असफल होने के बाद भी हारने के बजाय दोगुने परिश्रम से प्रयास करना ही जीत है । बिना किसी को खौफ और रुकावट के आसमान की ऊंचाइयों को छूते बाज के हौसले हमें सिखाते हैं कि राह में आने वाली अड़चनों को नए अनुभव का आधार माने । ऊंची सोच रखें, सारा आकाश हमारा है ।_

_● आत्म सम्मान के साथ जीने का साहस पपीहा एवं राजहंस से सीखा जा सकता है । आत्मविश्वास से लबरेज यह जीव, परिस्थितियों से छूटने व आगे बढ़ने की शिक्षा देते हैं । सर्वदा सत्य हैं कि उत्साह समस्त प्रगति का स्त्रोत है । मधुमक्खियों की दिनचर्या इस बात का जीता जागता उदाहरण है । उड़ने वाले कीटों में यह सबसे अधिक उपयोगी है । इनकी खासियत है कि यह अपनी रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना दिलेरी से करती है । इन का छत्ता प्राकृतिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है । शहद बनाने के कौशल के साथ साथ यह परागण में मदद कर परहित कार्य भी करती हैं । इनका जीवन हमें संदेश देता है कि यदि हममें उत्साह है तो हम कुछ भी कर सकते हैं । उत्साह है तो सफलता है ।_

_● कुछ समय पहले की घटना है । ब्रिटेन में एक बच्चा फिनले मस्तिष्कघात का शिकार हो गया था । डॉक्टर के अनुसार वह ताउम्र अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता था । एक दिन उसकी मां उसके लिए एक बत्तख का बच्चा लेकर आई किंतु संयोगवश उसके पैर में कुछ दिक्कत थी । बत्तख को पशु चिकित्सक को दिखाया गया । चिकित्सक ने हड्डी जोड़ने के लिए बत्तख के पैर में लकड़ी का टुकड़ा बांध दिया । फिनले और बत्तख की दोस्ती हो गई । फिनले बतख की चाल को बड़े गौर से देखता और उसकी नकल कर चलने की कोशिश भी करता । परिणाम यह हुआ कि बच्चा चलने लगा ।_

_● ऐसे अनगिनत उदाहरण है जिनमें छोटे छोटे जीव जंतु ने इंसान के जीवन को अपनी अच्छाइयों से खुशनुमा बना दिया है  यदि हमें अपने जीवन में सफलता के स्वर्णिम सोपानों पर चढ़ना है तो प्रकृति की सभी रचना को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए । क्योंकि ऐसा कोई अक्षर नहीं है जो मंत्र न हो, ऐसा कोई पौधा नहीं जो औषधि न हो । ऐसा कोई जीव नहीं जो जीवन की सच्चाई से हमें रूबरू ना कराता हो ।_

_● प्रकृति केवल हमें जीना ही नहीं सिखाती वरन् हमारी पालना भी करती है आजीवन । प्रकृति के इस ऋण को हमें ईश्वर से परमात्म शक्ति लेकर प्रतिदिन सकाश देना चाहिए ।_

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              *🔰◆ OM SHANTI ◆🔰*

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    *☞ “क्षमा के सकारात्मक परिणाम” ☜*


_✪ एक साधक ने अपने दामाद को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार चल गया लेकिन उसने रूपये ससुरजी को नहीं लौटाये।_


_✪ आखिर दोनों में झगड़ा हो गया. झगड़ा इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। साधक हर समय हर संबंधी के सामने अपने दामाद की निंदा, निरादर व आलोचना करने लगे।_


_✪ उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें दामाद का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा कह सुनायी।_


_✪ संत श्री ने कहाः 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर दामाद के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा कर दो।' साधक ने कहाः "महाराज ! मैंने ही उसकी मदद की है और क्षमा भी मैं ही माँगू !"_


_✪ संत श्री ने उत्तर दियाः "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।" साधक की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"_


_✪ "बेटा ! तुमने मन ही मन अपने दामाद को बुरा समझा...अपनी इस भूल से तुमने अपने दामाद को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगो। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है।"_


_✪ साधक की आँखें खुल गयीं। संत श्री को प्रणाम करके वे दामाद के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया।_ 


_✪ दरवाजा उनके दोहते ने खोला। सामने नाना जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो तो नाना जी आये हैं, नाना जी आये हैं....।"_


_✪ माता पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' बेटी हर्ष से पुलकित हो उठी, 'अहा !पन्द्रह वर्ष के बाद आज पिता जी आये हैं।'_


_✪ प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सकी। साधक ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर दामाद को कहाः "बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो।" "क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। दामाद उनके चरणों में गिर गये और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगे।_


_✪ ससुरजी के प्रेमाश्रु दामाद की पीठ पर और दामाद के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु ससुरजी के चरणों में गिरने लगे। पिता पुत्री से और पुत्री अपने वृद्ध पिता से क्षमा माँगने लगी। क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप ! सबकी आँखों से अविरल अश्रुधारा बहने लगी।_ 


_✪ दामाद उठे और रूपये लाकर ससुर जी के सामने रख दिये। ससुरजी कहने लगेः "बेटा ! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ।_


_✪ मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।" दामाद ने कहाः "पिताजी ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।"_


_✪ साधक ने दामाद से रूपये लिये और अपनी इच्छानुसार बेटी व नातियों में बाँट दिये। सब कार में बैठे, घर पहुँचे।_


_✪  पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब माँ-बेटी, भाई-बहन, ननद-भाभी व बालकों का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो। सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। क्षमा माँगने के बाद उस साधक के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशा सब मिट गये और उसके अंदर असीम शांति आ गयी..._


_✪ क्षमा मांग लेना और क्षमा कर देना आपको दिव्यता से भर देते हैं।_


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                 *☀️★ ओम शान्ति ★☀️*


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