आज का सुविचार(चिन्तन) - fastnewsharpal.com
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आज का सुविचार(चिन्तन)

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💠 *Aaj_Ka_Vichar*💠

🎋 *..26-08-2021*..🎋


✍🏻दो ही चीजें  ऐसी हैं, जिन्हें देने में किसी का कुछ नहीं जाता एक मुस्कुराहट और दूसरी दुआ हमेंशा बांटते रहिए। हमेंशा बढ़ती रहेंगी।

💐 *Brahma Kumaris Daily Vichar* 💐

🌷 *σм ѕнαитι*🌷

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  💥 *विचार परिवर्तन*💥


✍🏻हर किसी के अन्दर अपनी ताकत और अपनी कमज़ोरी होती है, मछली जंगल मे नही दौड़ सकती और शेर पानी मे राजा नही बन सकता। इसलिए अहमियत सभी को देनी चाहिये।

🌹 *Brahma Kumaris Daily Vichar*🌹

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💧 *_आज का मीठा मोती_*💧
_*26 अगस्त:-*_ अपनी उन्नति के लिए अधिक समय लगायेंगे तो दुसरो की आलोचना करने का समय नही मिलेगा।
        🙏🙏 *_ओम शान्ति_*🙏🙏
       🌹🌻 *_ब्रह्माकुमारीज़_*🌻🌹
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     ओम शांति
*अगर चाहते हो जीवन में खुश रहना, तो दो चीज़ों को ध्यान में रखना*

*खुद पे भरोसा करना, और किसी से कुछ उम्मीद ना रखना..!*
 ॐ शांति

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🙏 *ॐ शांति* 🙏

आत्मा की तीसरी आँख *बुद्धि* है... वह जितनी *स्पष्ट* व *साफ* होगी... धरा पर चल रहे *बेहद* के खेल का वास्तविक *रहस्य* अपने आप समझ आने लगेगा।

🌸 सुप्रभात...

💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
       ओम शांति
*सन्यासी वही है, जो जानता है कि मैं अकेला हूं*
*और भुलाता नही अपने अकेलेपन को, भुलाना तो दूर, अपने अकेलेपन में रस लेता है।*
*और प्रतीक्षा करता है कि कब मौका मिले जाए और थोड़ी देर अपने अकेलेपन का स्वाद लूं*
*थोड़ी देर आंख बंद करके परमात्मा में डूब जाऊं, अकेला रह जाऊं।*
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*ओम शांति ब्रह्मा मुख द्वारा निराकार श्री भगवानुवाच* l ♥ 

👥मीठे बच्चे जब तक सदा नहीं रहती, आत्मिक स्थितिl तब तक आती रहेगी, कोई ना कोई परिस्थिति l मिटने वाले मिट्टी के देह की, मिटाओ अब स्मृति l 🧑🏿‍🦲

❤️प्रिय परमात्मा प्रियतम से, हो जाएगी सच्ची प्रीति l उनके ही याद की, चढ़ जाएगी मस्ती l पुकार रही है तुम्हें आज, मां भारती l 🌎

🤴🏻तुम्हारे ही पवित्रता से स्वर्ग थी, भारत की धरती l तुम ही हो संसार की, सबसे ऊंची हस्ती l 🤴🏻

🧎🏻तुम से ही यह सारी दुनिया, पावन बनती l इसलिए स्वयं भगवान भी गाते हैं, तुम्हारी ही कीर्तिl सारी दुनिया, तुम्हें ही पुकारती l कितने जोर- शोर से कर रहे हैं, तुम्हारी ही आरतीl 🤴🏻

🇲🇰ओ सर्वशक्तिमान शिव की, शिव शक्ति l करते आए दो युगो से जो तुम्हारी भक्ति l दे दो आप उनको शक्ति l 🇲🇰

👆🏻तुम्हारे से ही मिलनी है उनको, मुक्ति, जीवनमुक्ति l जो आत्मा अपने और भगवान बाप के पार्ट को है, यथार्थ जानतीl🧎🏻

🚶🏻‍♀️वह कभी भी किसी भी, देहधारी के नामरूप में नहीं फंसतीl वही आत्मा, परमात्मा की सेवा में निमित्त बनती l🧎🏻
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚
*जिंदगी का सच*

*हम भी वही है, संबंध भी वही हैं,*

*रास्ते भी वही है...*  

*बदलते हैं, तो सिर्फ*

*समय,संजोग और नजर !*

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🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
*वही मेरी नियति है। वही मेरा स्वभाव है।*
*उसी स्वभाव से मुझे पहचान बनानी है।*
*दूसरों से पहचान बनाने से कुछ भी ना होगा*
*अपने से पहचान बनानी है।*
*दूसरों को जानने से क्या होगा, अगर अपने को ना जाना...*
      ओम शांति
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

