आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..09-06-2021*..🎋


✍🏻वाणी और विचार ये दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कंपनी के हैं, जितनी क्वालिटी और गुणवत्ता अच्छी रखेंगे उतनी कीमत ज्यादा मिलेगी।

💐 *Brahma Kumaris* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻पहली बार की सफलता हमारी किस्मत पर निर्भर हो सकती है, लेकिन बार-बार की सफलता तो सिर्फ हमारी कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम होता है।

🌹 *σм ѕнαитι.*

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*09 जून:-*_ हमेशा सब के लिए अच्छा करो तो दुवाए स्वतः मिलेगी क्योकि मूनकिन और नामुनकिन तो सिर्फ हमारी सोच में है इसलिए *ALLWAYS GOOD THIK*।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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अनमोल वचन:

जिंदगी का अच्छा तोहफा माना अपने चेहरे पर मुस्कान रखना। लेकिन जिंदगी का सबसे अच्छा तोहफा माना अपनी कोशिशों से दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना.....   

🙏ओम् शान्ति 🙏

😄आपका दिन शुभ हो 😋

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We need  'Strength' while doing the Possible... 
But
We need  'Faith'  while doing the  Impossible...!

Help the NEEDY👨‍👩‍👧‍👦 FAMILIES 

          🌹Sweet👆🏻💫🇲🇰🌌🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️ Night🌹

*पर्सनालिटी कैसी है,*
*यह महत्वपूर्ण नहीं है__*

*मेंटलिटी कैसी है*
*यह ज्यादा महत्वपूर्ण है!!*
🙏 *ॐ शांति* 🙏

मनुष्य जितना *इंद्रियों* के वश होता जाता है... उतनी ही उसकी आयु घटती जाती है। इंद्रियां केवल *भौतिक* सुखों की *भोगना* के लिये हैं, जो सदा काल नहीं रहेगा। अतः भले ही सांसारिक सुख भोगो... पर उस सुख के साथ *चिपको* नहीं, क्योंकि संसार की कोई भी *वस्तु* अविनाशी नहीं है। अविनाशी है तो बस... तुम खुद और खुदा...

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐

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  🌟══• *“जो चाहोगे सो पाओगे”* •══🌟

_⸙ एक साधु था, वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था ,“जो चाहोगे सो पाओगे, जो चाहोगे सो पाओगे।”_

_⸙ बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीँ देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे।_

_⸙ एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसनेँ उस साधु की आवाज सुनी, “जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे।”, और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया।_

_⸙ उसने साधु से पूछा -“महाराज आप बोल रहे थे कि ‘जो चाहोगे सो पाओगे’ तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैँ जो चाहता हूँ?”_

_⸙ साधु उसकी बात को सुनकर बोला – “हाँ बेटा तुम जो कुछ भी चाहता है मैँ उसे जरुर दुँगा, बस तुम्हे मेरी बात माननी होगी। लेकिन पहले ये तो बताओ कि तुम्हे आखिर चाहिये क्या?”_

_⸙ युवक बोला- मेरी एक ही ख्वाहिश है मैँ हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ।_

_⸙ साधू बोला, कोई बात नहीँ मैँ तुम्हे एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे मोती बनाना चाहोगे बना पाओगे ! और ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ आदमी की हथेली पर रखते हुए कहा, पुत्र, मैं तुम्हे दुनिया का सबसे अनमोल हीरा दे रहा हूं, लोग इसे ‘समय’ कहते हैं, इसे तेजी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लो और इसे कभी मत गंवाना, तुम इससे जितने चाहो उतने हीरे बना सकते हो।_

_⸙ युवक अभी कुछ सोच ही रहा था कि साधु उसका दूसरी हथेली, पकड़ते हुए बोला, पुत्र, इसे पकड़ो, यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लोग इसे “धैर्य” कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम ना मिलेंटो इस कीमती मोती को धारण कर लेना, याद रखन जिसके पास यह मोती है, वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है।_

_⸙ युवक गम्भीरता से साधु की बातों पर विचार करता है और निश्चय करता है कि आज से वह कभी अपना समय बर्वाद नहीं करेगा और हमेशा धैर्य से काम लेगा । और ऐसा सोचकर वह हीरों के एक बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम शुरू करता है और अपने मेहनत और ईमानदारी के बल पर एक दिन खुद भी हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनता है।_

_⸙ *‘समय’* और *‘धैर्य’* वह दो हीरे-मोती हैं जिनके बल पर हम बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। अतः ज़रूरी है कि हम अपने कीमती समय को बर्वाद ना करें और अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य से काम लें।_