*कठिनाइयां"🚶🏻‍♀️😷🚶🏻‍♂️🤦🏻‍♀️🤦🏻‍♂️ जब आती हैं* 
       *तो 🤦🏻‍♂️🤦🏻‍♀️"कष्ट" देती हैं,* 
        *पर जब जाती हैं* 
*तो 🧘🏻‍♀️💫🧘🏻‍♂️"आत्मबल" का ऐसा उत्तम उपहार 🎁दे जाती है* 
*जो उन "कष्टों" "दुःखों" की तुलना में "हजारों" गुना💍 "मूल्यवान" होता है।*


Good👆🏻💫🇲🇰🌅🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️morning😊


♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 जटायु 🏵️

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अंतिम *सांस* गिन रहे *जटायु  ने कहा कि मुझे पता था कि मैं *रावण* से नही *जीत* सकता लेकिन तो भी मैं *लड़ा* ..यदि मैं *नही* *लड़ता* तो आने वाली *पीढियां* मुझे *कायर* कहती


 🙏जब *रावण* ने *जटायु* के *दोनों* *पंख* काट डाले... तो *काल* आया और जैसे ही *काल* आया ... 

तो *गिद्धराज* *जटायु* ने *मौत* को *ललकार* कहा, -- 


" *खबरदार* ! ऐ *मृत्यु* ! आगे बढ़ने की कोशिश मत करना... मैं *मृत्यु* को *स्वीकार* तो करूँगा... लेकिन तू मुझे तब तक नहीं *छू* सकता... जब तक मैं *सीता* जी की *सुधि* प्रभु " *श्रीराम* " को नहीं सुना देता...!


 *मौत* उन्हें *छू* नहीं पा रही है... *काँप* रही है खड़ी हो कर...

 *मौत* तब तक खड़ी रही, *काँपती* रही... यही इच्छा मृत्यु का वरदान *जटायु* को मिला।


किन्तु *महाभारत* के *भीष्म* *पितामह* *छह* महीने तक बाणों की *शय्या* पर लेट करके *मौत* का *इंतजार* करते रहे... *आँखों* में *आँसू* हैं ... रो रहे हैं... *भगवान* मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं...! 

कितना *अलौकिक* है यह दृश्य ... *रामायण* मे *जटायु* भगवान की *गोद* रूपी *शय्या* पर लेटे हैं... 

प्रभु " *श्रीराम* " *रो* रहे हैं और जटायु *हँस* रहे हैं... 

वहाँ *महाभारत* में *भीष्म* *पितामह* *रो* रहे हैं और *भगवान* " *श्रीकृष्ण* " हँस रहे हैं... *भिन्नता* *प्रतीत* हो रही है कि नहीं... *?* 


अंत समय में *जटायु* को प्रभु " *श्रीराम* " की गोद की *शय्या* मिली... लेकिन *भीष्म* *पितामह* को मरते समय *बाण* की *शय्या* मिली....!

 *जटायु* अपने *कर्म* के *बल* पर अंत समय में भगवान की *गोद* रूपी *शय्या* में प्राण *त्याग* रहा है.... 


प्रभु " *श्रीराम* " की *शरण* में..... और *बाणों* पर लेटे लेटे *भीष्म* *पितामह* *रो* रहे हैं.... 

ऐसा *अंतर* क्यों?...     


ऐसा *अंतर* इसलिए है कि भरे दरबार में *भीष्म* *पितामह* ने *द्रौपदी* की इज्जत को *लुटते* हुए देखा था... *विरोध* नहीं कर पाये थे ...! 

 *दुःशासन* को ललकार देते... *दुर्योधन* को ललकार देते... लेकिन *द्रौपदी* *रोती* रही... *बिलखती* रही... *चीखती* रही... *चिल्लाती* रही... लेकिन *भीष्म* *पितामह* सिर *झुकाये* बैठे रहे... *नारी* की *रक्षा* नहीं कर पाये...!


उसका *परिणाम* यह निकला कि *इच्छा* *मृत्यु* का *वरदान* पाने पर भी *बाणों* की *शय्या* मिली और .... 

 *जटायु* ने *नारी* का *सम्मान* किया... 

अपने *प्राणों* की *आहुति* दे दी... तो मरते समय भगवान " *श्रीराम* " की गोद की शय्या मिली...!


जो दूसरों के साथ *गलत* होते देखकर भी आंखें *मूंद* लेते हैं ... उनकी गति *भीष्म* जैसी होती है ... 

जो अपना *परिणाम* जानते हुए भी...औरों के लिए *संघर्ष* करते है, उसका माहात्म्य *जटायु* जैसा *कीर्तिवान* होता है।


🙏 सदैव *गलत* का *विरोध* जरूर करना चाहिए। " *सत्य* परेशान जरूर होता है, पर *पराजित* नहीं। 


 

🙏🙏🙏

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