                *☀️◆ ओम शान्ति ◆☀️*

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          *💙◆●OM SHANTI●◆💙*

_★ कर्म रूपी कड़ियों से जुड़कर मानव जीवन बनता है । जैसा कर्म वैसा जीवन यह अकाट्य सत्य है । हम जो कुछ करते हैं मानो बीज होते हैं, जो कालांतर में उगकर फल के रूप में हमारे सामने आता है और हमारा भाग्य बन जाता है । करते समय जो कर्म था, लौटते समय वही भाग्य बन जाता है ।_

_● कर्म के तीन स्तर है _ मनसा, वाचा, कर्मणा । मनसा अर्थात् सोचना, वाचा अर्थात् बोलना और कर्मणा अर्थात् शरीर द्वारा कर्म करना ।_

_● मनसा _ हम जिसके प्रति जैसा सोचेंगे, वह व्यक्ति भी हमारे प्रति वैसा भी सोचेगा । कहते हैं विचार भी यात्रा करते हैं । जैसे फोन के नंबर दबाने पर हजारों मील दूर व्यक्ति के फोन में घंटी बज जाती है । यह इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेवज के माध्यम से होता है । इसी प्रकार, हमारे मन में उठे विचार से हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति के विचार प्रभावित हो सकते हैं । विचार एक सेकण्ड में कहीं से कहीं पहुंचकर अपना प्रभाव डाल सकते हैं । अच्छे विचारों का प्रभाव अच्छा और बुरे विचारों का प्रभाव पूरा होता है । वास्तव में जब हम किसी के बारे में कुछ भी सोचते हैं तो हमारे विचारों के प्रकंपन सूक्ष्म प्रभाव उस व्यक्ति की दिशा में जाकर उसके विचारों को प्रभावित करते हैं जिसका पता उसे भी नहीं पड़ता कि यह प्रभाव कहां से आ रहा है परंतु उसके विचार प्रभावित अवश्य होते हैं ।_

_●भगवान कहते हैं, भावना का फल अवश्य मिलता है । आप सबकी श्रेष्ठ भावना है, स्वार्थ रहित भावना है, रहम की भावना है, कल्याण की भावना है । ऐसी भावना का फल नहीं मिले,  यह नहीं हो सकता । जब बीज शक्तिशाली हो तो फल जरूर मिलता है । सिर्फ इस श्रेष्ठ भावना के बीज को सदा स्मृति का पानी देते रहो तो समर्थ फल, प्रत्यक्ष फल के रूप में अवश्य प्राप्त होता ही है । क्वेश्चन नहीं, होगा या नहीं होगा । सदा समर्थ स्मृति का पानी है अर्थात् सर्व आत्माओं के प्रति  शुभ भावना है तो विश्व शांति का प्रत्यक्ष फल मिलना ही है ।_

_● वाचा _ हम जो बोलते हैं वह भी कर्म है और उसका फल भी बीज के अनुरूप ही निकलता है । इसीलिए कहा गया है _ शब्द संभल के बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव । एक शब्द बने औषधि और एक शब्द करे घाव ¡¡_

_● मान लीजिए हजारों की सभा में हमने एक शब्द उछाला कि आप सभी बहुत अच्छे हैं, तो हमारे इस एक बीज के हजारों फल बनकर हमारे पास वापस लौटेंगे । सामने बैठे सभी कहेंगे, आप भी बहुत अच्छे हैं । हमारा दिया हुआ ही हमारे पास वापस आ गया । हम जो बोलेंगे, प्रतिध्वनि हो कर वही लौट आएगा । आज हमारे पास जो कुछ है वह हमारा दिया हुआ ही लौटा है, चाहे वह अच्छा है या बुरा है । जैसे हम बाजरे के एक दाने से हजारों दाने पाते हैं, मकई के दाने से भी हजारों दाने पाते हैं, इसी प्रकार, एक नकारात्मक शब्द यह सकारात्मक शब्द बोला तो बिल्कुल वैसे ही हजारों शब्द उग  आएंगे ।_

_● कर्मणा _ शरीर और इसकी इंद्रियों द्वारा किए जाने वाले कर्मों को कर्मणा कर्म कहा जाता है । एक राजस्थानी कहानी से इसको अच्छे से समझ सकते हैं । पुराने जमाने की बात है, एक गरीब ठठेरा तीर्थ यात्रा के लिए गया और अपने जीवन भर की कमाई, गांव के ठाकुर के पास रख गया । कई तीर्थों की यात्रा करके वह छह माह बाद लौटा और ठाकुर जी से अपना धन मांगा । ठाकुर जी के देने से मुकर गए । जब इस गरीब ने रोना चिल्लाना शुरू किया तो ठाकुर जी ने अपने आदमियों को बुलाकर इसे धक्के मार कर निकालने का आदेश दे दिया । जब आदमी इसे पकड़ कर ले जाने लगे तो ठाकुर जी की दहलीज पर यह कहते हुए ठठेरे के प्राण निकल गए कि यह धन तो मैं लेकर ही रहूंगा ।_

_● ठाकुर जी ने अंतिम संस्कार करवा दिया और सोचा बला टली । छह मास बाद ठाकुर जी को पोता जन्मा पर जन्म से बीमार । इसके इलाज में पानी की तरह पैसा बहने लगा । बालक जब आठ साल का हुआ तो यह कह कर संसार से विदा हो गया कि ठठेरे के रूप में मैंने जो धन आपको दिया था, वह मैंने अपने शरीर पर लगवा लिया । अब आप पर मेरा कोई कर्ज नहीं बचा इसीलिए मैं जा रहा हूं ।_

_◆ कहानी हमें बता रही है कि धोखे, झूठ, ठगी से प्राप्त धन बीमारी में लगकर समाप्त हो गया है ऐसा धन आंधी की गति से आकर तूफान की गति से चला जाता है । बरकत केवल इमानदारी से किए  गए कर्मो से ही होती है ।_

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               *💎● ओम शान्ति ●💎*

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अनमोल वचन:

इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल,जग में रह जाएंँगे प्यारे तेरे बोल !! जब हम यात्रा पर होते हैं और हमें पता होता है कि एक दिन हमें अपने घर वापस लौटना है तो हम किसी से लड़ते झगड़ते नहीं, सबसे मीठे होकर रहते हैं क्योंकि हमें पता होता है कि हमें अब वापस घर लौटना है, लेकिन सुबह शाम फोन कर अपने घर का समाचार जरूर लेते रहते हैं । इसी प्रकार हम भी तो यहांँ भगवान के घर से आए हैं ना और एक दिन तो वापस सचखंड चले ही जाना है तो क्यों ना हम खुद को परदेसी समझकर सबके बीच प्यार से रहे और सुबह शाम भगवान का सिमरन अपने असली घर सचखंड को हर घड़ी याद करते रहें........ 

🙏ओम् शांति 🙏

🎈आपका दिन शुभ हो🎈

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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


युधिष्ठर को पूर्ण आभास था 

कि कलयुग में क्या होगा ?

पूरा अवश्य पढें।

अच्छा लगेगा  यह तय🏵️      🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅


पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था।


पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान 

ढूंढ रहे थे।


उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाय।


शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।


अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी

और वो आकर्षित हो गया ,


भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।


भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे,


भीम बोला- मुझे महल देखना है!


शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है ।


1- शर्त महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं।

2-शर्त महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।

3-शर्त अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।


भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा ।


और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया ।


वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा,


आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ।


बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है।


दरबान - क्या देखा आपने ?


भीम- महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया।


दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया।


अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया।


आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल ।


बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा

मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही । अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।


दरबान ने पूछा क्या देखा,


अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।


शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं ।


नकुल आया बोला

 मुझे महल देखना है ।


फिर वह उत्तर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है उसे कुछ समझ नहीं आया द्वार पर आया ।


शनिदेव ने पूछा क्या देखा ?


नकुल बोला महाशय गाय बछियों का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया।


सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।


चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये।


भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है।


युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ?


भीम ने कुंऐ के बारे में बताया


तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे।


भीम को छोड़ दिया।


अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ??


उसने फसल के

 बारे में बताया 


युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है।

वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शूद्र की लड़की और शूद्र के घर बनिए की लड़की ब्याही जायेंगी।


अर्जुन भी छूट गया।


नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया ।


तब युधिष्ठिर ने कहा- कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे ।


तब नकुल भी छूट गया।


सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृतांत बताया,


तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।।  आज के कलयुग में यह

 सारी बातें सच

 साबित हो रही है ।।




👏🏻👏🏻  जयश्रीकृष्ण, जय श्रीराधे 👏🏻👏🏻

  🙏🏻  *ॐ शांति*🙏🏻

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